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अमेरिका ने WHO से तोड़े सारे संबंध, चीनी छात्रों के साथ कर सकता है बड़ी कार्रवाई

संजीवनी टुडे 30-05-2020 07:42:05

इसके साथ वे अमेरिकी स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध उन चीनी कंपनियों पर कार्रवाई करने भी जा रहे हैं जो अमेरिकी कानूनों का पालन नहीं कर रही हैं।


वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ अमेरिका के सारे संबंधों को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ कोरोना वायरस को आरंभिक स्तर पर रोकने में नाकाम साबित हुआ है। 

इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से अमेरिका का रिश्ता तोड़ने का एलान करते हुए चीन पर कई पाबंदियां लगा दी हैं। संयुक्त राष्ट्र एजेंसी पर वैश्विक महामारी का केंद्र रहे चीन की 'कठपुतली' का आरोप लगाते हुए ट्रंप ने इसकी फंडिंग पहले ही बंद कर दी थी।

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ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वे विश्व स्वास्थ्य संगठन से संबंध खत्म करने के साथ ही कोरोना महामारी मामले में धोखा देने और हांगकांग मामले में ज्यादती करने पर चीन के खिलाफ पाबंदिया लगा रहे हैं। व्हाइट हाउस में ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा कि वे अमेरिका में अध्ययन कर रहे चीनी शोधकर्ताओं पर प्रतिबंध लगाने भी जा रहे हैं। ये लोग अमेरिका की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। इसके साथ वे अमेरिकी स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध उन चीनी कंपनियों पर कार्रवाई करने भी जा रहे हैं जो अमेरिकी कानूनों का पालन नहीं कर रही हैं।

अमेरिका इसके साथ ही व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में हांगकांग को मिले विशेष दर्जे को वापस लेने जा रहा है। ट्रंप ने इसके साथ ही चीन को अमेरिकी हितों से खेलने की छूट देने के लिए अपने पूर्ववर्ती शासकों की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि मैं इस बात की छूट नहीं दूंगा। हालांकि ट्रंप द्वारा चीन पर लगाए गए प्रतिबंधों को डेमोक्रेटिक व रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने बहुत मामूली बताया है। ट्रंप ने इस दौरान भारत चीन के बीच जारी तनाव पर कुछ नहीं कहा।

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WHO को कई बार घेर चुके हैं ट्रंप
कोरोना महामारी को लेकर ट्रंप ने इससे पहले भी डब्ल्यूएचअो को कई बार घेरा था। ट्रंप ने हाल ही में कोरोना वायरस संकट पर गैर जिम्मेदार तरीके से काम करने का आरोप लगाते हुए WHO को दी जाने वाली आर्थिक सहायता पर रोक लगा दी थी। ट्रंप ने कहा था कि जब तक कोरोना के प्रसार को कम करने को लेकर WHO की भूमिका की समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक यह रोक जारी रहेगी। 

ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका के करदाता डब्ल्यूएचओ को सालाना 40 से 50 करोड़ डॉलर देते हैं जबकि चीन सालाना तकरीबन 4 करोड़ डॉलर या उससे भी कम राशि देता है। ट्रंप ने WHO को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि कोरोना के प्रकोप में अपना कर्तव्य निभाने में वह पूरी तरह नाकाम हुआ रहा।

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चीन के स्नातक स्तर के छात्रों को निकाल सकता है अमेरिका-
अमेरिका और चीन के संबंधों में तनाव का असर अमेरिकी विश्वविद्यालयों से स्नातक कर रहे उन हजारों चीनी छात्रों पर पड़ सकता है जिन्हें ट्रंप प्रशासन जल्द ही बाहर का रास्ता दिखा सकता है।

वीजा रद्द करने के प्रस्ताव का अमेरिकी विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक संगठनों ने विरोध किया है। इस बारे में अधिकारियों का कहना है कि कोई भी पाबंदी इस तरह से लगाई जाएगी जिससे कि केवल वे छात्र प्रभावित हों जो जासूसी या बौद्धिक संपदा की चोरी जैसा खतरा पैदा कर सकते हैं। उन्होंने यह नहीं बताया कि कितने छात्रों को निकाला जाएगा। 

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हालांकि यह कहा कि यह देश में मौजूद चीनी छात्रों का एक छोटा सा हिस्सा होगा। इस प्रस्ताव से शैक्षणिक समुदाय चिंतित है। अमेरिकी शिक्षा परिषद में सरकारी संबंध मामलों की निदेशक सारा स्प्रिटजर ने कहा, ‘‘इसे कितने व्यापक पैमाने पर लागू किया जाएगा, यह सोचकर हम चिंतित हैं। इससे यह संदेश जाएगा कि हम दुनियाभर के प्रतिभाशाली छात्रों और विद्वानों का अब स्वागत नहीं करते हैं।’’ 

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