संजीवनी टुडे

बंगाल में भाजपा के खिलाफ एकजुट हो रही तृणमूल, माकपा और कांग्रेस

संजीवनी टुडे 01-07-2019 16:54:41

पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में भाजपा के खिलाफ कांग्रेस और माकपा को तृणमूल के साथ एकजुट होने अपील की थी।


कोलकाता। पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में  भाजपा के खिलाफ कांग्रेस और माकपा को तृणमूल के साथ एकजुट होने अपील की थी। हालांकि उस समय माकपा और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को दरकिनार कर स्पष्ट कर दिया था कि वह तृणमूल के साथ कभी भी काम नहीं करेंगे। लेकिन अब विधानसभा में इन तीनों पार्टियों के बीच आपसी सहमति बनती दिख रही है। सोमवार को राज्य विधानसभा में कांग्रेस, माकपा और तृणमूल के विधायकों ने एक सुर में भाजपा के खिलाफ जमीनी तौर पर आंदोलन की बात कही है। 

दरअसल राज्य भर में कथित सांप्रदायिक माहौल को लेकर विधानसभा में चर्चा हो रही थी। उस दौरान तृणमूल विधायक असित मजूमदार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अजीब तरह का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और नफरत का माहौल बनता जा रहा है। पहले मेरे क्षेत्र में ऐसा कभी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि 70 के दशक में पश्चिम बंगाल में नक्सल आंदोलन हुआ था, तब पूरे राज्य का माहौल हिंसक था। तब हमलोग छात्र थे लेकिन तब भी राज्य भर में इस तरह का हिंसक माहौल नहीं था। 

असित ने कहा कि भाजपा राज्य भर में हिंसक माहौल बना रही है। इसके खिलाफ आंदोलन की जरूरत है। असित के इस बयान के खिलाफ भाजपा विधायक दल के नेता मनोज टिग्गा सदन के पटल पर खड़े हुए और नाराजगी जताई। इस बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक अब्दुल मन्नान ने कहा कि पश्चिम बंगाल की अपनी अपनी संस्कृति है। अतीत में बंगाल के मनीषियों ने सर्वधर्म समभाव की बातें की है लेकिन आज हालात बदतर बन गए हैं। राजनीतिक विचारधारा की वजह से लोगों की हत्याएं हो रही हैं। धर्म की वजह से लोगों को मारा-पीटा जा रहा है। 

राज्य भर में इस तरह की घटनाएं प्रकाश में आने लगी हैं। यह परिस्थिति बंगाल को बदहाली की ओर ले जाने वाली है। मुझे विश्वास है कि ऐसी परिस्थिति में राज्य में विपक्ष के सारे नेता एकजुट होकर काम करेंगे। सांप्रदायिक घटनाओं में राज्य सरकार को ठोस कानूनी कार्रवाई करने की जरूरत है। ऐसे समय में लोगों को भी एकजुट रहने की जरूरत है। हमलोग सरकार के साथ खड़ा रहेंगे। मन्नान के बयान के खिलाफ भाजपा विधायक स्वाधीन सरकार ने नाराजगी जतानी शुरू कर दी थी लेकिन तब सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों ने उन्हें बोलने नहीं दिया। 

इसके बाद सदन में माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती खड़े हुए। उन्होंने कहा कि दिल्ली और झारखंड में मजहब की वजह से लोगों की पीट-पीटकर हत्या की गई थी। अब पश्चिम बंगाल में भी इसकी छाया पड़ने लगी है। इसके खिलाफ एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पहले कैनिंग में मदरसा शिक्षक को मारपीट कर ट्रेन से उतार दिया गया। अतीत में ऐसा कभी नहीं होता था। यह शर्म की बात है। इसके खिलाफ हमलोग एकजुट हैं। 

इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी ने कहा कि आप लोग लिखित में इसका प्रस्ताव दीजिए। मैं इसकी जांच कराउंगा। इसके बाद शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी खड़े हुए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस संबंध में चिंता जाहिर की है। विधानसभा अधिवेशन की धारा 185 के अनुसार इस मामले पर चर्चा की जा सकती है। मैं विपक्ष से अपील कर रहा हूं कि इस मामले पर हम लोगों के साथ खड़े रहिए। 

केंद्र की भाजपा सरकार पर इशारे-इशारे में बंगाल में भी सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप लगाते हुए पार्थ ने कहा कि हमें जबरदस्ती दबाया नहीं जा सकता। हमलोग अलग-अलग विचारधारा के हो सकते हैं लेकिन धर्म के आधार पर भेदभाव  नहीं होने देंगे। पार्थ चटर्जी के इस बयान के बाद ना तो सुजन चक्रवर्ती और ना ही अब्दुल मन्नान ने किसी तरह का कोई विरोध किया। 

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