संजीवनी टुडे

टिड्डियों के आक्रमण से बचाव के लिए प्रशासन ने किसानों को किया अलर्ट व बताये उपाय

संजीवनी टुडे 29-05-2020 15:33:19

राजस्थान से मथुरा, आगरा एवं झांसी जनपदों में टिड्डी दलों का प्रवेश कर रहा है जिसका पड़ोसी जनपदों के साथ जिले की ओर बढ़ने की संभावना है।


फतेहपुर। राजस्थान से मथुरा, आगरा एवं झांसी जनपदों में टिड्डी दलों का प्रवेश कर रहा है जिसका पड़ोसी जनपदों के साथ जिले की ओर बढ़ने की संभावना है। ऐसी दशा में सब्जी उत्पादक कृषक और अन्य फसल करने वाले कृषक पहले से सतर्क रहकर टिड्डियों के दल पर नजर रखने के लिए जिला उद्यान विभाग ने एलर्ट जारी किया है। जिसके अनुसार टिड्डियों का दल देखते ही धुआं करने या शोरगुल कर भगाने की बात कही गयी है। 

जिला उद्यान अधिकारी सी एल यादव ने बताया है कि टिड्डी कीट के नाम से अधिकतर लोग परिचित होंगे यह लगभग दो से ढाई इंच लंबा कीट होता है। ये बहुत ही डरपोक होने के कारण समूह में रहते हैं, टिड्डी दल किसानों का सबसे बड़ा शत्रु होता है। टिड्डियां एक दिन में 100 से 150 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है हालांकि इनके आगे बढ़ने की दिशा हवा की गति पर निर्भर करती है। टिड्डी दल सामूहिक रूप से लाखों की संख्या में झुंड बनाकर पेड़ पौधों एवं वनस्पतियों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं, यह दल 15 से 20 मिनट में आप की फसल के पत्तियां को पूर्ण रूप से खाकर नष्ट कर सकते हैं। 

यह सभी प्रकार के हरे पत्तों पर आक्रमण करते हैं यह टिड्डी दल किसी क्षेत्र में शाम 6:00 बजे से 8:00 बजे के आस-पास पहुंच कर जमीन पर बैठ जाते हैं टिड्डी दल शाम के समय समूह में पेड़ों झाड़ियों एवं फसलों पर बसेरा करते हैं और वहीं पर रात गुजारते हैं तथा रात भर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और फिर सुबह 8:00 से 9:00 बजे के करीब उड़ान भरते हैं। अंडा देने की अवधि में इनका दल एक स्थान पर 3 से 4 दिन तक रुक जाता है । बड़े आकार का टिड्डी दल राजस्थान राज्य से होते हुए मध्य प्रदेश से सटे बुंदेलखंड क्षेत्र की तरफ से उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर चुका है अतः सभी कृषक बंधुओं से अनुरोध है कि इस समय सजग रहें एवं टिड्डी दल की लोकेशन करते रहे टिड्डी दल के आने पर सतर्कता से ही अपनी फसल को बचा सकते हैं।

उपायों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि टिड्डी दल का समूह जब भी आकाश में दिखाई पड़े तो उनको उतरने से रोकने के लिए तुरंत अपने खेत के आसपास मौजूद घास- फूस का उपयोग कर धुंआं करना चाहिए अथवा आग जलाना चाहिए जिससे टिड्डी दल आपके खेत में न बैठकर आगे निकल जाएगा। टिड्डी दल दिखाई देते ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से आवाज करके उनको अपने खेत पर बैठने न दें। 

अपने खेतों में पटाखे फोड़ कर, थाली बजाकर, ढोल नगाड़े बजाकर आवाज करें। ट्रैक्टर के साइलेंसर को निकाल कर भी तेज ध्वनि कर सकते हैं, कल्टीवेटर या रोटावेटर चलाकर टिड्डी को तथा उनके अंडों को नष्ट किया जा सकता है। इनको उस क्षेत्र से हटाने भगाने के लिए ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से उपयुक्त होता है। प्रकाश यंत्र लगाकर भी भगा सकते हैं क्योंकि यह एक डरपोक स्वभाव का कीट होता है तेज आवाज से डरकर आपके फसल व पेड़ पौधों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा।

यह टिड्डी दल शाम को छह बजे से सात बजे के आसपास जमीन पर बैठ जाता है और फिर सुबह 8:00 से 09:00 बजे के करीब उड़ान भरता है अतः इसी अवधि में इनके ऊपर शक्ति ट्रैक्टर चलित स्प्रेयर की मदद से कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करके इनको मारा जा सकता है। रसायन के छिड़काव का सबसे उपयुक्त समय रात्रि 11 बजे से सुबह आठ बजे तक होता है। 

टिड्डी के नियंत्रण के लिए क्लोरोपाईरीफास 20 प्रतिशत, ईसी या बेंडियोकार्ब 80 प्रतिशत, 125 ग्राम 1200 मिली या क्लोरोपाईरीफास 50 प्रतिशत ईसी 480 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8 प्रतिशत ईसी 625 मिली या डेल्टामेथरिन 1.25 प्रतिशत एस0सी0 1400 मिली या डायफ्लुबेनजेयूरोन 25 प्रतिशत डब्लयूपी 120 ग्राम या लैम्बडा-साईहेलोथ्रिन 10 प्रतिशत डब्ल्यूयूपी 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर कीटनाशक का उपयोग किया जा सकता है। मैलाथियान पांच प्रतिशत धूल अथवा फेनवेलरेट धूल की 25 किलो मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से डस्टर द्वारा बुरकाव करें। बुरकाव के लिए प्रातः काल का समय अधिक उपयुक्त होता है। क्योंकि इस समय पत्तियों पर ओस पड़ी रहती है जिसके कारण धूल पत्तियों पर चिपक जाती है। खेत के बाहरी हिस्से से प्रारंभ करते हुए अन्दर की तरफ करना चाहिए।

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