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जनपद में जगह-जगह विभिन्न दलों व संगठनों ने किसान बिल का किया विरोध

संजीवनी टुडे 25-09-2020 22:12:41

जनपद में जगह-जगह विभिन्न दलों व संगठनों ने किसान बिल का किया विरोध


कानपुर। राज्यसभा में ध्वनि मत से पास हुए किसान बिल को लेकर किसान संगठन और विपक्षी पार्टियां लगातार विरोध कर रही हैं। इसी के चलते शुक्रवार को भारत बंद का एलान किया गया और जनपद में अलग-अलग जगहों पर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों ने किसान बिल का विरोध किया। इसके साथ ही मांग की गयी कि किसान बिल को वापस लिया जाये और बढ़ी बेरोजगारी पर रोजगार का सृजन किया जाये। 

समाजवादी पार्टी के तत्वाधान में नगर अध्यक्ष डॉ इमरान की अध्यक्षता में जिला अधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को किसानों की समस्याओं की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा गया। जानकारी देते हुए पूर्व सपा नगर कोषाध्यक्ष नंदलाल जायसवाल ने बताया कि केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार की नीतियों से किसान और श्रमिक के हितों को गहरा आघात लग रहा है। इन नीतियों से कॉर्पोरेट घरानों को ही फायदा होगा। डॉ इमरान ने कहा कि किसानों और श्रमिकों की बदहाली और बढ़ेगी कृषि और किसान के साथ श्रमिक ही कठिन समय में देश की अर्थव्यवस्था को संभालता है पर अब अन्नदाता को ही हर तरह से उत्पीड़न का शिकार बनाया जा रहा है। 

यदि समय रहते कृषि और श्रमिक कानूनों को वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश में खेती बर्बाद हो जाएगी और श्रमिक मजदूर बनकर रह जाएंगे। इस दौरान विधायक अमिताभ बाजपेई, नगर अध्यक्ष डॉ इमरान, फजल महमूद, ओम प्रकाश मिश्रा, नंदलाल जायसवाल, गोपाल अग्रवाल, अभिषेक गुप्ता मोनू पार्षद, आशू खान, वरुण मिश्रा, मिंटू यादव, अनवर मंसूरी, संजय सिंह पटेल, एडवोकेट वरुण मेहता, केके मिश्रा, हाजी इखलाख अहमद बब्लू आदि लोग मौजूद रहें।

किसान मजदूर विरोधी लाए गए अध्यादेश के खिलाफ दिया धरना
संयुक्त वामपंथी दल के तत्वाधान में प्रदीप यादव की अध्यक्षता में बड़ा चौराहा स्थित रामआसरे पार्क पर धरने का आयोजन किया गया। जिला अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया। आरोप लगाते हुए पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने कहा कि यह सरकार पूरी तरह से निरंकुश हो गई है। सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए लगातार किसान मजदूर छात्र नौजवानों महिलाओं पर कुठाराघात कर रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार किसान विरोधी है। सरकार किसानों का भाग्य उद्योगपतियों के हाथ में सौंपना चाहती है । इसी के चलते यह काला कानून लाया गया। 

उन्होंने कहा कम्युनिस्ट पार्टियां इस बिल का विरोध कर रही हैं। संसद से लेकर सड़क तक लड़ाई लड़ी जा रही है। अगर यह बिल वापस नहीं हुआ तो आगे भी आंदोलन चलेगा। अरविंद राज स्वरुप ने आरोप लगाते हुए कहा कि किसान विरोधी यह तीनों बिलों को केंद्र सरकार ने अपनी जबरजस्ती ध्वनि मत से प्रेरित करा लिया। विरोधी दलों की बात भी नहीं सुनी गई विरोध करने पर सांसदों को निलंबित कर दिया गया। सरकारी नौकरियां अब बची नहीं है बेरोजगारी की स्थिति भयावह है। जाति धर्म से ऊपर उठकर किसानों के अधिकारों के लिए सबको आवाज उठानी होगी। इस दौरान प्रदीप तिवारी, विनोद पांडे, प्रदीप यादव, सुभाषिनी अली, अरविंद राज, उमाकांत, ओमप्रकाश, गोविंद नारायण आदि लोग मौजूद रहें।

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