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कमिश्नर के बिस्कुट देने पर बोली किसान पत्नी- किसी भूखे को खिला देना

संजीवनी टुडे 06-04-2020 20:40:25

लाॅकडाउन की जमीनी हकीकत जानने के लिए मण्डलायुक्त गांव के एक खेत पर जा पहुंचे। वहां दोपहर तक बिना कुछ खाए किसान और उसकी पत्नी को कटाई करते देख मंडलायुक्त ने अपनी गाड़ी से बिस्कट मंगवाए।


झांसी। विश्व बंधुत्व की भावना ग्रामीण अंचल में समाहित भारतीय संस्कृति में आज भी देखने को मिल जाती है। विपरीत समय में भी गांव का व्यक्ति पहले दूसरों के दुःख बांटने का काम करते हैं। 

यह उदाहरण सोमवार को उस समय देखने को मिला जब लाॅकडाउन की जमीनी हकीकत जानने के लिए मण्डलायुक्त गांव के एक खेत पर जा पहुंचे। वहां दोपहर तक बिना कुछ खाए किसान और उसकी पत्नी को कटाई करते देख मंडलायुक्त ने अपनी गाड़ी से बिस्कट मंगवाए। इस पर किसान की पत्नी ने कहा कि वे सभी तो घर जाकर भोजन कर लेंगे। ये बिस्कट किसी अन्य भूखे को खिला देना। किसान पत्नी की भावना ने मंडलायुक्त को भावविभोर होने पर मजबूर कर दिया।

मंडल के कमिश्नर सुभाष चंद्र शर्मा अपनी अलग कार्यशैली के लिए विख्यात हैं। सोमवार को वह झांसी सदर तहसील के कोट बेहटा गांव के एक खेत पर पहुंचे। इस खेत पर दो किसान एक महिला के साथ फसल काट रहे थे। किसानों की समस्या को नजदीक से देखने के लिए और लाॅकडाउन के पालन की यथा स्थिति जानने कमिश्नर सुभाष चंद्र शर्मा वहां जा पहुंचे थे। 

उन्होंने अपने आप को एक साधारण व्यक्ति बताते हुए किसान से पूछा कि बिना मजदूरों के खेत काट रहे हो। मजदूर नहीं लगाए आपने। इस पर किसान ने कहा मजदूर नहीं मिल रहे हैं। यह फसल पक चुकी है और काटेंगे नहीं तो यह फसल नष्ट हो जाएगी। इसके बाद कमिश्नर ने गांव में बाहर से मजदूरी करके आने वालों के बारे में पूछा इस पर बताया गया कि एक लड़का आया था जिसे स्वास्थ विभाग की टीम ले गई थी। बाद में छोड़ दिया अब वह गांव में घूमता रहता है। और भी तमाम सवालात किए गए।

किसान की पत्नी की भावना देख भावविभोर हुए मंडलायुक्त
सबसे बड़ा सवाल कमिश्नर ने किसान से पूछा क्या आपने दोपहर का खाना खाया? किसान का जवाब था कि अभी सुबह का खाना ही नहीं खाया है। दोपहर का खाना तो बाद की बात है। उसने बताया वे सभी केवल चाय पीकर सुबह निकल आए थे। जब घर रहते हैं तो सब कुछ समय से होता है। इस पर कमिश्नर ने अपनी गाड़ी से निकाल कर उसको बिस्किट के पैकेट दिए। 

हालांकि किसान उसको लेने से मना करता रहा। किसान की पत्नी का कहना था कि हम लोग तो घर जा रहे हैं, खाना खा लेंगे। कोई अन्य भूखा मिल जाए तो उसे बिस्कट का पैकेट दे देना। किसान पत्नी की भावना देख मण्डलायुक्त स्तब्ध रह गए। दोपहर तक भूखे होने के बाबजूद भी किसान दूसरों का ध्यान रख रहे थे। यह है भारतीय संस्कृति जो हमें दूसरों के हित के बारे में सोचने की शिक्षा देती है। लेकिन कमिश्नर ने इसके बाबजूद भी उनको बिस्कट के पैकेट जबरन दिए। 

मंडलायुक्त ने स्वयं को बताया ग्रामीण
मण्डलायुक्त ने कहा कि आप मट्ठा आदि पीकर नहीं आते। उन्होंने बताया कि वह भी किसी ऐसे ही गांव से हैं। उन्हें किसानों से मिलना अच्छा लगता है। वह ऐसे ही वहां निकल आए थे। उन्होंने कहा कि उन सभी को खाली पेट दोपहर तक नहीं रहना चाहिए। कमिश्नर ने उनसे यह भी कहा आपको मट्ठा पीकर आना चाहिए। मैं भी गांव से ही हूं। लेकिन किसान का कहना था कि काम है सर करना पड़ता है। अभी यहां से जाकर ही खाना खाएंगे। 

अनजान किसान ने कहा, कमिश्नर होंगे एसपी रैंक 
मण्डलायुक्त सुभाष चन्द्र शर्मा ने किसानों से पूछा कि क्या वे कमिश्नर को जानते हैं? इस पर किसान ने जबाब दिया कि एसपी रैंक के होते होंगे। यह सुनकर मण्डलायुक्त शांत रह गए। हालांकि वह म नही मन सोच रहे थे कि भले ही किसान पढ़े लिखे नहीं हैं। फिर भी उन्हें लोगों का दुख अच्छे से पता है और दूसरों का सहयोग चाहते हैं।

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