संजीवनी टुडे

अयोध्या मामले में पाकिस्तानी ने की टिप्पणी, भारत ने दिया दो टूक जवाब

संजीवनी टुडे 10-11-2019 08:54:17

मंत्रालय ने कहा है कि सिविल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पाकिस्तान द्वारा की गई अनुचित और गंभीर टिप्पणियों को हम अस्वीकार करते हैं। क्योंकि यह जो भारत के लिए पूरी तरह से आंतरिक है।


नई दिल्ली। अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने अपना फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट कह दिया कि अयोध्या की विवादित ढांचे वाली जमीन पर मंदिर बनेगा। वहीं इसके बादले मस्जिद के लिए मुस्लिमों को सरकार पांच एकड़ जमीन उपयुक्त स्थान पर देगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पाकिस्तान की टिप्पणी को लेकर विदेश मंत्रालय से बयान आया है। मंत्रालय ने कहा है कि सिविल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पाकिस्तान द्वारा की गई अनुचित और गंभीर टिप्पणियों को हम अस्वीकार करते हैं। क्योंकि यह जो भारत के लिए पूरी तरह से आंतरिक है। यह सभी धर्मों, अवधारणाओं के लिए कानून और समान सम्मान के शासन से संबंधित है जो उनके लोकाचार का हिस्सा नहीं हैं। इसलिए इसपर पाकिस्तान की समझ की कमी आश्चर्यजनक नहीं है, नफरत फैलाने के स्पष्ट इरादे के साथ हमारे आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने के लिए उनकी पैथोलॉजिकल मजबूरी निंदनीय है।

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बता दें कि पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने फैसले के समय पर सवाल उठाया है। कुरैशी ने करतारपुर गलियारा खोले जाने के दिन अयोध्या मामले में आए फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या इसको थोड़े दिन टाला नहीं जा सकता था? यह खुशी के मौके पर दिखाए गई असंवेदनशीलता है। उन्होने फैसले आने के वक्त को सही नहीं बताया। उन्होंने कहा कि आपको (PM मोदी) करतारपुर कॉरिडोर से ध्यान भटकाने की बजाय इस खुशी के मौके का हिस्सा बनना चाहिए था। यह विवाद संवेदनशील था और उसे इस शुभ दिन का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए था। मुस्लिम भारत में पहले ही काफी दबाव में है और भारतीय कोर्ट का यह फैसला उन पर और दबाव बढ़ाएगा। पाकिस्तान फैसले को विस्तार से पढ़ने के बाद इस पर अपनी प्रतिक्रिया देगा।

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पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता आसिफ गफूर ने ट्वीट कर कहा कि 5 अगस्त को कश्मीर से विशेष दर्जा छीनने के बाद अब अयोध्या मामले के फैसले से सच सबके सामने आ गया है। सूचना और प्रसारण मामलों में प्रधानमंत्री की विशेष सहायक फिरदौस एवान ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक ओर जहां करतारपुर गलियारा खोल पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के अधिकार सुनिश्चित कर रहा है। वहीं दूसरी ओर भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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