संजीवनी टुडे

अवैध शिकारियों की खैर नहीं, काजीरंगा की सुरक्षा में तैनात एसआरपीएफ

संजीवनी टुडे 06-07-2019 13:31:53

राष्ट्रीय उद्यान काजीरंगा में असम के प्रतीक एक सींग वाले गैंडों का शिकार करने वाले अवैध शिकारियों की अब खैर नहीं है।


काजीरंगा। राष्ट्रीय उद्यान काजीरंगा में असम के प्रतीक एक सींग वाले गैंडों का शिकार करने वाले अवैध शिकारियों की अब खैर नहीं है। इसका कारण यह है कि असम सरकार द्वारा गठित विशेष गैंडा सुरक्षा वाहिनी(एसआरपीएफ) की टीम अत्याधुनिक हथियारों के साथ लैस होकर काजीरंगा में तैनात हो चुकी है।

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काजीरंगा की सुरक्षा में तैनात एसआरपीएफ के जवान लगातार गश्त लगा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि लगभग 10 माह तक नगांव जिले के बढ़मपुर स्थित 10वीं असम पुलिस बटालियन (एपीबीएन) के मुख्यालय में एसआरपीएफ के महिला एवं पुरुष समेत कुल 82 जवानों को कठिन प्रशिक्षण दिया गया है। काजीरंगा के पांच वनांचलों में नवनियुक्त अत्याधुनिक हथियारों से लैस जवानों को तैनात किया जा रहा है।

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काजीरंगा प्रबंधन के सूत्रों ने बताया कि एसआरपीएफ के 82 जवान शुक्रवार की शाम को काजीरंगा पहुंच कर अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर ली है। असम सरकार ने अवैध शिकार पर लगाम कसने के लिए एसआरपीएफ का हाल ही में गठन किया था। सूत्रों ने बताया कि एसआरपीएफ के 82 सदस्यीय दल को काजीरंगा के तीन रेंजों में तैनात किया गया है। शनिवार की सुबह जवानों को हथियारों के साथ वनांचल में ड्यूटी करते देखा गया।

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जानकारी के अनुसार काजीरंगा के बूढ़ापहाड़ वनांचल के दुर्गम इलाकों में एसआरपीएफ के जवान अवैध शिकारियों के विरुद्ध अपना अभियान आरंभ किया है। बूढ़ापहाड़ वनांचल में पिछले कुछ दिनों के दौरान अवैध शिकारियों की काफी गतिविधियां देखी गई थीं। इस इलाके में कई गैंडों का अवैध शिकारियों ने हत्या कर उनकी सींग काट कर ले भागे थे।

एसआरपीएफ के जवानों ने कहा है कि वे किसी भी कीमत पर काजीरंगा में अवैध शिकारियों के मंसूबों को सफल नहीं होने देंगे। नवनियुक्त जवान काजीरंगा के वातावरण से तालमेल बैठाने में जुट गए हैं। माना जा रहा है कि काजीरंगा में अब अवैध शिकारियों की खैर नहीं है। अगर वे प्रवेश करते हैं, तो उन्हें एसआरपीएफ के जवानों से कड़ी चुनौती मिलेगी।

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