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कोरोनावायरस से द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कार्बन उत्सर्जन में सबसे बड़ी गिरावट

संजीवनी टुडे 03-04-2020 15:56:40

कोरोनोवायरस महामारी के प्रकोप से पूरी दुनिया में ठप पड़ी अर्थव्यवस्था के कारण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की मात्रा में सबसे बड़ी गिरावट आ सकती है।


वॉशिंगटन। कोरोनोवायरस महामारी के प्रकोप से पूरी दुनिया में ठप पड़ी अर्थव्यवस्था के कारण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की मात्रा में सबसे बड़ी गिरावट आ सकती है। वैश्विक कॉर्बन उत्सर्जन के आंकड़े देने वाले वैज्ञानिकों के एक नेटवर्क पर यह संकेत दिया है।

वार्षिक कॉर्बन उत्सर्जन अनुमानों को तैयार करने वाले ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट के अध्यक्ष रॉब जैक्सन ने कहा कि इस साल कार्बन उत्सर्जन 5 प्रतिशत वार्षिक से अधिक गिर सकता है।  2008 के वित्तीय संकट में 1.4 प्रतिशत की गिरावट के बाद वैश्विक कार्बन उत्सर्जन की मात्रा में यह सबसे बड़ी गिरावट है।

कैलिफोर्निया में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थ सिस्टम साइंस के प्रोफेसर जैक्सन ने एक ईमेल में कहा, " इस साल कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 5 प्रतिशत या उससे अधिक गिरावट दिखने की संभावना है। द्वितीय विश्व युद्ध के अंत से एक साल में इतनी गिरावट नहीं दिखाई दी थी। न तो सोवियत संघ के पतन और न ही पिछले 50 वर्षों के विभिन्न तेल या ऋण संकटों ने कॉर्बन उत्सर्जन को उस तरह से प्रभावित किया जैसा इस संकट ने किया है।"

लेकिन कॉर्बन उत्सर्जन में यह गिरावट गलत कारणों से हैं। जो वैश्विक महामारी फैलने की स्थिति में स्वास्थ्य आपातकाल से बंधा हुआ है। कोरोनावायरस महामारी से 10 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। कारखानों को बंद कर दिया गया है, सभी एयरलाइंस जमीन पर हैं और करोड़ों लोगों को कोरोनावयरस का प्रसार धीमा करने के लिए घर पर रहने के लिए मजबूर किया गया है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि संरचनात्मक परिवर्तन के बगैर कोरोनावायरस के कारण कॉर्बन उत्सर्जन में होने वाली कमी अस्थायी हो सकती है। दशकों से वातावरण में जमा कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता पर इसका बहुत कम असर पड़ सकता है।

पूर्वी इंग्लैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया के एक जलवायु वैज्ञानिक कॉर्नी ले कुएरे ने कहा, "यह गिरावट संरचनात्मक बदलावों के कारण नहीं है। जैसे ही लॉकडाउन खत्म होगा, मुझे उम्मीद है कि कॉर्बन उत्सर्जन वापस उसी जगह पर पहुंच जाएगा।"

जैक्सन के अनुसार विश्व ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 2007-2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद कम हुआ था लेकिन उसके बाद कॉर्बन उत्सर्जन में 5.1% की वृद्धि दर्ज की गई। चीन में कॉर्बन उत्सर्जन का तेजी से बढ़ना पहले से ही शुरू हो गया है, जहां उत्सर्जन में अनुमानित 25% की गिरावट आई थी। क्योंकि चीन ने कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिये कारखानों को बंद कर दिया था। लेकिन चीन में सामान्य कामकाज शुरू होने के बाद से कॉर्बन उत्सर्जन फिर तेजी से बढ़ने लगा है।

नवंबर में प्रकाशित एक यू.एन. रिपोर्ट में कहा गया था कि विश्व के वर्तमान तापमान में 1.5 सेल्सियस की कटौती के महत्वाकांक्षी पेरिस लक्ष्य को हासिल करने के लिये कॉर्बन उत्सर्जन में प्रति वर्ष औसतन 7.6 प्रतिशत की गिरावट करनी होगी।

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