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चीन: सोने से भी महंगी दवा बनती है गधे की खाल से, अफ्रीकी गधो पर मड़राया संकट

संजीवनी टुडे 17-06-2018 13:25:31


नई दिल्ली। गधे की खाल से बनने वाली दवा ई जियाओ की मांग पिछले आठ सालों में से दोगुनी हो गई है। नेशनल ई जियाओ एसोसिएशन के मुताबिक, 2015 में इस दवा का करीब 68 लाख किलोग्राम उत्पादन हुआ। कभी यह दवा अमीरों को ही मुहैया थी, क्योंकि एक गधे से करीब एक किलो ही ई जियाओ मिल पाती है। 

सोने से भी ज्यादा महंगी दवा

18-19 सौ सालों से चीन में गधों को ई जियाओ दवा तैयार की जा रही है। इस दवा कि कीमत  एक ग्राम के 3200 रुपये से ज्यादा मानी जा रही है। यह दवा महिलाओं की प्रजनन संबंधी तमाम समस्याओं में इस्तेमाल की जाती है। इसके आलावा डिमेंशिया, नपुंसकता और श्वसन संबंधी समस्याओं में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। 

चीन में जिलेटिन की मांग की वजह से अफ्रीकी देशों से काला बाजारी के जरिए गधों की खाल को चीन भेजा जा रहा है। इस वजह से अफ्रीका के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां काफी संख्या में लोग कृषि कार्यों और भारी सामानों की ढुलाई के लिए गधों पर निर्भर होते हैं।  

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