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सरकारी सहायता प्राप्त करने से बेहतर है पैदल चलना

संजीवनी टुडे 28-05-2020 15:38:21

प्रशासनिक विफलताओं के कारण लंबी-लंबी दूरी से यात्रा कर अपने गाँवों की ओर पैदल जाने वाले प्रवासी श्रमिक का सिलसिला जारी है। ऐसा ही वाकया गुरूवार को दर्दमारा बार्डर पर देखने को मिल।



देवघर। प्रशासनिक विफलताओं के कारण लंबी-लंबी दूरी से यात्रा कर अपने गाँवों की ओर पैदल जाने वाले प्रवासी श्रमिक का सिलसिला जारी है। ऐसा ही वाकया गुरूवार को दर्दमारा बार्डर पर देखने को मिल। जब आंध्रप्रदेश से बेतिया (बिहार) के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन से जसीडीह आये चन्दन कुमार,प्रकाश कुमार अपने 7 साथियों के साथ कोई सुविधा नहीं मिल पाने के कारण पैदल ही निकल पड़े। 

सांसद निशिकांत दुबे के निर्देश पर चलाये जा रहे बाबा बलियासे के राहत शिविर में खाना-पानी दिया गया। तभी सब्जी ले जा रहे एक पिकअप वैन उधर से गुज़र रही थी तो उसे रुकवाकर उन्हें भागलपुर तक भेजवाया गया।

दूसरी घटना महाराष्ट्र के अशोक पाल,कंचन सहित कुल 6 लोग जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं। उन्हें बस द्वारा बार्डर पर लाकर छोड़ दिया गया है जबकि उन्हें बर्दमान (पश्चिम बंगाल)जाना है। 

शिविर में जीतू पाठक द्वारा उन मज़दूरों को भोजन उपलब्ध कराते हुए डीसी ऑफिस से संपर्क करने को कहा तो वह बिफर पड़ा। गुस्से में आक्रोश व्यक्त करते हुए युवक कंचन ने कहा कि पिछले 8 दिन से उसे इधर-उधर यही कह कर दौड़ाया जा रहा है कि वहाँ से सरकारी व्यवस्था प्राप्त हो जाएगी लेकिन कुछ मिलता नहीं। इसलिए अब हम लोग पैदल ही अपने घर चले जायेंगे।

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