संजीवनी टुडे

कसौटी पत्थर से बने शिव लिंग में जलाभिषेक के गायब होने का आज भी बना है रहस्य

संजीवनी टुडे 19-02-2020 18:29:33

नगर के हाथी दरवाजा के ठीक सामने एक विशाल शिव मंदिर स्थित है। ये मंदिर स्थापना काल की याद दिलाता है। मंदिर की ऊंचाई करीब 41 फीट है। मंदिर के अंदर कसौटी पत्थर से चमकदार शिव लिंग स्थापित है।


हमीरपुर। जिले में यमुना नदी किनारे स्थित शिव मंदिर का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। ये मंदिर राजा हम्मीरदेव के शासनकाल में बना था। महाशिवरात्रि पर्व को लेकर इस मंदिर को भी चमकाया जा रहा है। 

नगर के हाथी दरवाजा के ठीक सामने एक विशाल शिव मंदिर स्थित है। ये मंदिर स्थापना काल की याद दिलाता है। मंदिर की ऊंचाई करीब 41 फीट है। मंदिर के अंदर कसौटी पत्थर से चमकदार शिव लिंग स्थापित है। इसके सामने हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित है वहीं शिव लिंग के करीब नंदी की प्रतिमा विराजमान है। इस तरह के तीन मंदिर दस किमी के दायरे में बने है। इस मंदिर के अलावा एक मंदिर यमुना नदी पार रामपुर गांव में बना है वहीं तीसरा मंदिर सुभाष बाजार हमीरपुर के में सब्जी मंडी के ठीक पीछे बना है। हालांकि आसपास ऊंचे भवन बन जाने से ये मंदिर अब एक साइड से दब गया है। यहां मंदिर के सामने सैकड़ों साल पूर्व बाजार भी लगती थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व को लेकर इस मंदिर में जलाभिषेक किया जायेगा फिर अन्य अनुष्ठान के साथ भजन कीर्तन के कार्यक्रम होंगे। 

मंदिर का सैकड़ों साल पुराना है इतिहास 
यहां के बुजुर्ग में रामचन्द्र गुप्ता ने बताया कि ये मंदिर कम से कम आठ सौ साल पुराना होगा। उस जमाने में राजस्थान के अलवर से भागकर आये कलचुरी राजपूत हम्मीरदेव ने हमीरपुर आकर शरण ली थी। यहां उन्होंने पूरे नगर के चारो और सुरक्षा के लिहाज से किले बनवाये थे। हाथी दरवाजा और कुओं के निर्माण के साथ ही मंदिर भी अस्तित्व में आये थे। इतिहासकार डा. भवानीदीन प्रजापति की माने तो राजा हम्मीरदेव के नाम से ही यह नगर का नाम हमीरपुर पड़ा था। वह अपने परिवार के साथ यमुना नदी नहाने हाथी से आते थे। नदी में स्नान करने के बाद इसी शिव मंदिर में पूजा अर्चना भी वह करते थे। यमुना नदी जाने वाले मार्ग को हाथी दरवाजा नाम दिया गया। जो आज भी धरोहर संरक्षित है। 

कसौटी पत्थर से निर्मित है शिवलिंग
हाथी दरवाजा मुहाल निवासी रामचन्द्र गुप्ता ने बताया कि ये शिव मंदिर प्राचीनतम मंदिरों में एक है। शिव लिंग कसौटी पत्थर का है। कसौटी पत्थर से सुनार लोग सोने के गहने घिसकर पता करते है कि सोना असली है या नकली। उन्होंने बताया कि इस तरह का शिव लिंग उत्तर भारत में देखने को नहीं मिलेगा। शिव लिंग भी दिन में दो बार रंग बदलता है। मंदिर के अंदर अद्भुत नक्काशी भी देखने लायक है। ऐसी नक्काशी खजुराहो के मंदिरों में ही देखने को मिलती है। इसकी पूजा अर्चना करने वाले तमाम स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि इस शिव मंदिर के शिव लिंग का सैकड़ों बाल्टी पानी से जलाभिषेक करने के बाद मंदिर के अंदर और बाहर पानी नहीं दिखा। पानी आखिर कहा जाता है ये आज भी रहस्य बना है। 

शिवलिंग से लिपटकर युवक ने किया था आत्मदाह
स्थानीय लोगों में जयनारायण गुप्ता व नगेन्द्र जोशी ने बताया कि करीब तीन दशक पहले एक व्यक्ति ने नशे में मंदिर पहुंच गया और अपने शरीर में चादर डालकर केरोसिन छिड़ककर आग लगा ली। आग लगाने के बाद वह शिव लिंग से लिपट गया था। चादर जलने के बाद वह जलता हुआ मंदिर के बाहर आया और सड़क पर कूद गया था। ये मंदिर के पास अपने घर के दरवाजे पर बैठ गया तभी मां ने आग से जलता देख उसके ऊपर एक बाल्टी पानी डाल दिया। कुछ दिन बाद इसकी मौत भी अस्पताल में हो गयी थी। बताते है कि इस घटना के बाद काफी समय तक ये मंदिर सन्नाटे में पसर गया था। मंदिर में हवन पूजन के बाद फिर लोगों ने पूजा अर्चना शुरू की। इस मंदिर में नगर और अन्य स्थानों से लोग दर्शन करने आते है।

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