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Uttarakhand Lockdown: सीएम के आदेश ने पहले उम्मीद जगाई और फिर तोड़ दिया सब्र का बाँध, पुलिस से भिड़े लोग

संजीवनी टुडे 31-03-2020 08:49:51

मजबूरी में पुलिस ​को कुछ लोगों संग सख्ती बरतनी पड़ी।


डेस्क। उत्तराखंड लॉकडाउन के बीच पहाड़ को जाने के लिए हल्द्वानी तक पहुंचे यात्री फंस गए हैं। गौलापार से सोमावार को यात्रियों को हल्द्वानी स्टेडियम तक लाया गया। इन यात्रियों की तादाद 400 के आस पास है। इनका कहना है कि सीएम रावत ने 31 मार्च को परिवहन व्यवस्था कुछ घण्टों के लिए सुचारू किये जाने की बात कही थी। फिर पता चला कि अब ट्रांसपोर्ट सेवा बंद हो चुकी है। लिहाजा यही रोकना पड़ेगा तो कुछ लोग आक्रोशित हो गए। पुलिस-प्रसाशन को खरी-खोटी सुनाने के साथ भिड़ने को उतारू हो गए। मजबूरी में पुलिस को कुछ लोगों संग सख्ती बरतनी पड़ी। जिसके बाद मामला शांत हुआ।

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लोगों का कहना है कि सीएम रावत ने 31 मार्च को परिवहन व्यवस्था कुछ घण्टों के लिए सुचारू किये जाने की बात कही थी। इसी बात पर दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा आदि शहरों से लोग हल्द्वानी पहुंचे जिससे वह पहाड़ों में अपने घर पहुंच जाएं लेकिन रविवार शाम घोषणा वापस लिए जाने से काफी लोग हल्द्वानी में फंस गए हैं। इन यात्रियों को गौलापार से हल्द्वानी में स्टेडियम में लाया गया है और इनका मेडिकल प्रशिक्षण किया जाना है। इनको बताया जा रहा है कि 14 दिनों तक हल्द्वानी में ही रहना होगा। इधर यात्रियों ने खराब भोजन पैकेट, और पुलिस द्वारा जबरन सख्ती दिखाए जाने की बात कहते हुए हंगामा किया। पुलिस प्रशासन इनको शांत करने में जुटा रहा।

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दरअसल पहले मेडिकल जांच के बाद इन्हें घर भेजा जाता। लेकिन रविवार रात ही शासन से नया आदेश जारी हुआ। जिसमें पूर्ण लॉकडाउन यानी वाहनों के संचालन में प्रतिबंध लगा दिया गया। जिसके बाद बागजाला में रोके गए कुछ लोगों को रात में बाकियों को सोमवार सुबह स्टेडियम लाया गया।तहसीलदार पीआर आर्य के मुताबिक करीब 250 लोगों को यहाँ ठहराने की व्यवस्था की गए। सुबह जब लोगों को पता चला कि 14 दिन यही रहना पड़ेगा तो सभी गुस्सा गए। जिसके बाद एसडीएम विवेक राय, सीओ शांतनु पराशर, तहसीलदार पीआर आर्य व कोतवाल संजय कुमार के सामने कुछ लोगों ने बखेड़ा खड़ा कर दिया। पुलिसकर्मियों ने काफी समझाने का प्रयास किया लेकिन लोग नहीं माने। बाद में मजबूरी में पुलिस चार लोगों को पकड़कर ले गई। जिसके बाद मामला शांत हुआ। वहीं, एसएसआई कश्मीर सिंह ने बताया कि थोड़ी देर में इन्हें वापस स्टेडियम पहुँचा दिया था।

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स्टेडियम में रखे गए लोग दिल्ली, हरियाणा और यूपी से पहुँचे थे और इन्हें पहाड़ निकलना था। रास्ते में इन्हें किसी ने नहीं रोका लेकिन यहाँ आकर अटक गए। ऐसे में सभी की जुबान पर एक ही पीड़ा थी कि हम अपने राज्य में क्यों रोके गए हैं।स्टेडियम में लाए गए लोगों की स्वास्थ्य जांच करने के बाद इन्हें हॉल में एंट्री दी जा रही है। रहने से लेकर खाने की पूरी व्यवस्था की जा रही है। सुबह के वक्त सामाजिक संगठनों द्वारा खाना पहुँचाया गया। रात में ठेकेदार ने भोजन बनाना शुरू कर दिया। वहीं, नाराज लोगों द्वारा खाने के पैकेट फेंकने पर सेवा करने आए लोग भी नाराज दिखे। स्पोर्ट्स स्टेडियम से पांच-सात लोगों को उनके रिश्तेदारों के सुपुर्द भी किया गया। नंबर व पता बताने पर टीम ने इनके स्थानीय मददगारों को बुलाया। बाहरी युवकों का मेडिकल चेकअप करने के बाद रिश्तेदारों से कहा गया कि 14 दिन तक इन्हें घर पर रखें।

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बता दें कि जनपद में कोरोना संक्रमण रोकने की व्यवस्थाओं के लिए सरकार द्वारा नामित प्रभारी मंत्री यशपाल आर्य ने सोमवार दोपहर सर्किट हाउस में जिला एवं पुलिस प्रशासन के साथ ही स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। मंत्री आर्य ने निर्देश दिए कि बाहर से आ रहे लोगों को अनिवार्य रूप से क्वारंटाइन कराया जाए। गांवों में बाहर से आने वाले लोगों को चिह्नित किया जाए और उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जाए।

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