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दो पक्षों के प्राइवेट विवाद में याचिका पोषणीय नहीं : हाईकोर्ट

संजीवनी टुडे 28-11-2020 21:05:43

दो पक्षों के प्राइवेट विवाद में याचिका पोषणीय नहीं


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि दो पक्षों के प्राइवेट विवाद में याचिका पोषणीय नहीं है। कोर्ट ऐसे मामले में अनुच्छेद 226 के तहत प्राप्त अपने विशेषाधिकार का प्रयोग निजी विवाद सुलझाने के हथियार के रूप में प्रयोग की इजाजत नहीं दे सकता है। हाईकोर्ट ने पेट्रोल पंप के लेनदेन को लेकर हुए दो पक्षों के बीच विवाद में इंडियन ऑयल कारर्पोरेशन को जांच का आदेश देने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। सुरेश चंद्र की याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की पीठ ने यह आदेश दिया।

याचिका में कहा गया कि याची ने इंडियन ऑयल कारपोर्रेशन को पेट्रोलपंप आवंटन की जांच करने के लिए प्रत्यावेदन दिया है। कारर्पोरेशन को निर्देश दिया जाए वह मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई करे। विपक्षी एक विधवा महिला है। इस कोटे के तहत उसे पेट्रोल पंप आवंटित किया गया। जिसे उसने याची को बेच दिया। इसके एवज ने याची ने महिला को 70 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया है। इसके बाद दोनों पक्षों में कुछ विवाद होने पर याची ने विपक्षी की शिकायत कारर्पोरेशन में की।

कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याची ने महिला को व्यक्तिगत लोन दिया था। लेनदेन को लेकर दोनों पक्षों में कुछ विवाद हुआ है। याची अपने व्यक्तिगत विवाद का समाधान याचिका के माध्यम से करना चाहता है जिसकी इजाजत अनुच्छेद 226 इस बात की इजाजत नहीं देता है कि कोई उसका  इस्तेमाल निजी विवाद सुलझाने के हथियार के रूप में करे।

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