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उदयपुर/ दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा का युवाओं से आह्वान- अपराजित पौरुष के धनी बनें युवा, भविष्य के भारत के लिए विकल्प तय करें

संजीवनी टुडे 15-02-2020 16:11:18

ओजस्वी वक्ता दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा ने युवाओं का आह्वान किया है कि वे अपराजित पौरुष के धनी बनें। वे अपनी दैहिक और मानसिक दुर्बलताओं को यह कहें कि आज नहीं कल आना।


उदयपुर। ओजस्वी वक्ता दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा ने युवाओं का आह्वान किया है कि वे अपराजित पौरुष के धनी बनें। वे अपनी दैहिक और मानसिक दुर्बलताओं को यह कहें कि आज नहीं कल आना। दीदी मां शनिवार को यहां उदयपुर के हिरण मगरी सेक्टर-4 स्थित विद्या निकेतन स्कूल के वैद्य भागीरथ जोशी सभागार में युवाओं को संबोधित कर रही थीं। ‘राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका’ पर भारतीय संस्कृति अभ्युत्थान न्यास के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में किशोर और तरुण वय के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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साध्वी ऋतम्भरा ने उनसे कहा कि जिंदगी हर समय सभी को दो विकल्प देती है। आज जो हमारे पास है उसका विकल्प हमने कल चुना था और हमें जिस तरह का आने वाला कल चाहिए, उसके लिए विकल्प आज चुनना होगा। यही विकल्प हमारा भाग्य निर्धारित करता है। उन्होंने कहा कि भगत सिंह, वीर सावरकर, शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा आदि महापुरुषों ने अपने कल के लिए विकल्प तय किया था कि उन्हें क्या करना है। शहीद बत्रा कह कर गए थे कि या तो तिरंगा फहराकर आऊंगा या तिरंगे में लिपटकर आऊंगा। उन्होंने युवाओं से कहा कि भविष्य के भारत के लिए आज के युवा को विकल्प तय करना होगा। 

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भारत भविष्य में भी भारत ही रहना चाहिए। भारत की भूमि और भारत की भूमिका विश्व पटल पर स्थापित होनी चाहिए। इसके लिए युवाओं को व्यसन और वासना को छोड़ अपराजित पौरुष का धनी बनना होगा। भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे सुरों का दमन करने का साहस पैदा करना होगा। दिल में देशभक्ति का अमृत पैदा करना होगा। जाति, पार्टी, सम्प्रदाय, पंथ से ऊपर उठकर भारतीय होने का संकल्प लेना होगा। 

साध्वी ऋतम्भरा ने यह भी कहा कि यदि यह समझ में नहीं आए कि देश के लिए हम किस तरह योगदान कर सकते हैं तो इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा रूपी टकसाल में जाना, वहां से देश के लिए कार्य करने की दिशा मिल जाएगी। दीदी मां ने ‘सिलसिला ये बाद मेरे यूं ही चलना चाहिए, मैं रहूं या ना रहूं भारत यह रहना चाहिए’ गीत गाते हुए युवाओं को भारतीय होने का संकल्प दिलाया। 

साध्वी ऋतम्भरा ने बेटियों को संबोधित करते हुए कहा कि लाज और शील से खूबसूरती बढ़ती है। पूरे वर्ष में मां लक्ष्मी का पूजन एक बार किया जाता है, लेकिन मां पार्वती की पूजा नित होती है। मां पार्वती तपश्चर्या का प्रतीक हैं और एक बेटी जो मां होती है, बहन होती है, बहू होती है, सास होती है उसके लिए परिवार को बांधे रखना, संस्कारित करना उसकी तपश्चर्या है। इससे पूर्व, कार्यक्रम का आरंभ वंदे मातरम के गायन से हुआ। भारतीय संस्कृति अभ्युत्थान न्यास के सचिव दामोदर श्रीमाल व सदस्य ललित इंद्रावत ने दीदी मां का स्वागत-अभिनंदन किया। ‘उठो जवानों हम भारत के स्वाभिमान सरताज हैं, अभिमन्यु के रथ का पहिया चक्रव्यूह की मार है’ काव्यगीत दर्शन ने प्रस्तुत किया। 

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