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दिल्ली हिंसा मामले में पिंजरा तोड़ संगठन से जुड़ी दो महिलाएं पुलिस रिमांड पर

संजीवनी टुडे 25-05-2020 16:55:37

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में दो महिला कार्यकर्ताओं को पहले एक मामले में जमानत दे दी।


नई दिल्ली। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में दो महिला कार्यकर्ताओं को पहले एक मामले में जमानत दे दी। उसके बाद एक दूसरे मामले में दो दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। ये दोनों महिलाएं पिंजरा तोड़ संगठन से जुड़ी हुई हैं।

दरअसल दिल्ली पुलिस ने नताशा नरवाल और देवांगन कलिता को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के मामले में दर्ज एफआईआर के मामले में ड्यूटी मजिस्ट्रेट अजीत नारायण के समक्ष पेश किया। पुलिस ने कोर्ट से कहा कि दोनों राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं, इसलिए दोनों की हिरासत में लेकर पूछताछ की जरुरत है।

नरवाल और कलिता के वकीलों अदीत एस पुजारी और तुषारिका मट्टू ने पुलिस हिरासत की मांग का विरोध किया और कहा कि ये सभी आरोप जान-बूझकर फंसाने के लिए लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि एफआईआर 24 फरवरी को दर्ज किए गए थे और दोनों अभियुक्त जांच में सहयोग कर रहे हैं, इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपितों के खिलाफ धारा 353 की गैर-जमानती धारा के तहत एफआईआर दर्ज किया गया है। लेकिन प्रथम दृष्टया धारा 353 के तहत मामला नहीं बनता है। कोर्ट ने दोनों को जमानत दे दिया।

जमानत देने के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नरवाल और कलिता को एक दूसरे एफआईआर के मामले में गिरफ्तार कर लिया। उस एफआईआर में हत्या और हत्या की कोशिश के तहत मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि दोनों आरोपितों ने अपने बयान में इस एफआईआर में भी अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। उसके बाद क्राइम ब्रांच ने दोनों की 14 दिनों की पुलिस हिरासत की मांग की। क्राइम ब्रांच ने कहा कि दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है। दोनों के वकीलों ने क्राइम ब्रांच की इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि ये एफआईआर झूठा है। उसके बाद कोर्ट ने दोनों महिलाओं को दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

दोनों पर आरोप है कि उन्होंने पिछली 22 फरवरी को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास सड़क जाम करने के लिए लोगों को उकसाया था। उल्लेखनीय है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 200 लोग घायल हो गए थे।

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