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आंध्रप्रदेश से लौटे श्रमिक : योग्यता क्षमता के अनुसार मिले काम तो अपने गांव से प्यारा कुछ भी नहीं

संजीवनी टुडे 03-06-2020 17:04:09

कोरोना महामारी के कारण फैक्ट्री बंद हो गई। आगे तीन महीने चलने की संभावना भी नहीं, मोदी सरकार ने चलाई श्रमिक ट्रेन तो जगी घर पहुंचने की आशा और गांव की ओर चल दिए।



सुल्तानपुर। कोरोना महामारी के कारण फैक्ट्री बंद हो गई। आगे तीन महीने चलने की संभावना भी नहीं, मोदी सरकार ने चलाई श्रमिक ट्रेन तो जगी घर पहुंचने की आशा और गांव की ओर  चल दिए। पढ़ाई के हिसाब से काम मिला तो जरूर करेंगे। शहर जाने की क्या जरूरत है। अपना गांव सबसे सुंदर, सबसे प्यारा है । 

चांदा के समहुता गांव निवासी अरविंद प्रजापति आंध्र प्रदेश की एक फैक्ट्री में काम करने थे। अरविंद ने हिंदुस्तान समाचार से अपनी कथा व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि अभी तो घर के बाहर मैं छप्पर में एकांतवास जीवन व्यतीत कर रहा हूं। स्नातक की पढ़ाई कर चुके अरविंद ने बताया कि पांच साल पहले आंध्र प्रदेश गया था। 20 हजार वेतन पर टेक्सटाइल कंपनी में काम करता था।

अरविंद का कहना है कि फैक्ट्री बंद हो गई, आगे भी चलने की उम्मीद नहीं थी। इसलिए गांव पहुंचना ही एक रास्ता था। मोदी सरकार को धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने श्रमिक ट्रेन चलाई हम आसानी से अपने गांव पहुंच गए।

मनरेगा में हर कोई काम नहीं कर सकता है। वहाँ शारीरिक मेहनत का काम है। हम स्नातक हैं, कोई डिप्लोमा है, तो कोई पॉलिटेक्निक है। अपने घर परिवार के साथ रहकर गांव, आसपास के जिलों में काम करने का आनंद कुछ और ही है, परंतु पैसे की मजबूरी कहां से कहां पहुंचा देती है।

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