संजीवनी टुडे

चुटकी भर नमक ने हिलाकर रख दी थी अंग्रेजी साम्राज्य की नींव

संजीवनी टुडे 17-04-2019 15:45:29


बेगूसराय। बिहार केसरी डॉ श्री कृष्ण सिंह के 1930 में गढ़पुरा में नमक सत्याग्रह की 89 वर्षगांठ पर आयोजित गौरव यात्रा का बेगूसराय की सीमा में प्रवेश करते ही जबरदस्त स्वागत किया गया। श्री कृष्ण सेवा सदन ,मुंगेर से चला गढ़पुरा नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा का जत्था नाव से गंगा पार कर बेगूसराय जिले की सीमा में साहेबपुर कमाल प्रखंड के श्रीनगर गांव पहुंचा। वहां तिरंगा झंडा के साथ वंदे मातरम् की धुन पर यात्रियों का जोरदार स्वागत किया गया। यहां पर नुक्कड़ सभा के बाद श्रीबाबू के कृतित्व से सजे रथ के साथ पदयात्रियों का जत्था अगले पड़ाव की ओर प्रस्थान कर गया। इसके बाद छर्रापट्टी में समाजवादी नेता पूर्व सांसद रामजीवन सिंह समेत सैकड़ों लोगों ने पदयात्रा में शामिल लोगों का स्वागत किया।

इस मौके पर है रामजीवन सिंह ने कहा कि चुटकी भर नमक ने आजादी की नींव का पत्थर रखने का काम किया था। बिहार केसरी डॉ श्री कृष्ण सिंह ने खौलते कड़ाह में घायल होने के बाद भी नमक बनाकर अंग्रेज हुकूमत के ताबूत में कील ठोंकी थी। यहां उनकी प्रतिमा स्थापित करने में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि 1929 में जब गांधी जी नमक सत्याग्रह शुरू कर रहे थे तो कांग्रेस के तत्कालीन प्रेसिडेंट जवाहरलाल नेहरू ने पोस्ट कार्ड पर लिखा था 'बापू चुटकी भर नमक से क्या आजादी मिलेगी? जवाब में गांधी जी ने उसी पोस्ट कार्ड पर लिख दिया था 'जरा इसे करके तो देखो।'

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बाद में जब गांधी जी ने नमक सत्याग्रह कर अंग्रेजी हुकूमत को हिला दिया तो मोतीलाल नेहरू ने जेल से लिखा था 'चुटकी भर नमक में इतना बारूद छिपा है कि अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिला दिया।' यहां से चलने के बाद रास्ते में शालीग्रामी, मल्हीपुर, खरहट, पचवीर, सनहा समेत दर्जनों जगह सड़क किनारे खड़े होकर लोगों ने पदयात्रियों का जोरदार स्वागत किया है। बुधवार को बलिया में रात्रि विश्राम के बाद जत्था बेगूसराय की ओर प्रस्थान करेगा। गुरुवार को बेगूसराय, शुक्रवार को मोहनपुर तथा शनिवार को रजौड़ में रात्रि विश्राम करते हुए 21 अप्रैल को सभी लोग गढ़पुरा स्थित नमक सत्याग्रह स्थल पर पहुंचेंगे तथा समापन होगा। 

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बता दें कि अंग्रेजों द्वारा नमक पर टैक्स लगाए जाने के बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देशवासियों से इस काले कानून का विरोध करने का आह्वान किया था। उन्होंने अपने अनुयायियों के साथ दांडी मार्च किया था। महात्मा गांधी के आह्वान का असर बिहार में भी दिखा। मुंगेर जिला परिषद के तत्कालीन उपाध्यक्ष डॉ श्रीकृष्ण सिन्हा इस कानून का विरोध करने का संकल्प कष्टहरनी घाट मुंगेर में गंगा में प्रवेश कर किया था। जिसके बाद मुंगेर जिला में नमक कानून के विरोध में नमक बनाने के लिए गढ़पुरा का चयन किया गया तथा डॉ श्री कृष्ण सिंह जत्था के साथ 17 अप्रैल 1930 को पैदल ही गढ़पुरा की ओर चल दिए। रास्ते में लोगों का कारवां बनता गया और 20 अप्रैल की शाम सभी लोग गढ़पुरा पहुंचे। 21 अप्रैल को अंग्रेज फौजी के कड़े पहरे के बावजूद नमक बनाया गया। अंग्रेज सिपाहियों ने धक्का-मुक्की की जिससे डॉ श्री कृष्ण सिंह खौलते कड़ाह में गिर गए। उन्हें गिरफ्तार कर हजारीबाग जेल भेज दिया गया लेकिन गढ़पुरा में नमक बनता रहा। इस ऐतिहासिक स्थल को स्वतंत्रता सेनानी राम नारायण सिंह ने बचाए रखा। इसके बाद 2012 से नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा समिति के बैनर तले पदयात्रा की शुरुआत हुई। संगठन के महासचिव राजीव कुमार, सचिव मुकेश कुमार एवं कोषाध्यक्ष सुशील कुमार सिंघानिया कहते हैं कि इस ऐतिहासिक सत्याग्रह की भूमि की अक्षुण्णता बनाए रखना गौरव यात्रा का उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि मुंगेर से गढ़पुरा तक की यह 80 किलोमीटर की यात्रा देश की सबसे लंबी यात्रा है। 

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