संजीवनी टुडे

दीये लाएंगे खुशहाली की दीवाली, दीपक बनाने को चाक ने पकड़ी रफ्तार

संजीवनी टुडे 29-10-2020 18:44:49

दीये लाएंगे खुशहाली की दीवाली, दीपक बनाने को चाक ने पकड़ी रफ्तार


मीरजापुर। दीपावली नजदीक आते ही कुम्हारों के चाक घूमने लगे हैं। बड़ी संख्या में मिट्टी के दीये बनाने का कार्य कुम्हारों ने शुरू कर दिया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से त्योहारों पर स्थानीय उत्पादों की खरीदारी किए जाने के आह्वान से इस बार कुम्हारों में ज्यादा बिक्री होने की उम्मीद जगी है। चीनी सामानों का बहिष्कार भी इनकी खुशहाली में चार चांद लगाने के लिए तैयार है। दीपावली आगामी 14 नवंबर को मनाई जाएगी। इस अवसर पर दीपों से अपने घर-आंगन को सजाने की तैयारी लोगों ने शुरू कर दी है। बदलते ट्रेंड के साथ लोग डिजाइनर दीये भी खूब पसंद करने लगे हैं। वहीं चाइनीज दीयों से मोहभंग के चलते मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ी है।

पांडेयपुर निवासी कुम्हार अनिल प्रजापति व दिलीप प्रजापति ने बताया कि सरकार द्वारा इलेक्ट्रानिक चाक दी गई है। इससे चक्का घुमाना नहीं पड़ता और कार्य भी जल्दी-जल्दी हो रहा है। विश्वकर्मा पूजा से अब तक हजारों की संख्या में दीपक बनाकर रख दिए हैं और पकाने की प्रक्रिया जल्द ही की जा रही है। 

कुम्हारों को अच्छी आय की उम्मीद 
दीपावली पर धन लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए मिट्टी के दीपक बनाने वाले कुम्हारों के चाक ने रतार पकड़ ली है। उन्हें इस बार अच्छी बिक्री की उम्मीद है। मिट्टी के दीपक, मटकी आदि बनाने के लिए माता-पिता के साथ उनके बच्चे भी हाथ बंटा रहे हैं। कोई मिट्टी गूंथने में लगा है तो किसी के हाथ चाक पर मिट्टी के बर्तनों को आकार दे रहे हैं। 

दीपक की बिक्री बढ़ने की उम्मीद 
लालडिग्गी निवासी मनोहर प्रजापति बताते हैं कि इस बार उम्मीद है कि कुछ ज्यादा दीपक की बिक्री होगी क्योंकि चाइना के बने सामना की खरीदारी बंद हो गई है। पिछले साल करीब तीस हजार दीपक व मिट्टी के अन्य सामग्री बेची थी। इस बार उम्मीद है कि पचास हजार से साठ हजार तक दीपकों की बिक्री होगी। 

चाक से बनती है कई चीजें 
अब इलेक्ट्रिक चाक होने से काम तेजी से होता है। पहले हाथ का चाक होता था लेकिन अब चाक से फटाफट दीपक व अन्य सामान तैयार किया जाता है। बिजली न आने की स्थिति में हाथ का चाक भी तैयार रखा जाता है ताकि काम प्रभावित न हो। इस पर दीपक, घड़ा, करवा, गमला, गुल्लक, गगरी, मटकी, बच्चों की चक्की समेत अन्य उपकरण भी बनाए जाते हैं। 

कुम्हारों को ईंधन पड़ता है महंगा 
मिट्टी चाक पर चढ़ने के बाद एक रूप दे देते हैं पर उसको पक्का करने के लिए मिट्टी को पकाया जाता है। पहले ईंधन इतना महंगा नहीं था पर अब ईंधन ने भी कुम्हारों का पसीने छुड़ा देता है। कुम्हारों को एक पल की भी फुर्सत नहीं मिल पाती है। इस बार गणेश लक्ष्मी की मूर्तियों से लेकर दीए तक की मांग चल रही है। 

50-60 रुपए सैकड़ा बिकते हैं दीये 
कुम्हार बिक्री के लिए दीये की अलग-अलग वैरायटी बनाने लगे हैं। कुम्हारों ने बताया कि 50 रुपए सैकड़ा में दीये बेचे जाते हैं लेकिन दीया बनाना ही परेशानी का सबब नहीं बल्कि बिक्री करने में भी काफी दिक्कतें होती है। धनतेरस से लेकर दीपावली के दिन तक दीये की बिक्री करते हैं। 

मिट्टी का ही जलाएंगे दीपक 
प्राचीन संस्कृति के लिहाज से मिट्टी के दीपकों का ही दीपावली में महत्व होता है। इसे बच्चे व युवा खूब अच्छे से जान रहे हैं। यही वजह है कि अब चाइना के उत्पादों को छोड़कर देशी दीपकों की मांग बढ़ रही है। समीर दूबे, प्रदीप केशरवानी, राजकुमार गुप्ता, अवधेश मोदनवाल, कैलाश, जीवन आदि कहते हैं कि वे कुम्हारों से बने मिट्टी की दीपक ही जलाएंगे। साथ ही अन्य लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं। 

यह खबर भी पढ़े: हरियाणा का निकिता हत्याकांड: 2 आरोपितों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

ऐसी ही ताजा खबरों व अपडेट के लिए डाउनलोड करे संजीवनी टुडे एप

More From uttar-pradesh

Trending Now
Recommended