संजीवनी टुडे

कार्यकर्ता सम्मेलन में तार-तार हुई झामुमो की एकता, पूर्व विधायक समेत कइयों ने किया बहिष्कार

संजीवनी टुडे 31-12-2018 11:20:00


बोकारो। राजनीति पक्ष-विपक्ष दलों के बीच ही नहीं, खुद सियासी संगठनों के अंदर भी होती है और बोकारो में संभवतः ऐसा कोई राजनीतिक दल नहीं बचा, जिसमें अंदरुनी राजनीति से लेकर बगावती तेवर आम बात हो चुकी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की अंदरुनी बगावत चंदनकियारी में रविवार को खुलकर सामने आ गयी। मौका था झामुमो के चंदनकियारी प्रख्यकर्ता सम्मेलन का।

स्थानीय टाउन हाल में आयोजित इस सम्मेलन के शुरू होते ही प्रखण्ड अध्यक्ष के नाते दो कार्यकर्ताओं के गुट ने सम्मेलन की कमान संभालने के हक को लेकर काफी हल्ला मचाया गया। इस दौरान मौके पर मौजूद पार्टी के जिलाध्यक्ष हीरालाल माझी द्वारा प्रखण्ड अध्यक्ष के तौर पर गोराचांद महतो को अधिकृत रूप से स्वीकार करते हुए सम्मेलन की अध्यक्षता का अधिकार सौंपा गया। इससे क्षुब्ध होकर पार्टी के दूसरे कथित प्रखण्ड अध्यक्ष महाराज महतो के सहयोगी कार्यकर्ताओं ने पूर्व विधायक हारू रजवार के नेतृत्व में सम्मेलन का बहिष्कार कर दिया।

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वे कार्यक्रम-स्थल से बाहर निकल गये और उसी मैदान में क्षुब्ध कार्यकर्ताओं के साथ उनलोगों ने अपनी अलग बैठक शुरू कर की। इस दौरान पूर्व विधायक हारू रजवार ने कहा कि झामुमो आमजनो की पार्टी है, न कि शहरों में रहकर हुकूम चलाने वालों की। उन्होंने बताया कि जिला अध्यक्ष ने चंद्रपुरा में बैठकर चंदनकियारी का प्रखण्ड अध्यक्ष गोराचांद को बनाया था, जिसे यहां की झामुमो कार्यकर्ता स्वीकार नहीं किया तथा सर्वसम्मति से महाराज महतो को अपना अध्यक्ष चुना है। उन्होंने कहा कि पार्टी के एक पिता-पुत्र द्वारा बोकारो से लोगों को लाकर चंदनकियारी के झामुमो कार्यकर्ताओं पर दवाब और धौंस जमाकर नेतागिरी थोपी जा रही है। इसे कतई बर्दाश्त नही किया जायेगा। पार्टी में स्थानीय कार्यकर्ता को दरकिनार कर राजनीति नहीं होगी।

वहीं दूसरी जिला अध्यक्ष की मौजूदगी में हुए सम्मेलन के दौरान कथित तौर पर पार्टी-विरोधी कार्यों में लिप्त होने के कारण झामुमो नेता उत्तम दास व महाराज महतो को तीन वर्षों के लिए पार्टी की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया। साथ ही बादल भगत, सृष्टि रजवार, गोमेश सोरेन, बिरेन रजवार, अशोक दसौंधी समेत आधा दर्जन कार्यकर्ताओं को स्पष्टीकरण दिया गया।

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उन्होंने कहा कि समुचित जवाब नहीं मिलने की स्थिति में केंद्रीय कमिटी को रिपोर्ट की जाएगी। कुल मिलाकर रविवार की उक्त घटना ने झामुमो जैसे जमीनी कार्यकर्ता आधारित संगठन माने जाने वाले सियासी दल में गुटबाजी को स्पष्ट कर दिया, जो आने वाले दिनों में निश्चित तौर पर संगठन के लिये घातक संकेत है।

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