संजीवनी टुडे

धर्म नगरी में लगा ऐतिहासिक गधा मेला, 55 हजार में सलमान तो 51 में बिका शाहरुख

संजीवनी टुडे 08-11-2018 15:22:00


चित्रकूट। भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में मुगल शासक औरंगजेब द्वारा शुरू की गई गधा मेले के आयोजन की परम्परा आज भी जीवंत है। दीपदान के दूसरे दिन चित्रकूट में लगने वाले विश्व के इस सबसे बड़े गधे मेले में देश भर से गधों-खच्चरों के खरीददारों का जमावड़ा लगता है। इस वर्ष भी सर्वाधिक डिमांड शाहरूख, सलमान और रणवीर नाम के गधों और दीपिका, कटरीना और अनुष्का नाम की गधी-खच्चरों की रही। मेले में जहां शाहरुख 51 हजार में बिका तो सलमान नाम का गधा 55 हजार में खरीदा गया।

धर्मनगरी चित्रकूट में मुगल शासक औरंगजेब के जमाने से ही गधा-खच्चर मेले का आयोजन हो रहा है। रामघाट स्थित प्राचीन स्वामी मत्यगयेंद्र नाथ मंदिर के पुजारी विपिन द्विवेदी एवं प्रमुख संत वरूण दास महाराज आदि बताते हैं कि जब मुगल शासक औरंगजेब ने चित्रकूट के मंदिरों पर हमला करने के लिए मंदाकिनी किनारे डेरा जमाया था, तभी से दीपावली मेले के दूसरे दिन गधा मेला के आयोजन की परम्परा शुरू हुई थी। इस ऐतिहासिक मेले में सुदूर क्षेत्र के हर वर्ग के लाखों लोग एकत्र होते हैं। इस मेले से गधा व्यापारियों को एक ही स्थान से व्यापार करने के लिए मौका मिलता है।
 
गुरुवार को मंदाकिनी तट पर आयोजित गधा-खच्चर मेले में छत्तीसगढ़, मप्र, हिमाचल प्रदेश, यूपी, बिहार आदि प्रांतों से सैकड़ों व्यापारी एकत्र हुए। अपने गधे-खच्चरों को नहला-धुला कर रंग-रोगन कर सजाकर बिक्री के लिए तैयार किया गया। कुछ व्यापारियों ने फिल्मी हीरो-हिरोइन के नाम पर उनके नाम भी रखे थे। छत्तीसगढ़ के ओमप्रकाश प्रजापति के सलमान खान नामक गधे की कीमत सबसे ज्यादा आंकी गई, यह गधा 55 हजार का बिका। इसी प्रकार हीरोइनों के नाम की गधी-खच्चर की कीमत 20 से 25 हजार तक आंकी गई। इन्हीं नस्ल के गधे-खच्चर पिछले साल 55 से 60 हजार तक बिके थे। इस बार अधिकतम बोली 55 तक ही पहुंची। ज्यादातर खरीददार महंगे दाम वाले मवेशी खरीदने से कतराते रहे। 

सतना के व्यापारी हरीप्रकाश ने बताया कि अब छोटे वाहनों के चलने से गधे-खच्चर का महत्व कम हो रहा है। इस व्यापार से जुड़े लोग दूसरे धंधे अपना रहे हैं। सिर्फ ऊंचाई वाले और संकरी गलियों में मिट्टी गिट्टी, बालू ईंट ढोने के लिए ही कई स्थानोें पर इनका उपयोग होता है। यहां हिमाचल प्रदेश और झांसी के कई खरीददार आते हैं। हालांकि गधा-खच्चर शारीरिक रूप से मजबूत और हर मौसम में बेहतर काम करने की क्षमता होने के कारण उपयोगी होते हैं। फतेहपुर, कानपुर देहात, रींवा, शंकरगढ़ और इलाहाबाद के गधे व्यापारी भोला प्रसाद कुशवाहा और अशोक गुर्दवान आदि व्यापारी बताते हैं कि मनोरंजन के लिए गधे-खच्चर के नाम फिल्मी सितारों के नाम रखते हैं। इन मवेशियों को बचपन से पालने और मजबूत बनाने के लिए कई साल मेहनत करनी पड़ती है। 

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गांव में मजबूत और सुंदर दिखने के लिए गधा-खच्चरों की प्रतियोगिता भी कराई जाती है, इसी दौरान इनको फिल्मी नाम मिल जाते हैं। धर्म नगरी में आयोजित विश्व का सबसे बड़े गधा-खच्चर मेला में इस बार भी सलमान नामक गधे की सर्वाधिक 55 हजार रुपये कीमत लगी, जबकि शाहरूख नामक गधे की कीमत 51 हजार रही। दीपिका, कैटरीना व अनुष्का नामक गधी-खच्चर भी खूब बिकीं। इसके बावजूद गधा-खच्चर विक्रेता असंतुष्ट होकर लौटे क्योंकि पिछले साल से इस बार विक्रेताओं को पांच हजार रुपये तक कम दाम मिले हैं। इनका मानना है कि मोटर वाहनों ने उनके व्यवसाय को नुकसान पहुंचाया है।

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