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Research/ दो एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं में दिखी कोरोना की रोकथाम की संभावना, ये वायरस को बढ़ाने वाले एंजाइम को करती हैं काबू

संजीवनी टुडे 29-05-2020 10:37:33

यह दावा स्पेन की रोविरा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है।


डेस्क। कोरोना वायरस का संक्रमण आए दिन बढ़ता ही जा रहा है।  दुनियाभर के 200 से ज्यादा देशों में कोरोना अपना पांव पसार चुका है। इसके लक्षणों से लेकर इसकी दवा और वैक्सीन के लिए विभिन्न देशों में वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। हर दिन इस वायरस को लेकर नए-नए शोध सामने आ रहे हैं। कई शोध के परिणाम चौंकाने वाले होते हैं। इसी कड़ी में शोधकर्ताओं को दो एंटी-इंफ्लेमेटोरी दवाओं में इस खतरनाक वायरस की रोकथाम करने की संभावना दिखी है। 

Corona Virus research

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मोलेक्यूलर साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, कंप्यूटर तकनीक के जरिये मानव और पशु चिकित्सा के लिए विविध ड्रग एजेंसियां द्वारा स्वीकृत 6,466 दवाओं का विश्लेषण किया गया। स्पेन की यूनिवर्सिटी रोविरा के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में इस बात पर गौर किया कि क्या इन दवाओं के उपयोग से वायरस एंजाइम (एम-प्रो) के मुख्य प्रोटीज को रोका जा सकता है। एम-प्रो नामक एंजाइम कोरोना वायरस की प्रतिकृति में अनिवार्य भूमिका निभाता है।

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उन्होंने पाया कि ये दवाएं एक ऐसे एंजाइम को रोक सकती हैं, जो कोरोना वायरस की प्रतिकृति में अहम भूमिका निभाता है। इन दवाओं में एक इंसानों और दूसरी पशुओं के उपचार में काम आती है। इस विशेष रिसर्च प्रोग्राम को कोविड मूनशॉट नाम दिया गया है। 

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यह दावा स्पेन की रोविरा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये दोनों कोरोना के उस एंजाइम पर लगाम लगाएंगी जिसकी वजह से वायरस अपनी संख्या को बढ़ाकर मरीज को वेंटिलेटर तक पहुंचा देता है।

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ऐसे काम करती है दवा
कोरोना में एम-प्रो नाम का एक एंजाइम पाया जाता है। यह एंजाइम ऐसे प्रोटीन को बनाता है जिसकी इसकी मदद से वायरस शरीर में पहुंचकर अपनी संख्या को बढ़ाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, दोनों दवाएं इसी एंजाइम को रोकने का काम करती हैं। रिसर्च में इसकी पुष्टि भी हुई है। 

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11 फीसदी से अधिक असर हुआ
शोधकर्ताओं की मेहनत से रिसर्च प्रोग्राम कोविड मूनशॉट के दौरान यह सामने आया कि कोरोना के मरीजों को 50 माइक्रोमोलर कारप्रोफेन देने पर एम-प्रो एंजाइम में 11.90 फीसदी और सेलेकॉग्सिब देने पर 4 फीसदी की कमी आती है। 

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कई देशों में चल रही रिसर्च
कुछ देशों में ऐसे ट्रायल चल रहे हैं जिनका लक्ष्य इसी एम-प्रो एंजाइम पर रोक लगाना है। इसके लिए एंटी-रेट्रोवायरल ड्रग लेपिनोविर और रिटोनाविर का प्रयोग किया जा रहा है। इन दवाओं को एचआईवी के इलाज के लिए बनाया गया था। इन ट्रायल में विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मदद कर रहा है।

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शोधकर्ताओं ने बताया कि कोविड-19 के खिलाफ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के समन्वय से किए जा रहे कुछ परीक्षणों में भी इसी एंजाइम को साधा जा रहा है। इन परीक्षणों में लोपिनवीर और रिटोनवीर जैसी दवाओं का उपयोग किया जा रहा है। ये दवाएं एचआइवी के उपचार के लिए तैयार की गई थीं। 

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