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गजब... गाजियाबाद पुलिस- दुष्कर्म के मामले में पांच साल तक चार्ज शीट नही

संजीवनी टुडे 22-08-2020 12:19:51

अधिकारी बदले, सरकार बदली, लेकिन नहीं बदला को गाजियाबाद पुलिस का रवैया।


गाजियाबाद। अधिकारी बदले, सरकार बदली, लेकिन नहीं बदला को गाजियाबाद पुलिस का रवैया। अरोपियाें के साथ मिलीभगत, पीड़ितों का और ज्यादा उत्पीड़न करना, अपनी जान बचाने के लिए अपराधिक घटनाओं को फर्जी तरीके से खोलना मानो गाजियाबाद पुलिस का शगल बन गया है। 

जी हां गाजियाबाद पुलिस की पिछले सालों की वर्किंग पर नजर डाले तो यह साफ हो जाता है। पुलिस के दो मामले तो हाल ही में ऐसे प्रकाश में आए हैं जिनमें पुलिस की वर्दी दागदार होती है। दिलचस्प बात यह है कि पुलिस को अपराधियों को उनके किए की  सजा दिलाने के लिए तत्पर रहना चाहिए लेकिन पुलिस कुछ मामलों में इतनी सुस्त हो जाती है कि पीड़ित तो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए थानों व पुलिस अधिकारियों की चक्कर लगाता रहा है जबकि आरोपी मौज में रहते हैं। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है जिसमें इंदिराुपरम पुलिस ने दुष्कर्म के एक मामले में पांच साल तक चार्ज शीट ही नहीं लगाई। 

हारकर आरोपी को न्यायालय की शरण में जाना पड़ा और अब अदालत ने एसएचओ को फटकार लगाते हुए तलब किया है। यह घटना तीन मई 2015 की है जिसमें एक महिला ने राहुल, विपिन समेत पांच लोगों के खिलाफ महिला थाने में मुकदमा कायम कराया था। जिसे इंदिरापुरम थाने में स्थानांतरित कर दिया गया था लेकिन आज तक पुलिस ने इतनी जहमत नहीं उठाई कि आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दे। अधिवक्ता परविंद्र नागर ने बताया कि अब अदालत ने एसएचओ को तलब किया है। अब सवाल यह उठता है कि इस दौरान कई पुलिस कप्तान व एचएचओ बदले गए। एसएसपी ने विवेचनाओं के लिए विशेष अभियान भी चलाया गया लेकिन किसी की भी पकड़ में यह मामला नहीं आया। 

इसी तरह सिहानी गेट पुलिस का मामला भी प्रकाश में आया है जिसमें  पुलिस ने लूट का एक मामला फर्जी ही खोल दिया। सिहाने गेट थाना क्षेत्रा सेवा नगर में रहने वाले साहिल नामक युवक साहिल किसी अपराधिक मामले में दस जून को जेल गया था। 31जुलाई को उसे जमानत मिल गई और वह बाहर आ गया। 

इसी दौरान यहीं पर रहने वाले ओमदत्त गुप्ता के यहां पर लूट की घटना हो गई। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने लूट का खुलासा साहिल पर खोलते हुए उसे वांछित कर दिया जबकि आरोपी घटना के समय जेल में बंद था। साहिल ने भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद तल्ख टिप्पणी करते हुए सिहानी गेट पुलिस जवाब मांगा है। अदालत ने टिप्पणी की है कि यदि पुलिस घटनाओं का फर्जी खुलासा करेगी तो लोगों का रहना मुश्किल हो जाएगा। पीड़ित के वकील संजय नागर का कहना है कि पुलिस ने इस मामले में अपनी गल्ती भी मानी। 

वर्ष 2019 में लिंकरोड की तत्कालीन थाना प्रभारी लक्ष्मी चौहान पर आरोपियों के पास से बरामद रकम में से  80 लाख के गबन व इंदिरापुरम पुलिस के तत्कालीन प्रभारी दीपक शर्मा व एस सब इंस्पेक्टर पर 14लाख की रिश्वत लेकर जुआरियों को छोड़ना पर न केवल एफआईआर दर्ज हुई बल्कि ये मामले पूरे देश में चर्चाओं के विषय रहे थे।

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