संजीवनी टुडे

कोरोना की वजह से कार्तिक पूर्णिमा पर विश्व भर के बौद्ध अनुयायी नहीं पहुंचे संकिसा

संजीवनी टुडे 30-11-2020 16:37:24

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में बौद्ध की तपस्थली रहे संकिसा में इस बार विश्व भर से आने वाले बौद्ध अनुयायियों का मेला नहीं लग सका।


फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में बौद्ध की तपस्थली रहे संकिसा में इस बार विश्व भर से आने वाले बौद्ध अनुयायियों का मेला नहीं लग सका। कोरोना कॉल की वजह से न तो यहां धम्म यात्रा निकाली जा सकीऔर ना ही बाहरी देशों से आने वाले बौद्ध अनुयायियों ने स्तूप के निकट पूजा अर्चना करवा कर पाए। कोरोना काल की वजह बौद्ध विहार से लेकर स्तूप तक सूना सूना नजर आया। आज यहां कार्तिक पूर्णिमा के दिन महल उदास और गलियां सूनी वाली पंकज उदास की पंक्तियाँ चरितार्थ होती रही। 

बताते चलें कि मान्यता है कि ज्ञान प्राप्त होने के बाद भगवान बुद्ध अपनी मां को बुद्ध धर्म का उपदेश देने के लिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां आए थे। इस वजह से संकिसा विश्व भर के बौद्ध अनुयायियों के लिए तीर्थ बना हुआ है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन से 1 दिन पहले यह बुद्धा अवतरण "समारोह का आयोजन सदियों से होता चला रहा है, लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से न तो विदेशी बौद्ध अनुयाई यहां आ सके और ना ही पूजा-अर्चना की जा सकी। बुद्ध विहार संकिसा से लेकर स्तूप तक तथागत के अनुयाई पंचशील शोभायात्रा निकालते थे। जिसे धम्म यात्रा के नाम से भी जाना जाता था। लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से संकिसा में ना तो कौमुदी महोत्सव मनाया गया और ना ही बुद्धा अवतरण समारोह मनाया गया। भंते नांग सेन का कहना है कि कोरोनावायरस बुरी तरह से विश्व में लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। इसको देखते हुए विदेशों से बौद्ध अनुयाई इस साल यहां नहीं पहुंचे हैं। जिसकी वजह से सब कुछ सूना सूना रहा है।

विदेशी मित्रों के यहां न आने से जिला प्रशासन को भारी राजस्व की हानि हुई है। उनका कहना है कि प्रतिवर्ष यहां कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या से लेकर परेवा तक 3 दिन महोत्सब चलता था। जिसमें दूरदराज के बौद्ध अनुयाई आ कर हिस्सा लेते थे, और यहां के दुकानदारों को भारी लाभ होता था ।लेकिन इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर बुद्ध विहार से संकिसा तक सन्नाटा पसरा रहा। न हीं बुद्ध अनुयायी यहांआए और ना ही महोत्सव का आयोजन हो सका। 

बताते चलें कि संकिसा में भगवान बुद्ध ने रुक कर अखंड साधना की थी। उनकी साधना की वजह से यह स्थान तथागत की धर्म स्थली बन गया है। और बौद्ध अनुयाई गया की तरह संकिसा में भी अपना तीर्थ समझते हैं। यह तीर्थ तमाम परिस्थितियों के बाद भी इस बार सूना सूना रहा वैसे जिला प्रशासन यहां आने वाले विदेशियों की सुरक्षा में जिले से ही नहीं बाहरी जिलों से भी पुलिस बल मंगा कर सुरक्षा के इंतजाम करता था, लेकिन इस बार कोरोनावायरस की वजह से प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। कुल मिलाकर कोरोना वायरस ने सदियों पुरानी प्रथा को यहां बंद कर दिया है और बुद्धा अवतरण "समारोह पर रोक लगा दी है।

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