संजीवनी टुडे

भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला,पलायन का असर भी चुनाव परिणाम पर पड़ेगा

संजीवनी टुडे 15-05-2019 18:32:11


रतलाम। संसदीय चुनाव में अत्यधिक मतदान हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने भरपूर प्रयास किए हैं। सामाजिक संस्थाओं के साथ ही राजनैतिक दलों के कार्यकर्ताओं के सहयोग से यह प्रयास हुए हैं कि अधिक से अधिक मतदाता लोकसभा चुनाव में अपने मतों का उपयोग करें। इस बार भी संसदीय चुनाव में आदिवासियों के मत हारजीत में निर्णायक रहने वाले हैं। चूंकि आदिवासी क्षेत्र के अधिकांश लोग रोजगार की तलाश में मध्यप्रदेश गुजरात सहित अन्य राज्यों में पलायन कर जाते हैं, इसलिए मतदान के प्रतिशत पर उनका असर व्यापक रहता है। इस बार भी मोटे तोर पर अनुमान लगाया जा रहा है कि पूरे संसदीय क्षेत्र में मतदान  60- 70 प्रतिशत से अधिक नहीं रहेगा। 

रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में आगामी 19 मई को मतदान होना है। इस क्षेत्र की आठ विधानसभा क्षेत्रों में 18 लाख 36 हजार 839 मतदाता हैं, जिनमें 9 लाख 22 हजार 843 पुरूष तथा 9 लाख 13 हजार 967 महिलाएं तथा अन्य 29 है, जो 2,348 मतदान केंद्रों पर अपने मत का उपयोग करेंगे। कांग्रेस -भाजपा सहित 9 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। इस चुनाव में कोई लहर नहीं है, लेकिन फिर भी कांग्रेस की परम्परागत इस सीट पर काटे का मुकाबला है। ऊंट किस करवट बैठेगा, दावे के साथ नहीं कहा जा सकता। 

झाबुआ-रतलाम लोकसभा सीट पर सबसे पहले चुनाव 1951 में हुआ था। उस समय 2 लाख 28 हजार 086, उसके बाद 1957 में 2 लाख 36 हजार 181 मतदाताओं ने, 1962 में 2 लाख 52 हजार 480 मतदाताओं ने, 1971 में 3 लाख 18 हजार 64 मतदाताओं, 1980 में 3 लाख 11 हजार 279 मतदाताओं, 1989 में 4 लाख 38 हजार 986 मतदाताओं, 1991 में 4 लाख 81 हजार 187 मतदाताओं, 1996 में 5 लाख 57 हजार 358 मतदाताओं, 2004 में 6 लाख 61 हजार 613 मतदाताओं ने अपने मतदाधिकार का उपयोग ही नहीं किया था। इस सीट पर 50 प्रतिशत से अधिक मतदान 1967, 1977, 1984, 1998,1999, 2009 और 2014 में हुआ है। इसका मुख्य कारण ही पलायन है। अधिकांश युवा घर छोडकर रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों में चले जाते हैं। इसी कारण मतदान का प्रतिशत कभी भी अन्य संसदीय क्षेत्रों की तुलना में कम ही रहा है। प्रशासन कितना ही प्रयास कर ले लेकिन मतदान का प्रतिशत अधिक हो इसकी संभावना कम ही नजर आती है। 

80 प्रतिशत मतदाता आदिवासी है

जिले की तीन विधानसभा सीटे रतलाम ग्रामीण, रतलाम शहर तथा सैलाना विधानसभा क्षेत्र रतलाम- झाबुआ-अलीराजपुर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है, जिसमें झाबुआ-अलीराजपुर की पांचों विधानसभा आदिवासी सुरक्षित सीटे शामिल हैं। इन 8 विधानसभा को मिलकर बना इस संसदीय क्षेत्र में 7 सीटे आदिवासी है और इसके 80 प्रतिशत मतदाता आदिवासी है। अभी तक देश में 16 लोकसभा चुनाव संपन्न हुए, जिनमें मात्र तीन बार गैर कांग्रेसी उम्मीदवार चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे, बाकि हर बार कांग्रेस का परचम ही इस क्षेत्र में फहराया है। 

भाजपा 1914 की मोदी लहर में इस संसदीय क्षेत्र से सफल हुई थी, लेकिन दिलीपसिंह भूरिया के निधन से हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर डेढ़ साल बाद ही पुन:कब्जा कर लिया। उप चुनाव में दिवंगत दिलीपसिंह भूरिया की पूत्री को भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वह कांग्रेस उम्मीदवार कांतिलाल भूरिया से 88877 मतों से पराजित हो गई थी। 

इस बार फिजा बदलती नजर आ रही है 

18 लाख से अधिक मतदाता इस लोकसभा क्षेत्र में हैं और जिनमें अधिकांश मतदाता कांग्रेस के समर्थक ही माने जाते हैं, लेकिन इस चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी का असर नजर आ रहा है। इसके कारण इस संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा के बीच काटे की टक्कर होने की पूरी संभावना है। भाजपा ने झाबुआ के विधायक गुमानसिंह डामर को मैदान में उतारा है, जिन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार कांतिलाल भूरिया के पुत्र विक्रांत भूरिया को गत विधानसभा चुनाव में 10 हजार से अधिक मतों से पराजित किया। डामोर ने यह चुनाव जीतकर लोगों को आश्चर्य में डाल दिया था। पार्टी ने उन पर विश्वास कर लोकसभा का उम्मीदवार बनाया है, जो अपनी कुशल रणनीति के कारण और प्रशासनिक अनुभव के कारण चुनाव की फिजा बदलने में होशियार नजर आ रहे हैं, इसलिए भी यह सीट कांटे की बताई जा रही है।  

अब तक यह उम्मीदवार इस सीट पर चुनाव जीते

रतलाम झाबुआ लोकसभा सीट पर पहला चुनाव 1957 में हुआ तथा इस सीट पर पहले सांसद बनने का गौरव कांग्रेस के अमरिसंह के नाम है। इस चुनाव में अरमसिंह ने जनसंघ के नाथूसिंग को 41596 वोट से हराया था। 1962 के चुनाव में जमुनादेवी ने जेएस के गट्टू को 22384 से, 1967 में कांग्रेस के सूरसिंह ने सादीबाई एसएमपी को 28385 से, 1971 में एसएमपी के भागीरथ भंवर ने कांग्रेस के सुरसिंग को 26593 से, 1977 में भागीरथ भंवर ने बीएलडी से चुनाव लड़कर कांग्रेस के दिलीपसिंह भूरिया को 62672 से, 1980 में कांग्रेस के दिलीपसिंह भूरिया ने जेएनपी की जमुनादेवी को 90136 मतों से, 1984 में कांग्रेस के दिलीपसिंह भूरिया  ने भाजपा के भगवानसिंह चौहान को 134532 से, 1989 में कांग्रेस के दिलीपसिंह भूरिया ने भाजपा के भगवानसिंह चौहान को 116957 से, 1991 में कांग्रेस के दिलीपसिंह भूरिया ने भाजपा की रेलम चौहान को 134402 से, 1996 में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने भाजपा के दिलीपसिंह भूरिया को 82375 से, 1999 में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने भाजपा के दिलीपसिंह भूरिया को 149377 से, 2004 में  कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने भाजपा की रेलम चौहान को  80282 से, 2009 में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने भाजपा के दिलीपसिंह भूरिया को  57668 से, 2014 में भाजपा के दिलीपसिंह भूरिया ने कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया को 108447 से पराजित किया तथा  2015 के उपचुनाव में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने भाजपा की निर्मला भूरिया को 88832 मतों से पराजित कर इस सीट पर पुन: कब्जा किया।

कांग्रेस नेता कांतिलाल भूरिया 7वीं बार मैदान में 

रतलाम-झाबुआ सीट पर कांग्रेस की नेत्री जमुनादेवी ने कांग्रेस और जेएनपी दोनों से भाग्य आजमाया, जिसमें वे कांग्रेस से विजयी रही, जबकि जेएनपी से उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। भागीरथ भंवर ने इस सीट पर लगातार दो बार अलग पार्टी से विजयश्री प्राप्त की तो दिलीपसिंह भूरिया ने कांग्रेस से 4 और भाजपा से एक बार विजयी रहे। कांग्रेसी नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने इस सीट पर 6 बार भाग्य आजमाया, जिसमें 5 बार विजयी रहे और वर्तमान में इस सीट पर वे सांसद के रूप में काबिज है।

मात्र 240000/- में टोंक रोड जयपुर में प्लॉट 9314166166

विकास कही धरातल पर नजर नहीं आता

फिलहाल इस संसदीय क्षेत्र में बेरोजगारी इस चुनाव में भी मुख्य मुद्दा रहेगी, वहीं बांसवाड़़ा-डुंगरपुर तथा इंदौर-दाहोद रेलवे लाईन क्षेत्र के नागरिकों की वर्षों पुरानी मांग है। रोजगार धंधे का अभाव इस संसदीय क्षेत्र में होने के कारण ही आदिवासी पलायन करते है, हालांकि हर सरकार लोगों को रोजगार का सपना दिखाती है, विकास की बात कहती है,लेकिन वह धरातल पर कही नजर नहीं आता। कांग्रेस वर्षों से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही है, लेकिन जिस विकास की लोगों को अपेक्षा है वह पूरी नहीं कर पाई। कई सिंचाई योजनाएं, रेल योजनाएं, उद्योग, धंधे जो प्रारंभ होना थे वह नहीं हो पाए। रतलाम क्षेत्र के नागरिक भी उनके कार्यकलापों से खुश नहीं रहे। उनका आरोप है कि वे केवल झाबुआ, अलीराजपुर की ओर ही ध्यान दे रहे हैं, रतलाम जिले की ओर उनका ध्यान नहीं। उसके पीछे यह भी कारण बताया जाता है कि उन्हें जितना समर्थन झाबुआ,अलीराजपुर से मिलता है उतना समर्थन रतलाम जिले से नहीं मिल पाता। यही कारण है कि उनका झुकाव झाबुआ की ओर है। 

विधानसभा में किसको कितने मत मिले

रतलाम-झाबुआ-अलीराजपुर संसदीय क्षेत्र के आठों विधानसभा क्षेत्रों में दिसंबर 18 को हुए निर्वाचन में रतलाम शहर,रतलाम ग्रामीण तथा झाबुआ विधानसभा क्षेत्र भाजपा के खाते में गई थी, जबकि अलीराजपुर, जोबट, थांदला, पेटलावद,सैलाना  कांग्रेस के खाते में गई थी।  रतलाम शहर में 1,97,753 मतदाताओं में से 71.82 प्रतिशत मतदाताओं ने मत डाले, इनमें भाजपा के चेतन्य काश्यप को 91986 एवं कांग्रेस की प्रेमलता दवे को 48551 मत मिले। 43,435 मतों से यहां भाजपा जीती थी। रतलाम ग्रामीण में 1,89,400 मतदाताओं में से 85.10 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया, इसमें भाजपा के दिलीप मकवाना को 79806 और कांग्रेस के थावरलाल भूरिया को 74201 मत मिले थे। यहां भाजपा 5605 मतों से विजयी हुई । सैलाना में 1,84,827 मतदाताओं में से 88.35 प्रतिशत  लोगों ने मतदान किया, इनमें कांग्रेस के हर्ष गेहलोत को 73,597 और भाजपा के नारायण मईड़ा को 45099 मत मिले। 28,498 मतों से यहां कांग्रेस चुनाव जीती। 

जबकि अलीराजपुर जिले के अलीराजपुर विधानसभा सीट में 2,22,652 मतदाताओं में से 69.49 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। यहां कांग्रेस के मुकेश रावत को 82017 मत मिले थे। वहीं भाजपा के नागरसिंह चौहान को 60055 मत मिले। 21 हजार 962 मतों से यहां कांग्रेस जीती। जोबट विधानसभा में 2,60,569 मतदाताओं मे से 52.21 मतदाताओं ने अपने मत का उपयोग किया, यहां कांग्रेस की कलावती भूरिया को 46067 और भाजपा के माधवसिंह को 44011 मत मिले। कांग्रेस 2056 वोटों से जीती। झाबुआ में 2,70,254 मतदाताओं में से 64.55 मतदाताओं ने मत डाले। यहां भाजपा के जी.एस.डामोर जो वर्तमान में लोकसभा के भाजपा उम्मीदवार है उन्हें 66,598 मत मिले, वहीं वर्तमान कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया के सुपुत्र विक्रांत भूरिया को 56,161 मत मिले। यहां भाजपा 10,437 मतों से जीती। 

प्लीज सब्सक्राइब यूट्यूब बटन

पेटलावद विधानसभा क्षेत्र में 2,47,551 मतदाताओं में से 79.77 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। कांग्रेस के बालसिंग मईड़ा 93425 एवं भाजपा की निर्मला को 88,425 मत मिले। 5 हजार मतों से कांग्रेस विजयी रही।  थांदला विधानसभा में 2,29,716 मतदाताओं में से 86.77 मतदाताओं ने मतदान किया। यहां विरसिंह भूरिया कांग्रेस को 95,720 और भाजपा के कलसिंह भाभर को 64,569 मत मिले। यहां कांग्रेस 31 हजार 151 मतों से चुनाव जीती थी।  कांग्रेस को सैलाना, अलीराजपुर, थांदला में जोरदार बड़त मिली थी। वहीं भाजपा को केवल रतलाम में ही बड़त मिली। ऐसे में यह चुनाव काफी दिलचस्प होंगे।   
 

More From state

Trending Now
Recommended