संजीवनी टुडे

भारत में चीनी उत्पादों का पूर्ण बहिष्कार, किस हद तक रंग लायेगा ये माहौल?

संजीवनी टुडे 01-07-2020 11:40:24

देश में हो रहे चीनी उत्पादों के विरोध का असर भारत कि बन्दरगाहों पर दिखने लगा है, चीन से आये सामानों को बंदरगाहों पर 22 जून से रोक दिया गया है।


जयपुर। समूचे भारत में चीन को आर्थिक आधार पर कमजोर और नीचा दिखाने का विरोध लगभग हर साल दिवाली पर सभी भारतवासियों द्वारा अपने सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों के द्वारा किया जाता रहा है , लेकिन इस बार 15 जून को भारतीय और चीनी सैनिकों के साथ हुए झड़प में शहीद हुए सैनिकों के कारण लोगों में चीन के प्रति आक्रोश और गुस्सा है। इसीलिए लोग चीन का विरोध काफी उच्चे स्तर पर कर रहे हैं। इस बार चीनी वस्तुओं के बहिष्कार की मांग गांव, शहर, गली, चौराहे, नुकड़ सभी जगह पर भारी मात्रा में देखने को मिल रही है।

boycott Chinese Products

वहीं, भारत सरकार भी चीन के प्रति नरमी दिखाने के पक्ष में नहीं है। इसीलिए भारत सरकार ने चीन के साथ-साथ उसके सहयोगी देश दक्षिण कोरिया और वियतनाम से आयत होने वाले फ्लैट रोल्ड स्टील उत्पादों, एल्युमीनियम या जिंक कोटेड समानों पर पांच साल तक एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने का निर्णय लिया है और इसके अलावां चीन से आने वाले सोलर पैनल, सोलर इन्वेर्टर या सोलर के सामानों पर 20 प्रतिशत कि बेसिक कस्टम ड्यूटी लगाने का निर्णय ले चुकी है, जिससे चीन से सोलर उत्पादों का आयत कम मात्रा में किया जा सके। 

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भारत ने वित् वर्ष 2019-20 के सिर्फ नौ महीनो में ही सोलर उपकरणों का कुल 1.5 अरब डॉलर का आयत किया जिसमें से 1.2 अरब डॉलर सिर्फ चीन से किया गया। देश में हो रहे चीनी उत्पादों के विरोध का असर भारत कि बन्दरगाहों पर दिखने लगा है, चीन से आये सामानों को बंदरगाहों पर 22 जून से रोक दिया गया है। वही एसोसिएशन ऑफ़ इंडियन मैन्युफैक्चरर ऑफ़ मेडिकल डीवाइस इंडस्ट्री (AIMED) ने सभी सामानों कि 100 प्रतिशत जाँच के बाद ही सामान स्वीकार करने का निर्णय लिया है।

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दूरसंचार मंत्रालय 17 जून को ही चीन निर्मित सामानों को कम उपयोग करने या ना उपयोग करने का निर्देश बीएसएनएल को दे चूका है। इधर रेलवे मंत्रालय ने भी 18 जून को कानपूर से दीनदयाल उपाध्याय तक 417 किलोमीटर में होने वाले रेल सिग्नलिंग के 471 करोड़ रुपये के करार को चीन से यह कहते हुए रद कर दिया कि चीनी कंपनी तेज़ गति से कार्य नहीं कर रही। उधर हरियाणा सरकार ने भी हिसार तथा यमुना नगर में थर्मल प्लांट से जुड़े 842 करोड़ के चीनी करार को रद करने का फैसला लिया और नए टेंडर के लिए आदेश भी जारी कर दिया।

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व्यापारियों के एक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने बड़े-बड़े उद्योगपतियों, बॉलीवुड के अभिनेताओं, राजनेताओं, खिलाडियों और बड़ी-बड़ी हस्तियों को चीनी सामान बहिष्कार में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने के लिए पत्र लिखा।

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देखना यह दिलचस्प होगा कि चीन के व्यापार के खिलाफ भारत में बना बहिष्कार का माहौल किस हद तक रंग लाता है। क्या भारत के लोग कम रुपये पर मिल रही चीनी सामानों को छोड़, प्रधानमंत्री द्वारा किये गए आह्वाहन वोकल फॉर लोकल को चरितार्थ कर पाएंगे? क्योंकि चीन पूरे विश्व में कम लागत पर सामान बना कर बेचने के लिए जाना जाता है, इसी वजह से चीन ने जिस देश में भी अपना कारोबार शुरू किया वहाँ की स्थानीय कम्पनियाँ चीन के सस्ते उत्पादों का मुकाबला नहीं कर पाई, वहीं, अगर हम चीन से निर्भरता खत्म कर खुद के सस्ते उत्पाद बनाते हैं तो इसमें लम्बा वक़्त अवश्य लगेगा लेकिन यही सच्चे आत्मनिर्भर अभियान की असल शुरुआत होगी।

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बृजेन्द्र राय, उत्तर प्रदेश

(ये लेखक के निजी विचार है)

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