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लद्दाख में सैन्य बातचीत के बाद भारतीय सेना का बड़ा बयान, कहा- हम और चीनी आर्मी पूरी तरह हटने को प्रतिबद्ध

संजीवनी टुडे 16-07-2020 14:39:10

भारतीय सेना ने आगे कहा कि सैनिकों के बीच सिलसिलेवार बातचीत भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच 5 जुलाई को पूरी तरह सैनिकों के हटाने पर बनी सहमति के अनुरूप थी।


नई दिल्ली। भारत और चीन के सैन्य प्रतिनिधियों ने पूर्वी लद्दाख में अपनी सीमाओं से सैनिकों और साजो-सामान को पीछे हटाने और तनाव घटाने पर लगभग 14 घंटों तक बातचीत की। यह बातचीत मंगलवार को दिन में 11.30 बजे शुरू हुई थी और देर रात दो बजे यानी बुधवार को खत्म हुई। यह चौथी कोर कमांडर मीटिंग थी और अब तक की सबसे लंबी मीटिंग भी। इस बातचीत के बाद भारतीय सेना ने कहा कि भारत और चीन पूरी तरह सेना को हटाने के लेकर प्रतिबद्ध है। 

गुरुवार को एक बयान में सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने कहा, 'भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेख पर बनी स्थिति के समाधान के लिए बने सैन्य और कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से बातचीत कर रहे हैं।' सेना ने कहा, 'पीपुल्स लिबरेशन ऑफ आर्मी के कमांडर्स और भारतीय सेना के बीच चुशुल में भारत की सीमा में चौथे दौर की बैठक हुई।'

Indo-China border dispute

भारतीय सेना ने आगे कहा कि सैनिकों के बीच सिलसिलेवार बातचीत भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच 5 जुलाई को पूरी तरह सैनिकों के हटाने पर बनी सहमति के अनुरूप थी। सेना के मुताबिक सीनियर कमांडर्स पहले चरण में सेना हटाने को लेकर हुई प्रगति और पूरी तरह सैनिकों के हटाने को लेकर आगे के कदम को सुनिश्चित करने पर इस दौरान चर्चा हुई।

भारतीय सेना ने बयान में कहा, 'दोनों पक्ष पूरी तरह सैनिकों के हटाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। यह प्रक्रिया जटिल है और इसके निरंतर सत्यापन की आवश्यकता है। वे कूटनीतिक और सैनिक स्तर पर नियमित बैठकें कर इस ओर आगे बढ़ रहे हैं।'

Indo-China border dispute

माना जा रहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो एक और राउंड की कमांडर लेवल की मीटिंग हो सकती है या फिर बातचीत में जिन पॉइंट्स पर सहमति बनी उन पर धीरे-धीरे आगे बढ़ने के बारे में तय किया जा सकता है। 

बातचीत का अहम बिंदु पैंगोंग और डेपसांग एरिया रहा. पैंगोंग एरिया में चीनी सैनिक डिसइंगेजमेंट के पहले फेज में भले ही फिंगर-4 से फिंगर-5 की तरफ पीछे गए लेकिन रिजलाइन पर यानी पहाड़ी चोटी पर वह अब भी मौजूद हैं। जबकि भारत को भी फिंगर-4 से पीछे फिंगर-3 पर आना पड़ा। भारत की तरफ से साफ किया गया है कि चीनी सैनिकों को पुरानी स्थिति में लौटना होगा यानी उन्हें फिंगर-8 के पीछे जाना होगा। 

Indo-China border dispute

गौरतलब है कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच लद्दाख में एलएसी पर करीब दो महीने से टकराव के हालात बने हुए हैं। छह जून को हालांकि दोनों सेनाओं में पीछे हटने पर सहमति बन गई थी लेकिन चीन उसका क्रियान्वयन नहीं कर रहा है। इसके चलते 15 जून को दोनों सेनाओं के बीच खूनी झड़प भी हो चुकी है। इसके बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बात हुई है तथा 22 जून को सैन्य कमांडरों ने भी मैराथन बैठक की थी। 

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