संजीवनी टुडे

कोरोना से पहले इन महामारियों ने मचाया था मौत का तांडव, ऐसे की थी इंसानों ने जीत हासिल

संजीवनी टुडे 24-03-2020 10:09:56

पूरी दुनिया के लिए खौफ का दूसरा नाम बन चुके कोरोना वायरस की सबसे खतरनाक प्रवृत्ति है इसकी चाल, पहले इसके लक्षण इक्का दुक्का लोगों में दिखते हैं, लेकिन दो से तीन हफ्ते में जंगल की आग की तरह फैलते हैं। जानकारी के अनुसार आपको बता दे की विश्वभर में कोरोना की वजह से 16550 से अधिक लोगों की मौतें हो चुकी। वहीं इस वायरस वहीं इस वायरस से अब तक 3 लाख से अधिक लोग इस बीमारी से पूरी तरह से चपेट में आ चुके है


नई दिल्ली। पूरी दुनिया के लिए खौफ का दूसरा नाम बन चुके कोरोना वायरस की सबसे खतरनाक प्रवृत्ति है इसकी चाल, पहले इसके लक्षण इक्का दुक्का लोगों में दिखते हैं, लेकिन दो से तीन हफ्ते में जंगल की आग की तरह फैलते हैं। जानकारी  के अनुसार आपको बता दे की विश्वभर में कोरोना की वजह से 16550 से अधिक लोगों की मौतें हो चुकी। वहीं इस वायरस वहीं इस वायरस से अब तक 3 लाख से अधिक लोग इस बीमारी से पूरी तरह से चपेट में आ चुके है। इस लाइलाज बीमारी का जहर पूरी दुनिया में फ़ैल चुका है। इसके पहले भी दुनिया में इंसानी नस्ल की कई संक्रामक बीमारियां रही हैं। इतिहास में काली मौत से लेकर इबोला तक, कई महामारियों ने चुनौती दी है। इन महामारियों में करोड़ो लोगों की मौत के बाद भी हर बार इंसान और उसके दिमाग की जीत हुई है। हालांकि बड़े से बड़ी बीमारी भले ही इंसानी दिमाग से जीत नहीं पायी लेकिन जाते-जाते अपनी काली यादें हमेशा के लिए सबके जेहन में छोड़ गयीं। लेकिन सवाल ये है की क्या इस बार भी हम कोरोना पर जीत हासिल करेंगे…

epidemics
दबे-छिपे ये आरोप लगाया जा रहा है कि कोरोना चीन या अमेरिका की किसी प्रयोगशाला में विकसित वायरस है। हालांकि अभी भी इस बात की पुष्टि नहीं हो पायी है कि चीन या अमेरिका की किसी प्रयोगशाला में विकसित वायरस है या कुदरती आपदा है। पर अब यह इंसानों को वैसे ही संक्रमित करके काल के गाल में समाने पर मजबूर कर रही है जैसे पिछली काली मौत ने किया था।

लेकिन, तारीख़ के पन्ने महामारियों के इतिहास बदलने की मिसालों से भरे पड़े हैं. बीमारियों की वजह से सल्तनतें तबाह हो गईं। पुराने जमाने में भी बड़े व्यापारिक शहर वायरसों का घर हुआ करते थे। इस हालत में एथेंस हो या कुस्तुनतुनिया के लोग इस अहसास के साथ ही जीते थे कि वे बीमार पड़कर अगले हफ्ते मर सकते हैं। या फिर उनको यह भी डर हमेशा बना रहता होगा कि कोई महामारी फैलेगी और उनका पूरा परिवार एक झटके में खत्म हो जाएगा।

epidemics

काली मौत या ब्लैक डेथ-

इन महामारियों में सबसे ज्यादा दहला देने वाली थी काली मौत या ब्लैक डेथ। इसकी शुरुआत पूर्वी या मध्य एशिया में किसी जगह पर 1330 के दशक में हुई थी। उस समय चूहों के शरीर पर रहने वाले पिस्सुओं में मौजूद यर्सीनिया पेस्टिस नाम के जीवाणु ने पिस्सुओं के काटे हुए लोगों को संक्रमित करना शुरू कर दिया था।

यह जीवाणु मध्य या पूर्वी एशिया से रेशम मार्ग से होता हुआ 1343 में यूरोप के क्रीमिया तक पहुंच गया था। चूहों और पिस्सुओं के जरिए यह महामारी पूरे एशिया, यूरोप और उत्तरी अफ्रीका में फैल गई थी। बीस साल से कम समय में यह अटलांटिक महासागर के तटों तक पहुंच गई।

यूरोप में इसने भयानक तबाही मचा दी थी। उस समय इस काली मौत से 7.5 करोड़ से लेकर 20 करोड़ के बीच लोग मारे गए थे जो यूरेशिया की कुल आबादी का 25 फीसद से अधिक था। इंग्लैंड में हर दस में से चार लोग मारे गए थे और आबादी महामारी से पहले की 37 लाख से घटकर 22 लाख रह गई थी।


चेचक-

अमरीका में यूरोपीय उपनिवेश स्थापित होने के बाद के बाद इन इलाक़ों में होने वाली अधिकतर मौतों के लिए वो बीमारियां ज़िम्मेदार थीं,  काली मौत अकेली ऐसी घटना थी नहीं सबसे ज़्यादा विनाशकारी महामारियों ने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर के टापुओं पर तबाही मचाया। एक किताब के अनुसार, 5 मार्च 1520 को जहाज़ों का एक छोटा बेड़ा क्यूबा के द्वीप से मैक्सिको के लिए रवाना हुआ। इनमें घोड़ों के साथ 900 स्पेनी सैनिक, तोपें और कुछ अफ्रीकी गुलाम भी थे। इनमें से एक गुलाम फ्रासिस्को दि एगिया अपनी देह पर कहीं अधिक घातक माल लादे था….चेचक का विषाणु।”

फांसिस्को के मैक्सिको में उतने के बाद इस विषाणु ने उसके शरीर में तेजी से बढ़ना शुरू किया और उसके शरीर पर भयावह फुंसियां फूट पड़ी। बुखार में तपते फ्रांसिस्को को मैक्सिको में केम्पोआलान के एक अमेरिकी परिवार के घर पर रखा गया। जिसके दस दिन बाद पूरा केम्पोआलान कब्रगाह में बदल गया। हजारों की संख्या में लाशें सड़कों पर सड़ती रहीं। शवों को दफनाने की हिम्मत किसी में नहीं थी। ऐसे में अधिकारियों ने आदेश दिया कि मकानों को शवों पर गिरा दिया जाए।

स्पेनिश फ्लू-

पहले विश्वयुद्ध के दौरान वह मोर्चा एक नेटवर्क से जुड़ा था। ब्रिटेन, अमेरिका, भारत और ऑस्ट्रेलिया से लगातार आदमियों और रसद की आपूर्ति वहां की जा रही थी। पश्चिमी एशिया से तेल, अर्जेंटीना से अनाज और बीफ, मलाया से रबर, और कांगो से तांबा भेजा जा रहा था। बदले में उन सबको स्पेनिश फ्लू मिला। आज से लगभग सौ साल पहले 1918 में उत्तरी फ्रांस में जनवरी के महीने में खंदकों से एक खास तरह की बीमारी फैली जो सैनिकों में फैल रही थी और जिसका नाम स्पेनिश फ्लू रखा गया।  कुछ ही महीनों में आधा अरब लोग यानी दुनिया की उस समय की आबादी का करीबन 35 फीसद हिस्सा इस फ्लू की चपेट में आ गए।

epidemics

वहीँ पिछले कुछ सालों में भी हमने नए किस्म की कुछ महामारियां देखी हैं। 2002-03 में सार्स, 2005 में फ्लू, 2009-10 में स्वाइन फ्लू और 2014 में इबोला। लेकिन सार्स की वजह से पूरी दुनिया में 1000 से कम लोग मरे। पश्चिम अफ्रीका में शुरू हुआ इबोला शुरुआत में नियंत्रण से बाहर जाता लगा था और कुल 11000 लोग मारे गए।

हालांकि इन महामरियों ने भारी तबाही मचाने के बाद ही सही लेकिन अपना इंसानो के सामने अपना दम तोड़ ही दिया। पिछली महामारियों के देखते हुए अब यही उम्मीद है कि इस कोरोना को भी हम रोक लेंगे।

 यह खबर भी पढ़े: अगर आज से ही बंद कर देंगे ये काम तो कोरोना की टूट जाएगी कमर

जयपुर में प्लॉट मात्र 289/- प्रति sq. Feet में बुक करें 9314166166 

ऐसी ही ताजा खबरों व अपडेट के लिए डाउनलोड करे संजीवनी टुडे एप

More From technology

Trending Now
Recommended