संजीवनी टुडे

विधानसभा की रणनीति बनाने में जुटी तृणमूल, ममता ने संभाला मोर्चा

संजीवनी टुडे 30-05-2019 13:42:56


कोलकाता। लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में शानदार बढ़त हासिल की है। राज्य की 42 में से 18 सीटों पर भगवा लहर को देखते हुए राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने खुद ही राज्य में चुनावी मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। गुरुवार को एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शपथ लेंगे तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उत्तर 24 परगना के नैहाटी नगरपालिका के सामने धरने पर बैठेंगी। इसके अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में भी मुख्यमंत्री का दौरा प्रस्तावित किया जा रहा है।

 पार्टी सूत्रों ने बताया है कि मुख्यमंत्री सबसे पहले उत्तर बंगाल के दौरे पर जाएंगी। यहां से भारतीय जनता पार्टी को शानदार बढ़त मिली है और तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ लोगों ने गुस्सा जाहिर किया है। इसलिए वहां पहुंचकर जन आकांक्षा को समझने के लिए मुख्यमंत्री बैठक कर सकती हैं। पार्टी के प्रभारी नेताओं को भी उन्होंने हार का रंज भूलकर पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता के बीच संवाद स्थापित करने का निर्देश दिया है।
 
दरअसल लोकसभा चुनाव के बाद बड़ी संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता भारतीय जनता पार्टी की ओर मुड़ गए हैं। बड़े से बड़े नेता ममता का साथ छोड़कर भाजपा में जा रहे हैं। 2009 में जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल के सांसदों की संख्या तत्कालीन वाममोर्चा की सरकार से ज्यादा हो गई थी तब बीरभूम जिले के तृणमूल विधायक मोनिरुल इस्लाम ने माकपा के हजारों नेताओं और कार्यकर्ताओं को कल, बल और छल से तृणमूल कांग्रेस में शामिल कराया था। 2011 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने पूरे जिले का रुख तृणमूल के पक्ष में मोड़ दिया था और अब वह भाजपा में शामिल हो गए हैं। बुधवार को ही कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें पार्टी का झंडा थमाया था जिसके बाद एक बार फिर जिले में उथल-पुथल मची हुई है।

 अलीपुरद्वार, कूचबिहार, पुरुलिया और बांकुड़ा में तृणमूल कांग्रेस को करारी हार मिली है। जबकि 2011 में जब ममता बनर्जी सत्ता पर आई थी तब इन जिलों से उन्हें सबसे अधिक समर्थन मिला था। एक तरह से देखा जाए तो जो राज्य में सत्ता परिवर्तन का संकेत लोकसभा चुनाव का परिणाम दे गया है। तब तत्कालीन सरकार ने ममता बनर्जी को नजरअंदाज किया था और अब ममता बनर्जी वह गलती नहीं दोहराना चाहतीं। इसलिए मुख्यमंत्री खुद मैदान में उतारकर जनता और नेतृत्व के बीच संवाद स्थापित करने में जुट गई है।

 पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि तृणमूल कांग्रेस नेताओं को उन सभी क्षेत्रों का दौरा करने का निर्देश दे दिया गया है जहां पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा है। पार्टी की सबसे बुरी दशा उत्तर 24 परगना में है। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तृणमूल सुप्रीमो अपने उन कार्यकर्ताओं के समर्थन में धरने पर बैठने वाली हैं जो चुनाव के दौरान हिंसा की वजह से बेघर हो गए हैं।  जिस इलाके में प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है, वहां के ज्यादातर पार्षद बीजेपी में शामिल हो गए हैं। नैहाटी के 31 में से 29 पार्षदों ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। चुनाव नतीजों के बाद से बीजेपी लगातार तृणमूल के कुनबे में सेंधमारी कर रही है। तृणमूल के चार विधायक भी बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।

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