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चीन की नापाक हरकत पर भारत ने भी दिखाए तेवर, पूर्वी लद्दाख में बढ़ाई भारतीय सैनिकों की तादाद

संजीवनी टुडे 30-05-2020 12:50:32

भारत का यह स्टैंड भी बिल्कुल स्पष्ट है कि भारतीय सैनिक अपनी तरफ से कोई ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे तनाव बढ़े।


नई दिल्ली। लद्दाख में चीन की ओर से भारतीय सीमा में भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती के बाद भारत ने भी करारा जवाब दिया है। भारतीय सेना ने लद्दाख में चीन सीमा पर अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। चीनी सैनिकों की घुसपैठ रोकने के लिए भारत ने लद्दाख के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी गश्त और निगरानी कड़ी कर दी है। 

सूत्रों के मुताबिक, एलएसी पर हालात को लेकर उच्चस्तरीय चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है। अतिरिक्त सैनिकों को मौके पर भेजने का काम शुरू भी हो गया है। सूत्रों ने बताया कि लगातार तीन-चार दिनों से हालात की उच्च स्तर पर समीक्षा की जा रही है। समीक्षा के दौरान चीन के प्रेसर टैक्टिक्स पर भी गहन चर्चा हुई जिसके बाद तय किया गया कि भारत भी अपने इलाके में सैनिकों की संख्या बढ़ाएगा ताकि चीन की तरफ से संभावित हरकतों का माकूल जवाब दिया जा सके। 

PM Modi China border

हालांकि भारत का यह स्टैंड भी बिल्कुल स्पष्ट है कि भारतीय सैनिक अपनी तरफ से कोई ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे तनाव बढ़े। इतना जरूर है कि भारत किसी भी प्रकार के दबाव में आकर अपने इलाके पर अपना दावा नहीं छोड़ेगा।

एलएसी के पास भारत की अवसंरचनात्मक गतिविधियां-
चीन की इस बौखलाहट का तात्कालिक कारण तो डोकलाम संकट के बाद भारत द्वारा एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) के पास किए जा रहे अवसंरचनात्मक विकास की गतिविधियां हैं जिस पर चीन को आपत्ति है। गौरतलब है कि लद्दाख में एलएसी के नजदीक भारत द्वारा निर्मित किए जा रहे पुल पर चीन को आपत्ति है। गलवान घाटी जहां चीन ने बंकर बनाने पर जोर दिया है, वहीं एलएसी स्थित है और इसके पास भारत ने शियोक नदी से दौलत बेग ओल्डी तक 235 किमी लंबे अति सामरिक महत्व के सड़क का निर्माण कार्य लगभग पूरा कर लिया है।

PM Modi China border

चीन ने तैनात किए 2500 सैनिक
सूत्रों ने कहा कि भारत संवेदनशील क्षेत्रों में लंबी तैयारी के लिए तैयार है और वह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति बनाए रखने पर जोर देगा। ऐसा कहा जा रहा है कि चीनी सेना ने पैंगोंग त्सो क्षेत्र और गलवान घाटी में लगभग 2,500 सैनिक तैनात कर दिए हैं तथा वह धीरे-धीरे अस्थायी निर्माण और अस्त्र प्रणाली को मजबूत कर रहा है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि उपग्रह से ली गई तस्वीरों से पता चलता है कि चीन ने एलएसी पर अपनी तरफ रक्षा ढांचे को महत्वपूर्ण ढंग से मजबूत किया है और पैंगोंग त्सो क्षेत्र से लगभग 180 किलोमीटर दूर एक सैन्य हवाईअड्डे पर निर्माण गतिविधियों को अंजाम दे रहा है।

PM Modi China border

भारत ने भी भेजी तोपें
एक अधिकारी ने कहा कि जब चीन ने अपने सैनिकों की संख्या बढ़ानी शुरू की उसके बाद हमारी तरफ से भी यही कोशिश की गई कि उनके बराबर तैनाती की जाए। तब रिजर्व फोर्स को आगे भेजने का काम शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि फिर हालात को देखते हुए यह तय किया गया कि वहां सैनिकों की संख्या में और इजाफा किया जाना चाहिए। सूत्रों ने कहा कि भारत भी अतिरिक्त सैनिक और तोपें भेजकर अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है।

हालात में सुधार नहीं
सूत्रों के मुताबिक, बुधवार से शुक्रवार तक दिल्ली में हुई आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में भी इस मसले को लेकर चर्चा की गई। एक अधिकारी ने कहा कि एलएसी में अभी हालात पहले की तरह ही बने हुए हैं। तनाव बढ़ने वाली कोई नई घटना नहीं हुई है लेकिन चीन के सैनिक अभी पीछे भी नहीं हट रहे हैं।

PM Modi China border

समाधान होने तक डटे रहेंगे सैनिक
डिप्लोमेटिक लेवल पर बातचीत जारी है लेकिन जब तक कोई हल नहीं निकलता है तब तक भारतीय सैनिक भी वहां डटे रहेंगे। पूर्वी लद्दाख के कम-से-कम चार इलाकों में दोनों देशों के सैनिक 5 मई से ही एक-दूसरे की आंखों में आंखें डाले खड़ी हैं। इनमें गलवान वैली और पैंगोग लेक के आगे फिंगर एरिया में फिंगर-4 के पास का इलाका भी शामिल है।

उल्लेखनीय है कि दौलत बेग ओल्डी देपसांग पठार के अक्साई चिन के इलाके के पास है। भारत ने यहां निर्मित एयरबेस पर मालवाहक सी 130 और सी 17 जहाजों को पहले ही लैंड करा रखा है। विवादित इलाकों पर अपने अधिकार क्षेत्र के खोने का डर चीन को सता रहा है। सीमा सड़क के इस निर्माण कार्य को भारत सरकार और खासकर रक्षा मंत्रालय ने जिस संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता के तौर पर लिया है, उससे चीन कहीं ना कहीं हताश अवश्य हुआ है। 

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भारत द्वारा सामरिक स्थलों पर पुलों, हवाई पट्टियों के निर्माण कार्य में सक्रियता दिखाना और भारत चीन सीमा पर निगरानी चौकसी के लिए गश्त बढ़ाने की रणनीति ने चीन को एकतरफा आक्रोश में आने को विवश किया है। चीन यह मानता है कि इससे इस क्षेत्र में भारत द्वारा यथास्थिति को बदला जा रहा है, पर क्षेत्र में विवाद का कारण तो चीन की हिमालयन क्षेत्र के मानचित्र को बदल देने की जिद है।

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