संजीवनी टुडे

नरवा, गरूवा, घुरूवा और बारी की अवधारणा है वैज्ञानिक: सीएम

संजीवनी टुडे 28-02-2019 22:24:49


रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरुवार को पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर के ऑडिटोरियम में दो दिवसीय 17वीं छत्तीसगढ़ युवा वैज्ञानिक कांग्रेस का शुभारम्भ किया। समारोह को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस भारत वर्ष ने आचार्य चरक, सुश्रुत, आर्यभट्ट, नागार्जुन जैसे महान वैज्ञानिक दिए हैं, वह देश 19वीं सदी तक विज्ञान के क्षेत्र में पिछड़ गए। 19वीं सदी में भारत में कोई नई खोज नहीं हुई। आज भी भगवान गणेश की मूर्ति को दूध पिलाने जैसी अवैज्ञानिक सोच मौजूद है। इसका कारण है हमने सवाल पूछना बंद कर दिया है, हमें अपने नेताओं, अधिकारियों, प्राध्यापकों और वरिष्ठों से सवाल पूछने चाहिए और केवल सवाल नहीं पूछना चाहिए, बल्कि उनका जवाब भी धैर्यपूर्वक सुनना चाहिए। हमें अपने आप से भी सवाल पूछना चाहिए। जब तक हम सवाल नहीं पूछेंगे तब तक जवाब नहीं मिलेगा और हम प्रगति से वंचित रहेंगे। 

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मुख्यमंत्री ने कहा आजाद भारत में विज्ञान-वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का कार्य देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने प्रारंभ किया था, जिनके प्रयास से परमाणु अनुसंधान केन्द्र, एम्स, अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र आदि स्थापना हुई। जिसके कारण आज हमारा देश एक साथ 104 सेटेलाईट छोड़ने की क्षमता रखता है। इसी तरह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उस समय हरित क्रांति और श्वेत क्रांति का आगाज किया, जब देश की गरीबी और भूखमरी की समस्या थी। इसी प्रकार 1980 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने देश को नए युग में ले जाने के लिए कम्प्यूटर और संचार क्रांति का सूत्रपात किया गया, जिसका अच्छा प्रतिफल आज हमें मिल रहा है। उन्होंने कहा आज विकसित ही नहीं विकासशील देश जैसे वियतनाम, सिंगापुर, बैंकाक आदि से भी विज्ञान, तकनीकी और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेज स्पर्धा है और इसमें भारत अपनी महत्वपूर्ण स्थिति को बनाए रखने की चुनौती है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस युथ कांग्रेस में छत्तीसगढ़ के बाहर के राज्यों से बड़ी संख्या में वैज्ञानिक आए हैं। उनके लिए ‘नरवा, गरूवा, घुरूवा और बारी’ की अवधारणा नई हो सकती है। उन्होंने नरवा, गरूवा, घुरूवा और बारी के एक-एक बिन्दुओं की जानकारी देते हुए बताया कि नरवा से तात्पर्य नदी-नालों को जल संपदा से भरपूर बनाए रखना है। गरूवा से तात्पर्य पशुधन को समृद्ध करना है। घुरूवा से तात्पर्य जैविक खेती को बढ़ावा देना है और बारी से तात्पर्य किचन गार्डन या छोटे खेतों के माध्यम से पोषक कृषि उपज लेना है। उन्होंने कहा आज हमारे नदी-नाले-तालाब सूख रहे हैं और प्रदूषित हो रहे है। अण्डर ग्राउण्ड वाटर भी काफी नीचे चला गया है और उसमें हैवी मेटल मिल रहे हैं। यह कहा जाता है कि बीमारी का 80 प्रतिशत कारण पानी होता है। इसी कारण छत्तीसगढ़ी कहावत है ‘पानी पिये छान के, गुरू बनाए जान के’। उन्होंने बताया किस तरह गौठान के बनने से पशुधन और कम्पोस्ट खाद में वृद्धि होगी। चारे का उपयोग होने से पर्यावरण प्रदूषित नहीं होगा। 

उन्होंने कहा आज जहां दिल्ली जैसी जगह चारे को जलाने तथा वायु प्रदूषण के कारण गैस चेम्बर बनती जा रही है। वहीं छत्तीसगढ़ की ‘नरवा, गरूवा, घुरूवा और बारी’ की अवधारणा वैज्ञानिक सोच पर आधारित है। उन्होंने कहा इस अवधारणा की सोच है भविष्य में भी छत्तीसगढ़ के बच्चों और नागरिकों को शुद्ध भोजन, अच्छा जल और प्रदूषण रहित वातावरण मिले। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री ने पुलवामा में शहीद हुए जवानों को श्रद्वांजलि दी।

प्रदेश के उच्च शिक्षा तथा विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने कहा कि किसी भी प्रदेश का विकास वहां संसाधनों की उपलब्धता तथा उनके बेहतर उपयोग पर निर्भर करता है। छत्तीसगढ़ में संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन उसका उपयोग करने में हम कहीं ना कहीं पीछे हैं। उन्होंने कहा आने वाले दस-बीस साल बाद पानी की समस्या सबसे बड़ी बन सकती है। पानी की कीमत पेट्रोल के समान हो सकती है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ‘नरवा, गरूवा, घुरूवा और बारी’ की जो अवधारणा शुरू की है, उससे जल संसाधन को रिचार्ज करने में, पशुधन को बढ़ाने में और पर्यावरण को सुधारे में मदद मिलेगी।

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पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.एल. वर्मा ने अपने उद्गार में बताया कि छत्तीसगढ़ के इस सबसे बड़े विश्वविद्यालय को पांचवी बार युवा वैज्ञानिक कांग्रेस के आयोजन करने का सौभाग्य मिला है। विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों को पांच-पांच हजार रुपये की राशि दी जाती है। कार्यक्रम में 17वां युवा वैज्ञानिक कांग्रेस की स्मारिका का विमोचन किया गया।

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