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श्रीराम जन्मभूमि : कारसेवकों के सैलाब से पट गई थी वीरांगना भूमि झांसी की सड़कें

संजीवनी टुडे 02-08-2020 17:50:00

करीब 500 वर्ष बाद 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के मंदिर का भूमि पूजन होने जा रहा है।


झांसी। करीब 500 वर्ष बाद 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के मंदिर का भूमि पूजन होने जा रहा है। इस दिन के लिए भारत समेत विश्व के करोड़ों हिन्दुओं को सदियों से इंतजार था। इसके लिए 30 वर्ष पूर्व विश्व हिन्दु परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा जगाई गई अलख आज अखण्ड ज्योति का रुप लेने जा रही है। रामभक्तों द्वारा कारसेवा के दौरान वीरांगना भूमि झांसी देशभर के कारसेवकों का केन्द्र बिन्दु रही। खासतौर पर दक्षिण भारत से आने वाले कारसेवकों का उत्तर प्रदेश का झांसी ही प्रवेश द्वार था। उस जन आंदोलन के दौरान वीरांगना भूमि झांसी की सड़कें कारसेवकों के सैलाब से पट गई थी। झांसी ने भी रामभक्तों के स्वागत में अपनी पलकें बिछाकर उनका हर तरह से सहयोग किया। ग्रामीण रामभक्त भी कारसेवकों की सेवा कर अपने को धन्य मान रहे थे। 

विश्व हिन्दु परिषद के आह्वान पर देशभर के हिन्दुओं में अयोध्या में कारसेवा में शामिल होने का जुनून सवार था। अक्टूबर 1990 के अन्तिम सप्ताह में वीरांगना भूमि झांसी का सौभाग्य था कि हजारों की संख्या में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए हुए कारसेवकों का स्वागत करने का मौका मिला। झांसी रेलवे स्टेशन देश के बीचोंबीच होने के चलते कारसेवक झांसी ही उतरते थे। उनकों झांसी से ही अयोध्या के लिए टेªन बदलनी होती थी। तत्कालीन प्रशासन के लिए भी यह बड़ी चुनौती थी कि वे देशभर से आने वाले कारसेवकों को झांसी में ही रोंके। ये निर्देश उन्हें तत्कालीन सपा सरकार द्वारा दिए गए थे। इनका उन्हें सख्ती से पालन कराने को कहा गया था। ताकि कारसेवक झांसी से अयोध्या की ओर कूच ही न कर सकें। यह सिलसिला जब शुरु हुआ तो थमने का नाम ही नहीं ले रहा था। नगर की सड़कों पर चहुंओर कारसेवकों का सैलाव उमड़ रहा था। 

चारों ओर जय श्रीराम-जय श्रीराम,रामलला हम आएंगे-मंदिर वहीं बनाएंगे,जैसे नारों से नगर गुंजायमान हो रहा था। प्रशासन ने कारसेवकों को रोकने के लिए नगर के बीचोंबीच खण्डेराव गेट स्थित लक्ष्मी व्यायाम मंदिर व बुन्देलखण्ड डिग्री काॅलेज को अस्थाई जेल बनाते हुए कारसेवकों को उसमें बंद कर दिया था। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में एकत्र अनुशाशित कारसेवकों को रोकना भी प्रशासन के लिए चुनौती बन गया। जब प्रशासन उनकी खानपान की व्यवस्था जुटाने में असमर्थ दिखने लगा तो झांसी की जनता ने कारसेवकों को पलकों पर बिठाते हुए उनके स्वागत में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। पानी से लेकर भोजन तक की चैराहों-चैराहों व गलियों में निःशुल्क व्यवस्था करते हुए भोजन वितरण किया जाने लगा। इससे जहां प्रशासन ने राहत की सांस ली,वहीं कारसेवकों का उत्साह भी आसमान छूने लगा। 

उधर 28 अक्टूबर 1990 को पूरी झांसी नगरी को खुली जेल घोषित कर दिया गया था। यहां तक कि प्रशासन द्वारा बनाई गई अस्थाई जेल के दरवाजे खोल दिए गए और सीमाएं सील कर दी गई थी। कारसेवक भी यह जानते थे कि उन्हें झांसी पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसलिए वे झांसी पहुंचने से पहले ही चेन खींचकर उतर जाते थे और इस तरह पूरे नगर में कारसेवक फैल गए। उनके स्वागत में लोग सड़कों पर उनके जरुरत की वस्तुंए वितरित करते दिखाई देते थे। सड़कों पर चारों ओर कारसेवकों का सैलाब उमड़ा हुआ था। ऐसे लगता था जैसे व्यवस्था किसी के हाथ में नहीं थी। बल्कि जनता और कारसेवक स्वयं व्यस्था को संभाल रहे थे। 

कारसेवकों को अयोध्या पहुंचाने के लिए ग्रामीण बता रहे थे खेतों से रास्ता 
भाजपा के तत्कालीन नगर अध्यक्ष व नगर पालिका झांसी के पूर्व अध्यक्ष डा.धन्नूलाल गौतम(उपाध्यक्ष संगीत नाट्य अकादमी लखनऊ) ने अपना संस्मरण बताते हुए कहा कि उस समय झांसी में चारों ओर लाखों कारसेवक ही नजर आते थे। पूरे देश का केन्द्र झांसी बना हुआ था। झांसी नगर के अलावा आस पास के ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी उत्साह से भरे हुए थे। और कारसेवकों का सभी सहयोग कर रहे थे। साथ खेतों के रास्ते उन्हें अयोध्या भेजने का प्रबंध कर रहे थे। ताकि पुलिस उन्हें गिरफ्तार न कर सके। ट्रैक्टरों में भरकर लोग खाद्य सामग्री की व्यवस्था कर रहे थे। तब एक नारा चल रहा था,बच्चा-बच्चा राम का,जन्मभूमि के काम का। 

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