संजीवनी टुडे

पश्चिम बंगाल : स्कूलों में लंबी छुट्टी के खिलाफ आंदोलन करेंगे शिक्षक

संजीवनी टुडे 08-05-2019 21:10:03


कोलकाता। गत दो मई को पश्चिम बंगाल में चक्रवाती तूफान 'फानी' के प्रवेश करने की आशंका के मद्देनजर राज्य सरकार ने सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में गर्मियों की छुट्टी की घोषणा कर दी थी। यह छुट्टी दो मई से 30 जून तक के लिए की गई है। इसे लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। इतनी लंबी गर्मी की छुट्टी क्यों दी गई है, इस बारे में कई शिक्षाविद सवाल खड़े कर रहे हैं। अब राज्य के विभिन्न सरकारी स्कूलों के शिक्षक और छात्रों के अभिभावक इसके खिलाफ आंदोलन करने की योजना बनाई है। 

14 मई को दोपहर के समय विकास भवन स्थित राज्य शिक्षा विभाग के मुख्यालय के सामने शिक्षक और अभिभावक आंदोलन करेंगे। इसके अलावा प्रत्येक जिले के जिलाधिकारियों को इससे संबंधित ज्ञापन भी सौंपा जाएगा और पूछा जाएगा कि आखिर 40 दिनों की अतिरिक्त छुट्टी देने का क्या मतलब है?

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 शिक्षकों का कहना है कि इतनी लंबी छुट्टी होने के कारण शिक्षा वर्ष का पाठ्यक्रम पूरा करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए राज्य सरकार को अपनी छुट्टी संबंधी अधिसूचना वापस लेनी चाहिए। माकपा के शिक्षक संगठन निखिल बंग शिक्षक समिति और एसईयूयूसी प्रभावित माध्यमिक शिक्षक और शिक्षाकर्मी समिति की ओर से इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया है। हालांकि साफ किया गया है कि विकास भवन के सामने धरना देने के समय किसी भी पार्टी अथवा संगठन का बैनर पोस्टर नहीं लगाया जाएगा। यह गैर-राजनीतिक आंदोलन होगा।
 
इस बार राज्य शिक्षा विभाग ने तय किया था कि 17 मई से 10 जून तक 23 दिनों की छुट्टी दी जाएगी, लेकिन अब सरकार ने जो अधिसूचना जारी की है उसमें 59 दिनों की छुट्टी दी गई है। हालांकि शिक्षकों के इस आंदोलन के बारे में तृणमूल के शिक्षक संगठन माध्यमिक शिक्षक समिति के अध्यक्ष देवेंद्र मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि जिन किसी शिक्षकों ने भी इसके खिलाफ आंदोलन की योजना बनाई है वह विपक्षी पार्टियों के संगठन का हिस्सा हैं और राज्य सरकार को बदनाम करने की साजिश के तहत इस तरह के आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। इन लोगों ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि अभी चुनाव चल रहा है और किसी भी तरह से सरकार को मुश्किल में डालने के लिए विपक्षी पार्टियां किसी भी मुद्दे को सुर्खियों में लाना चाहती हैं। 

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प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष अमल मुखर्जी ने कहा कि एक शिक्षक के तौर पर राज्य सरकार के इस निर्णय की मैं कड़ी निंदा करता हूं। पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री राजनीति में इतना अधिक व्यस्त हो गए हैं कि छात्रों के भविष्य से खेल रहे हैं।

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