संजीवनी टुडे

दुनिया भर में धुम मचाने को तैयार हुआ बंचारी लोक नृत्य का नया फार्मेट : राज नेहरू

संजीवनी टुडे 15-02-2020 17:45:56

बंचारी गांव जाकर हमने वहां के 800 लोक गीतों का एक लोक ग्रंथ तैयार किया है।


फरीदाबाद। श्री विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय दूधौला के कुलपति राज नेहरू ने कहा कि एक नगाड़े और झांझ के साथ लुप्तप्राय होती जा रही बंचारी की लोक कला को सहेजने के लिए हमने एक नया प्रयास किया है। बंचारी गांव जाकर हमने वहां के 800 लोक गीतों का एक लोक ग्रंथ तैयार किया है। इन लोक गीतों से विश्वविद्यालय में एक वर्ष का  कोर्स तैयार किया और अब 50 बच्चे इस कोर्स को पूरा कर बंचारी के इस संगीत से पूरी दुनिया में धूम मचाने को तैयार हैं। नेहरू शनिवार को सूरजकुंड मेला परिसर स्थित मीडिया सेंटर में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। राज नेहरू ने कहा कि हम संगीत के जरिये देशों की सीमाएं तोड़ रहे हैं और दिलों को जोडऩे का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के समय से चली आ रही इस बंचारी लोक कला पर अभी तक किसी ने ध्यान नहीं दिया था। 

हमने एक वर्ष का जो कोर्स तैयार किया, उसमें बंचारी के इन कलाकारों को शास्त्रीय संगीत, आधुनिक वाद्य यंत्रों और संगीत से जुड़़ी कई अन्य बारीकियां सिखाई। इसका उद्देश्य इनके संगीत को विदेशों और बड़े कार्यक्रमों में प्रस्तुती का ढंग सिखाया। उन्होंने बताया कि सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में इन कलाकारों ने जब युगांड़ा के ड्रम के साथ अपनी प्रस्तुती दी तो कला व कलाकारों का नया रूप निखर कर सामने आया। पत्रकारों से बातचीत में नेहरू ने कहा कि बंचारी के इन कलाकारों को पहले 400 से 500 रुपये मिलते थे, लेकिन अब इन्हें प्रतिदिन एक हजार से 1500 रुपये मेहनताना मिल रहा है, जिस बंचारी को कोई नहीं पूछता था आज उसी में आजीविका कमाने का मौका मिला है।

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