संजीवनी टुडे

राशि ने उठाया सारकोमा कैंसर पीड़ितों की सेवा का बीड़ा

संजीवनी टुडे 05-03-2019 16:54:10


नई दिल्ली। कैंसर जैसी घातक बीमारी से दो बार जूझने वाली राशि कपूर ने अपना जीवन इस गंभीर बीमारी से लड़ रहे अपने जैसे अन्य मरीजों की सहायता के लिए समर्पित कर दिया है। पेशे से टीचर रहीं राशि को पहली बार यूट्रस कैंसर व दूसरी बार दुर्लभ प्रकार के सारकोमा कैंसर से लड़ना पड़ा। ऐसे में राशि ने दिल्ली के एम्म में सारकोमा के मरीजों की सहायता का बीड़ा उठाया है।

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राशि कपूर ने मंगलवार को बातचीत करते हुए कहा कि पहली बार उन्हें वर्ष 2011 में यूट्रस कैंसर हो गया था। जबतक वो इससे उबर पातीं दूसरी बार वर्ष 2016 में उनको दुर्लभ प्रकार का सारकोमा कैंसर हो गया। हड्डियों और मांसपेशियों में पाए जाने वाले इस दुर्लभ कैंसर के डॉक्टर और मरीज दोनों ही कम हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी में हाथ या पैर में सूजन हो जाती है। इस बीमारी को डॉक्टर भी जल्दी पकड़ नहीं पाते।

राशि ने आगे कहा कि जब वो इस बीमारी से ठीक हुईं तो उन्होंने सारकोमा के दूसरे मरीजों के सहयोग का मन बनाया। इसके लिए उन्होंने ‘सचिन सारकोमा सोसायटी’ बनाई। राशि ने कहा कि इस ग्रुप में वो लोग शामिल हैं, जो सारकोमा के मरीज हैं या जो सारकोमा को मात दे चुके हैं। 

उन्होंने कहा कि दिल्ली एम्स में आने वाले सारकोमा के मरीजों का उनका ग्रुप ख्याल रखता है। वालंटियर मरीजों के रहने खाने, उनको डॉक्टरों तक पहुंचाने सहित आर्थिक मदद दी जाती है। राशि ने कहा कि ऐसे मरीजों के भावनात्मक सपोर्ट के लिए वो हर सप्ताह एम्स जाती हैं मरीजों से मिलती हैं और उनको अपने अनुभव बताती हैं कि कैसे वो सारकोमा से लड़कर खुद को फिर से स्वस्थ कर पाईं।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) में सारकोमा कैंसर के विशेषज्ञ प्रोफेसर समीर रस्तोगी ने कहा कि एम्स में दो दिन के लिए सारकोमा कैंसर पीड़ितों के लिए ओपीडी चलती है। प्रतिदिन लगभग 100 लोग आते हैं। रस्तोगी ने कहा कि हड्डियों और मांसपेशियों में पाए जाने वाले इस दुर्लभ कैंसर की बीमारी के डॉक्टरों की देश में कमी है। उन्होंने कहा कि विदेशों में इस बीमारी के डॉक्टर हैं लेकिन देश में 10 से भी कम विशेषज्ञ डॉक्टर हैं।

डॉ समीर ने कहा कि 200 तरह के कैंसर में यह सबसे दुर्लभ कैंसर है। आम तौर पर डॉक्टर भी इस बीमारी को पहचान नहीं पाते और वो गलत दवाएं व उपचार करते रहते हैं। समीर ने कहा कि इस बीमरी में हाथ या पैर में सूजन आ जाती है।

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सारकोमा कैंसर के लक्षण
डॉक्टर समीर के अनुसार सारकोमा कैंसर से पीड़ित मरीज के हाथ या पैर में सूजन आ जाती है। उन्होंने कहा कि यह असामान्य सूजन अमूमन हाथ व पैर में ही होती है लेकिन कई केसों में शरीर के दूसरे अंगों में भी सूजन हो जाती है। समीर ने कहा कि हड्डियों और मांसपेशियों में पाए जाने वाले इस दुर्लभ कैंसर का समय पर इलाज नहीं हो पाने पर उसे बचा पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मरीज का विषेशज्ञों के पास पहुंचना जरूरी होता है।

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