संजीवनी टुडे

'पानी की बर्बादी नहीं रोकी तो विकराल हो सकते हैं हालात'

संजीवनी टुडे 07-07-2019 16:59:48

पानी की बर्बादी नहीं रोकी तो विकराल हो सकते हैं हालात


प्रयागराज। दुनिया के कई देश गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि पानी की बर्बादी नहीं रोकी गई तो यह समस्या विकराल रूप धारण कर सकती है। जल संकट धीरे-धीरे पूरी दुनिया की एक समस्या बनता जा रहा है। इसे लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ती जा रही है। कहा जाने लगा है कि अगला विश्व युद्ध पानी को लेकर हो सकता है। 

यह बातें गंगा विचार मंच काशी प्रांत की संयोजक अनामिका चौधरी ने रविवार को संगम किनारे नागरिकों से कही। उन्होंने कहा कि पानी के बिना न तो वन, जंगल हरा भरा रह सकता है और न ही मनुष्य का जीवन। सभी जानते हैं कि प्यास बुझाने के लिए पानी हमें धरती के अंदर से मिलता है और धरती के अंदर बरसात के पानी का संचय कर संरक्षण से होता है। जलवायु परिवर्तन होने के कारण, तालाबों, पोखरों की घटती संख्या, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से जल का संचय पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पा रहा है। साथ ही संरक्षण न होने के कारण धीरे धीरे भूगर्भ जल स्तर तेजी से घटने लगा है। 

उन्होंने कहा कि अपने देश में महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे कई राज्य एवं जिले ऐसे हैं, जहां वर्तमान में जल संकट के चलते हाहाकार मचा हुआ है और वहां के नागरिकों के लिए सरकार को टैंकरों से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। जल संकट के लिए कोई दूसरा नहीं बल्कि हम खुद दोषी हैं। समय के बदलाव के साथ साथ कुओं का स्थान नलकूपों एवं हैंडपंपों का जमाना आ गया और पानी का खर्च एवं बर्बादी दोनों बढ़ने लगे। आज स्थिति यह है कि घर-घर में समरसेबल पंप लगने लगे हैं, जिससे पानी का खर्च असीमित हो गया है।     

अनामिका ने कहा कि अगर हमें प्रकृति के भविष्य को सुरक्षित रखना है तो हर दशा में हमें पानी का संरक्षण एवं संचय करना ही होगा। जल संचय के लिए जरूरी है कि हम अपने दैनिक उपयोग में इस्तेमाल किए जाने वाले पानी को बर्बाद करने की जगह उसे संचित और संरक्षित करें। जल संचय के लिए यह भी जरूरी है कि हम खेती-किसानी के लिए जो पानी इस्तेमाल करते हैं उसे आधुनिक तकनीक के आधार पर इस्तेमाल करें जिससे फसल भी पैदा हो और पानी की बर्बादी भी न हो। अगर समय रहते ध्यान न दिया गया तो निश्चित है कि हमारी भावी पीढ़ी का जीवन खतरे में पड़ जाएगा और इस धरती पर मनुष्य ही नहीं बल्कि पशु पक्षियों का जिंदा रह पाना असंभव हो जाएगा। अंत में सभी को गंगा जल लेकर ’जल संचयन और वर्षा जल के संरक्षण’ का संकल्प दिलाया गया। 

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजय बहादुर, कमलाकर दुबे, आनंद जायसवाल, कैप्टन सुनील निषाद, सोमनाथ मिश्रा, दिनेश श्रीवास्तव सहित अन्य कई लोग मौजूद रहे।

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