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चीन के जाल में फंसा एक और देश, चलाया जा रहा भारत के ख़िलाफ़ 'इंडिया आउट' कैंपेन

संजीवनी टुडे 17-09-2020 15:25:24

कर्जजाल में फंसाकर मनचाहा हड़पने की चीनी नीति एक और देश में सफल होती दिख रही है।


नई दिल्ली। इन दिनों चीन अपने पड़ोसियों के लिए खासी आक्रामकता दिखा रहा है, पिछले कुछ महीनों से चीन का सीमाई विवाद अपने हर पड़ोसी के साथ तेज हुआ है फिर चाहे वे रूस, जापान, भारत हों या फिर चीन से दूर-दराज बसे देश वियतनाम, इंडोनेशिया, ब्रुनेई या फिर फिलीपींस हो या फिर मालदीव। भारत के पड़ोसी देश मालदीव के सिर पर ड्रैगन ने इतना कर्ज का बोझ लाद दिया है कि अब उसे श्रीलंका की तरह बहुत कुछ खोने का डर सताने लगा है। 

कर्जजाल में फंसाकर मनचाहा हड़पने की चीनी नीति एक और देश में सफल होती दिख रही है। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था वाला देश किस तरह चीनी कर्ज में डूबा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मालदीव को 3.1 अरब डॉलर चीनी लोन चुकाना है, जबकि उसकी कुल अर्थव्यवस्था 4.9 अरब डॉलर की है।

Maldive

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2013 में मालदीव की सत्ता संभालने वाले अब्दुल्ला यामीन चीन के बेहद करीबी थे। मालदीव की अर्थव्यवस्था को किकस्टार्ट देने के लिए उन्होंने चीन से बड़े पैमाने पर कर्ज लिया। चीन से सांठगांठ में जुटे यामीन ने पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद सहित अधिकतर विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया। हालांकि, यामनी 2018 के चुनाव में हार गए और मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी ने जीत हासिल की। इब्राहिम सोलिह राष्ट्रपति बने। इसके बाद नाशीद दोबारा राजनीति में लौटे। सत्ता में आई सरकार ने जब हिसाब-किताब देखा तो हैरान रह गई। 

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक मालदीव की संसद के स्पीकर और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद ने कहा है कि इंडिया आउट कैंपेन आईएसआईएस सेल का है। नाशीद ने कहा कि इस कैंपेन के तहत मालदीव से भारतीय सैनिकों को हटाने की मांग की जा रही है। मालदीव में इंडिया आउट कैंपेन हाल के हफ़्तों में ज़ोर पकड़ा रहा है और इसे वहां की मुख्य विपक्षी पार्टी हवा दे रही है। मालदीव की मुख्य विपक्षी पार्टी का कहना है कि भारतीय सैनिकों की मौजूदगी संप्रभुता और स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ है।

Maldive

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और अब संसद के स्पीकर नाशीद के मुताबिक, देश पर चीन का 3.1 अरब डॉलर का कर्ज था। यह कर्ज सरकार, सरकारी कंपनियों के अलावा निजी कंपनियों को भी दिया गया, जिसकी गारंटी मालदीव सरकार ने ली थी। नाशीद अब चिंता जाहिर करते हैं कि उनका देश कर्ज जाल में फंस चुका है। उनका कहना है कि जो भी प्रोजेक्ट इन पैसों से शुरू किए गए वे इस लायक नहीं हैं कि कर्ज चुकाने लायक रेवेन्यू जेनरेट कर सकें। उनका तो यह भी कहना है कि कागज पर यह कर्ज असल में प्राप्त हुई राशि से अधिक है।

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