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आज है विश्व साइकिल दिवस, जानें इसका इतिहास, ये हैं साइकिल चलाने के कमाल के फायदे

संजीवनी टुडे 03-06-2020 11:08:09

आज यानी 3 जून को वर्ल्ड साइकिल डे है। बचपन में तो हम सभी ने साइकिल चलाई है।इस दिन लोगों में साइकिल चलाने के फायदे यानि पर्यावरण सेहत और किफायती दामों वाले ट्रांसपोर्टनेशन के फायदों के बारे में जागरूक किया जाता है।


डेस्क। आज यानी 3 जून को वर्ल्ड साइकिल डे है। बचपन में तो हम सभी ने साइकिल चलाई है। एक जमाना था जब भारत ही नहीं दुनिया भर में साइकिल का बोलबाला था, धीरे-धीरे इनकी जगह स्कूटर-मोटरसाइकिल और अब कारों ने ले ली, इस दिन लोगों में साइकिल चलाने के फायदे यानि पर्यावरण, सेहत और किफायती दामों वाले ट्रांसपोर्टनेशन के फायदों के बारे में जागरूक किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा पहला आधिकारिक विश्व साइकिल दिवस 3 जून, 2018 को मनाया गया था. यह दिवस परिवहन के एक सरल, किफायती, भरोसेमंद और पर्यावरण की सुरक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है। 

World Cycle Day

इतिहास

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 जून को विश्व साइकिल दिवस के रूप में घोषित किया,  यूरोपीय देशों में साइकिल के प्रयोग का विचार लोगों के दिमाग में 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ही आ चुका था, लेकिन इसे मूर्तरूप सर्वप्रथम सन् 1816 में पेरिस के एक कारीगर ने दिया।  उस यंत्र को हॉबी हॉर्स, अर्थात काठ का घोड़ा, कहते थे। पैर से घुमाए जानेवाले क्रैंकों (पैडल) युक्त पहिए का आविष्कार सन् 1865 ई. में पैरिस निवासी लालेमें ने किया। इस यंत्र को वेलॉसिपीड कहते थे।

इसपर चढ़नेवाले को बेहद थकावट हो जाती थी। अत: इसे हाड़तोड भी कहने लगे। इसकी सवारी, लोकप्रिय हो जाने के कारण, इसकी बढ़ती माँग को देखकर इंग्लैंड, फ्रांस और अमेरिका के यंत्रनिर्माताओं ने इसमें अनेक महत्वपूर्ण सुधार कर सन् 1872 में एक सुंदर रूप दे दिया, जिसमें लोहे की पतली पट्टी के तानयुक्त पहिए लगाए गए थे। इसमें आगे का पहिया 30 इंच से लेकर 64 इंच व्यास तक और पीछे का पहिया लगभग 12 इंच व्यास का होता था। इसमें क्रैंकों के अतिरिक्त गोली के वेयरिंग और ब्रेक भी लगाए गए थे। 

World Cycle Day

भारत में साइकिल का इतिहास

भारत में भी साइकिल के पहियों ने आर्थिक तरक्की में अहम भूमिका निभाई। 1947 में आजादी के बाद अगले कई दशक तक देश में साइकिल यातायात व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा रही। खासतौर पर 1960 से लेकर 1990 तक भारत में ज्यादातर परिवारों के पास साइकिल थी। 

यह व्यक्तिगत यातायात का सबसे ताकतवर और किफायती साधन था। गांवों में किसान साप्ताहिक मंडियों तक सब्जी और दूसरी फसलों को साइकिल से ही ले जाते थे। दूध की सप्लाई गांवों से पास से कस्बाई बाजारों तक साइकिल के जरिये ही होती थी। डाक विभाग का तो पूरा तंत्र ही साइकिल से चलता था। आज भी पोस्टमैन साइकिल से चिट्ठियां बांटते हैं।

World Cycle Dayसाइकिल चलाने के फायदे

-साइकिल चलाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। एक शोध के अनुसार जो व्यक्ति प्रतिदिन आधा घंटा साइकिल चलाता है उसे कोई और एक्सरसाइज करने की आवश्यकता ही नहीं है। साइकिल चलाने से शरीर के सभी अंग एक्टिव हो जाते हैं। 
रोजाना सुबह के वक्त साइकिल चलाने से आपकी फिटनेस बरकरार रहती है। 

-आप ये जानकार थोड़ा हैरानी होगी कि साइकिल चलाने से इम्यून सिस्टम ठीक तरीके से काम करता है। एक रिपोर्ट के अनुसार प्रतिदिन आधा घंटा साइकिल चलाने से इम्यून सेल्स एक्टिव हो जाते हैं और बीमार होने का खतरा कम हो जाता है। 

World Cycle Day

-लगातार साइकिल चलाना घुटने और जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों को आराम पहुंचाता है। 

-एक रिसर्च के अनुसार जो इंसान रोजाना 30 मिनट साइकिल चलाता है उसका दिमाग साधारण इंसान के मुकाबले ज्यादा एक्टिव रहता है और ब्रेन पाॅवर बढने के चांसेज भी 15 से 20 प्रतिशत तक बढते है। 

-साइकिल सबसे सस्ता साधन है।  जहां आपको दूसरी गाड़ियों में तेल के लिए पैसे खर्च करेने होंगे।  वहीं आपको साइकिल में ऐसा कुछ करने की आवश्यकता ही नहीं है। स्वास्थ्य के साथ-साथ साइकिल आपके पैसे बचाने का काम भी करती है। 

World Cycle Day

-साइकिल चलाने से सेहत के साथ जेब और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। क्योंकि साइकिल, बाइक और कार की तुलना में सस्ती होती है और पेट्रोल, डीजल से होने वाले एयर पॉल्यूशन का भी खतरा नहीं रहता है।

-इसलिए, विश्व साइकिल दिवस प्रोत्साहित करता है कि साइकिल चलाना एक महान व्यायाम है, पर्यावरण के अनुकूल है और फिटनेस स्तर और कल्याण को बढ़ावा देता है। 

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