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सतर्कता से किसान कमा सकते हैं दोगुना लाभ, मटर के बाद प्याज लगाने को रहें तैयार

संजीवनी टुडे 24-11-2020 14:17:13

एक कहावत है-आगे खेती आगे-आगे, पीछे की खेती भागे-जोगे। अर्थात उचित समय पर की गयी खेती ठीक होती है। वहीं समय के बाद की खेती भाग्य भरोसे हो जाती है। इस हिसाब से नवम्बर और दिसम्बर का महीना कृषि कार्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।


लखनऊ। एक कहावत है-आगे खेती आगे-आगे, पीछे की खेती भागे-जोगे। अर्थात उचित समय पर की गयी खेती ठीक होती है। वहीं समय के बाद की खेती भाग्य भरोसे हो जाती है। इस हिसाब से नवम्बर और दिसम्बर का महीना कृषि कार्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस माह में पारम्परिक खेती में जहां धान की कटाई के बाद खेत तैयार करने की चुनौती होती है, वहीं दूसरी तरफ गेहूं बोने के लिए बीज चयन आदि का समय भी होता है। प्याज, लहसून, बैगन, टमाटर पर समय देने की काफी जरूरत होती है, तो दिसम्बर माह में सूरजमुखी लगाने का भी समय होता है।

दिसम्बर माह में तैयारी के सम्बंध में उद्यान विभाग के निदेशक अनीस श्रीवास्तव का कहना है कि वैसे तो आजकल पूरे साल की खेती हो गयी है लेकिन नवम्बर—दिसम्बर में किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। इस माह में जहां अधिकांश सब्जियां तैयार होने लगती हैं, वहीं रबी के फसल के बुआई का समय भी आ जाता है। थोड़ी सी सजगता से किसान काफी लाभ कमा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि जो किसान अगेती मटर की बुआई कर चुके हैं उनका मटर दिसम्बर माह में तैयार हो जाएगा। ऐसे किसानों को उसमें प्याज लगाने की तैयारी करनी चाहिए। मटर की खेत में प्याज की पैदावार अच्छी होती है। उसमें घास के संक्रमण कम रहता है, वहीं खेत सही होता है। 

उन्होंने कहा कि हरी की देर वेराइटी भी जो किसान लगाए हैं, उनका दिसम्बर के आखिरी या जनवरी माह तक निकल जाएगी। ऐसे किसानों को उस खेत का उपयोग सूरजमुखी लगाकर करना चाहिए। कई किसान धान के खेत में भी प्याज की खेती करते हैं लेकिन जिन किसानों को धान की खेती में प्याज की खेती करनी है, उन्हें इससे पहले चारा के उपयोग के लिए खेत में चारा लगा देना चाहिए। इससे चारा दो माह में कट जाएगा। इसके बाद उसमें प्याज की रोपाई करें।

कृषि उप निदेशक अनीस श्रीवास्ताव ने बताया कि गेहूं के बोआई का भी यह उपयुक्त समय है। जो किसान गेहूं की बीजाई कर चुके हैं उन्हें 21 दिन के बाद उसे पानी अवश्य देना चाहिए। यदि उसमें हल्के पीले धब्बे लगते हैं तो जस्ते की कमी का लक्षण है। ऐसे गेहूं में जिंक सल्फेट का छिड़काव करना जरूरी होता है। उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से बताया कि इस समय बगीचों में भी खाद देने का समय होता है।

उन्होंने कहा कि आम, नीबू, अनार आदि के पौधों गोबर की खाद प्रति पौधा के हिसाब से 21 किलो के लगभग प्रति वर्ष देना उपयुक्त होता है। पांच से ऊपर के पौधों में पचास किलो से 100 किलो तक गोबर की खाद देना चाहिए। नींबू में केकंर रोग की रोकथाम के लिए 20 मिली ग्राम स्टूप्टोसाइकिलन को 25 ग्राम कापर सल्फेट के साथ 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। 

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