संजीवनी टुडे

जो क्रिया व बात स्वयं को दुःखी करे,वह दूसरे के साथ नहीं करें,आदिशक्ति करती हैं सभी इच्छाओं की पूर्ति: छोटे बापू

संजीवनी टुडे 22-02-2019 13:56:14


बिहटा। बिहटा में चल रहा श्रीमद्देवीभागवत कथा ज्ञान महायज्ञ में अयोध्या धाम के राष्ट्रीय संत छोटे बापू ने कहा कि समस्त इच्छओं की पूर्ति मां आदिशक्ति करती हैं। महावीर व कृष्ण नगर के संयुक्त तत्वावधान में 18 से शुरू इस संगीतमय कथा के 5 वें दिन उन्होंने कहा कि पुत्र प्राप्ति की कामना लेकर व्यास जी ने भगवान शिवशक्ति की तपस्या की जिससे उन्हें सुुखदेव पुत्र रूप में प्राप्त हुए।

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महर्षि वेद व्यास जी ने गृहस्थ आश्रम की महिमा बताते हुए अपने पुत्र को विवाह करने को कहा।जब उन्हें श्रीमद्देवीभागवत का ज्ञान आया तो कहा कि गृहस्थ जीवन बंधन रूप है,इस माया से बचाने वाली योगमाया ही है। उसका स्मरण करते हुए वे महामाया की तपस्या में लीन हो गए।पुत्र के वैराग्य धारण करने से व्यास जी दुःखी हुए।वेद कहते हैं,आत्मानं प्रति कुलानि,परेशानं समाचरेत।जो क्रिया या बात स्वयं को दुखी करती है,वह व्यवहार दूसरों के साथ ना करें।

जब दूसरी घटी घटना अपने पर बीतती है तब उस पीड़ा का ज्ञान होता है।ऐसा ही व्यास जी के साथ हुआ।यमुना द्वीप में अपनी माता सत्यवती को छोड़कर आये तब उनको भी उतना ही कष्ट हुआ होगा।वे माता से मिलने गए।महाभारत ग्रंथ का भंडार है।जब श्री जनमेजय महाराज ने जाना कि मेरे पिता की मृत्यु तक्षक के काटने से होगी तब उन्होंने सर्प यज्ञ किया।

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उस समय व्यास जी ने समझाया कि इससे न तेरा नहीं तेरे पिता का कल्याण होगा क्योंकि यज्ञ के नाम पर इस प्रकार की हिंसा अवश्य ही दुखदायी होगी।अतः यज्ञ बंद करो।यज्ञ धर्म का महत्वपूर्ण अंग है।इसे सात्विक भावना से किया जाये तो कल्याण होगा।नहीं तो दक्ष यज्ञ के समान सबका अकल्याण होगा।यज्ञ के कई स्वरूप हैं।हवन यज्ञ,जप यज्ञ,ज्ञान यज्ञ।कलयुग में ज्ञान यज्ञ उत्तम है।यानी कथा श्रवण करना।अतः तुम भगवती का वांगमय स्वरूप श्रीमद् देवी भागवत सुनो कल्याण निश्चित है।

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