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देवोत्थान एकादशी: कोरोना पर भारी पड़ी आस्था, लाखों श्रद्धालुओं ने मन्दाकिनी में स्नान कर लगाई कामदगिरि की परिक्रमा

संजीवनी टुडे 25-11-2020 13:25:22

देवोत्थान एकादशी के उपलक्ष्य पर भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में लाखों श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा।


चित्रकूट। देवोत्थान एकादशी के उपलक्ष्य पर भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में लाखों श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा। सुबह से ही श्रद्धालुओं ने पतित पावनी मंदाकिनी के रामघाट पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई। इसके बाद दीपदान करने के बाद मनोकामनाओं के पूरण के लिए कामदगिरि पर्वत की पंचकोसीय परिक्रमा लगाई।

धर्म नगरी चित्रकूट में देवोथान एकादशी को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। बुधवार की सुबह से ही मंदाकिनी के रामघाट में श्रद्धालुओं का भारी जमघट लगना शुरू हो गया था। देश भर से आये श्रद्धालुओं ने सबसे पहले पतित पावनी मंदाकिनी नदी में आस्था की डुबकी लगाई। इसके बाद चित्रकूट के क्षेत्रपालक भगवान ब्राम्हा द्वारा स्थापित स्वामी मत्यगजेन्द्रनाथ भगवान का जलाभिषेक किया तथा भगवान श्री कामतानाथ के मंदिर में पहुंचकर दर्शन-पूजन के बाद दीपदान किया। साथ ही मनोकामनाओं की पूरण के लिए कामदगिरि पर्वत की पंचकोसीय परिक्रमा लगाई। श्रद्धालुओं की आस्था वैश्विक महामारी कोरोना पर भारी दिखी। देवोत्थान एकादशी को लेकर धर्मनगरी चित्रकूट के सभी मठ-मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। 

कामदगिरि प्रमुख द्वार के महंत मदन गोपाल दास महाराज ने बताया कि देवोत्थान एकादशी कार्तिक, शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहते है। दीपावली के बाद आने वाली एकादशी को ही देवोत्थान एकादशी अथवा देवउठान एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। बताया कि आषाढ़, शुक्ल पक्ष की एकादशी की तिथि को देव शयन करते हैं और इस कार्तिक, शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं। इसीलिए इसे देवोत्थान (देव-उठनी) एकादशी कहा जाता है। 

 महंत मदन गोपाल दास ने बताया कि कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु, जो क्षीरसागर में सोए हुए थे, चार माह उपरान्त जागे थे। विष्णु जी के शयन काल के चार मासों में विवाहादि मांगलिक कार्यों का आयोजन करना निषेध है। हरि के जागने के बाद ही इस एकादशी से सभी शुभ तथा मांगलिक कार्य शुरू किए जाते हैं। 

चित्रकूट में भी इस उपलक्ष्य पर विशेष मेले का आयोजन होता है। देश के कोने -कोने से श्रद्धालु आकर मंदाकिनी में स्नान करने के बाद दीपदान कर मनोकामनाओं के पूरक भगवान श्री कामता नाथ की पंचकोसीय परिक्रमा लगाकर पुण्य लाभ अर्जित करते है। देवोत्थान एकादशी पर जगह-जगह गन्ना बेचने वालों का मेला लगा रहा। मुख्यालय के पुरानी बाजार चैराहा,धतुरहा चैराहा, गल्ला मंडी तिराहा,सब्जी मंडी एवं मंदाकिनी किनारे गन्ना खरीदने के लिए लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। 

 जिलाधिकारी शेषमणि पांडेय ने देव दीपावली को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए मेला परिक्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम किये। जिलाधिकारी ने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद नरेंद्र मोहन मिश्र को रामघाट की साफ-सफाई तथा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 11 हजार गोबर से बने दीपों का दीपदान कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने, पूरे रामघाट पर प्रकाश व्यवस्था चौकस करने का दायित्व अधिशासी अभियंता विद्युत को सौंपा। इसके अलावा पूरे रामघाट पर अच्छी तरह से साज-सज्जा कराने की जिम्मेदारी नगर पालिका के साथ-साथ पर्यटन विभाग को सौंपी गई है। वहीं पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल ने अपर पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी को मेला परिक्षेत्र में श्रद्धालुओें की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिये हैं।

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