संजीवनी टुडे

युद्ध के हालात से 20 लाख लोग हुए बेघर, गंदगी में भंयकर जिन्दगी जीने को मजबूर

संजीवनी टुडे 22-01-2018 16:28:07

Two million homeless people living in dirt forced to live life due to war situation

डेस्क। किसी भी राष्ट्र के लिए जंग से कितनी भंयनाक परिस्थिति बन सकती है इसका आप अनुमान यमन के लोगों की दशा देख कर लगा सकते हो। यमन में  पिछले कई सालों के चल रही जंग ने लोगों की जिंदगी तबाह कर दी है और लोगों की भुखमरी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। वहीं, यहां ऐसे भी कई लोग हैं जो कचरे से बीनकर खाना खाने को मजबूर हैं। 

20 लाख लोगों ने गवाएं अपने आसियाने
-यूनाइटेड नेशन के आंकड़ों के मुताबिक, यहां युद्ध के चलते 20 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। वहीं जंग के चलते 10 हजार से ज्यादा लोगों को जान गंवानी पड़ी है। इसके चलते इकोनॉमी धराशाई हो गई है। इसके चलते फैली अव्यवस्था और बीमारियों ने भी हजारों लोगों की जान ले ली है और देश में अकाल के हालात पैदा कर दिए।

ये भी पढ़े: स्कूल में छात्रा का किया गया यौन उत्पीड़न, फिर...

इसके बाद उन्हें और उनकी फैमिली को हाउती विद्रोहियों के कंट्रोल वाले इलाके में मौजूद एक कचरे के मैदान में अपना ठिकाना तलाशना पड़ा, जहां काफी संख्या में विस्थापित हुए लोग रह रहे हैं। सेहत का फिक्र न करते हुए ये कचरे का मैदान सैकड़ों लोगों के लिए खाने और जीने का जरिए बना हुआ है। इसके साथ ही ये कुछ युवाओं को इनकम का मौका भी दे रहा। 

नॉर्थ-वेस्ट यमन के रहने वाले रुजैक और उनके परिवार को जंग के दौरान सऊदी के हवाई हमलों के चलते अपना शहर और घर छोड़ना पड़ा था। उन्होंने अपने परिवार और सामान के साथ रेड सी के होदेइदाह पोर्ट पर अपने एक रिश्तेदार के यहां शरण ली थी, लेकिन पैसे न होने के चलते उन्हें ये जगह छोड़नी पड़ी। 

कचरे के सहारे जीवन का बसेरा
कचरे के मैदान से प्लास्टिक की बॉटल खरीदने वाले मर्चेंट ने बताया कि वो कभी ऐसी 1 किलो बॉटल्स के लिए 7 रुपए तक देते थे, पर अब सिर्फ 10 रियाल (0.019 पैसे) ही देते हैं।

ये भी पढ़े: Video: इस एक्टर के अन्नपूर्णा स्टूडियो में लगी आग, दो तेलुगू फिल्मों के सेट हुए खाक

MUST WATCH

ऐसा ही एक परिवार रुजैक का है। 18 सदस्यों वाली इनकी फैमिली को कचरे के मैदान में शरण लेनी पड़ी है और लोगों का गुजारा कचरे में फेंके जाने वाले खाने-पीने के सामान से हो रहा है। बता दें यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध ने 18 लाख से ज्यादा लोगों को कुपोषण का शिकार बना दिया।

11 साल के अयूब मोहम्मद रुजैक ने बताया, ''हम कचरे में फेंका हुआ खाना-पीना खाते हैं। इसमें से हम फिश, मीट, आलू, प्याज और अनाज इकट्ठा कर अपना खाना बनाते हैं।'' यहां रहने वाली फातिमा ने बताया कि हम बहुत खराब हालात में रह रहे हैं और युद्ध ने हमारी स्थिति को बहुत खराब बना दिया है। हम चाहते हैं कि बस अब युद्ध खत्म हो जाए

More From world

loading...
Trending Now
Recommended