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लखनऊ के वैज्ञानिक सतीश मिश्रा डॉ. तुलसी दास चुघ अवार्ड-2020 के लिए चयनित

संजीवनी टुडे 28-10-2020 16:18:38

डॉ. सतीश मिश्रा, प्रिंसिपल साइंटिस्ट, डिवीजन ऑफ मॉलिक्यूलर पैरासिटोलॉजी एंड इम्यूनोलॉजी, सीएसआईआर-सीडीआरआई, लखनऊ को वर्ष 2020 के डॉ. तुलसी दास चुघ पुरस्कार के लिए चुना है।


लखनऊ। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान अकादमी (भारत) की ओरेशन ऐंड अवार्ड्स कमेटी ने डॉ. सतीश मिश्रा, प्रिंसिपल साइंटिस्ट, डिवीजन ऑफ मॉलिक्यूलर पैरासिटोलॉजी एंड इम्यूनोलॉजी, सीएसआईआर-सीडीआरआई, लखनऊ को वर्ष 2020 के "डॉ. तुलसी दास चुघ पुरस्कार" के लिए चुना है। 

यह अवार्ड डॉ. सतीश मिश्रा को मलेरिया परजीवी के जीवन चक्र की जटिल प्रक्रिया को समझने के लिए किए गए उनके शोध के लिए दिया गया है। मलेरिया परजीवी का जीवन चक्र एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें दो मेजबान (स्तनधारी एवं मच्छर) शामिल होते हैं एवं संक्रमण की प्रक्रिया तीन आक्रामक चरणों में पूरी होती है। स्तनधारियों और मच्छरों दोनों में सफलतापूर्वक संक्रमण के लिए विभिन्न चरणों की घटनाओं के समन्वित अनुक्रम (कोओर्डिनेटेड सेक्वेंस ऑफ इवेंट्स) की आवश्यकता होती है। 

डॉ. सतीश मिश्रा ने अपने शोध में बताया कि सीक्रेटेड प्रोटीन विथ थ्रोम्बोस्पोंडिन रिपीट्स (एसपीएटीआर), प्लोडोडियम बर्घी नामक मलेरिया परजीवी द्वारा संक्रमण की एसेक्सुअल ब्लड स्टेज के लिए तो आवश्यक है। लेकिन, हेपेटोसाइट चरण के लिए आवश्यक नहीं है। यह अध्ययन प्लाज्मोडियम बर्घी स्पोरोजोइट्स में एसपीएटीआर की उपयोगिता और संक्रमण की रक्त अवस्था में इसके महत्व पर प्रकाश डालता है, हालांकि इस प्रक्रिया के दौरान इसकी सटीक भूमिका को जानने के लिए अभी विस्तृत जांच की आवश्यकता है।

डॉ. तुलसी दास चुघ पुरस्कार के रूप में एक स्क्रॉल, एक स्मारक पदक और नकद प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है। डॉ. मिश्रा को यह पुरस्कार अकादमी के वार्षिक सम्मेलन के समय दिया जाएगा। वार्षिक सम्मेलन के दौरान, एक सत्र आयोजित किया जाएगा जिसमें वह अपने शोध कार्य की मौखिक प्रस्तुति देंगे तत्पश्चात उस पर चर्चा की जाएगी।

डॉ. मिश्रा को मिले अन्य पुरस्कार

• नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज, भारत द्वारा वर्ष 2019 में निर्वाचित सदस्य
• नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, भारत द्वारा वर्ष 2018 में निर्वाचित सदस्य
• भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2018 में शकुंतला अमीर चंद पुरस्कार 
• जैवप्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के द्वारा वर्ष 2013 में रामलिंगास्वामी फेलौशिप

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