संजीवनी टुडे

शिक्षक में जीवन पर्यंत सीखने की प्रवृत्ति होनी चाहिए- डॉ. दिनेश शर्मा

संजीवनी टुडे 15-07-2019 22:39:42

शिक्षक कभी भी सेवानिवृत्त नहीं होता है।


लखनऊ। गुरु वंदन का कार्यक्रम हमारे अंतर्मन में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। शिक्षक समाज की संरचना में अपना सर्वस्व निछावर करता है, समाज को बनाने में अपना अमूल्य योगदान देता है, शिक्षक कभी भी सेवानिवृत्त नहीं होता। शिक्षक पहले जहां विद्यालय में विद्यार्थियों को पढ़ाता है वहीं बाद में वह समाज एवं परिवार को शिक्षित करने में अपना योगदान देता है। शिक्षक में जीवन पर्यंत सीखने की प्रवृत्ति बनी रहनी चाहिए। 

यह विचार प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने  व्यक्त किये। वे सोमवार को यहां भारतेंदु नाट्क अकादमी, गोमती नगर में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा आयोजित सेवानिवृत्त संस्कृत अध्यापकों के सम्मान समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर 170 सेवानिवृत्त संस्कृत अध्यापकों को सम्मानित किया गया।

डाॅ. दिनेश शर्मा ने कहा कि समाज में अध्यापक का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान है। शिक्षक के बगैर जीवन में कुछ भी संभव नहीं है, गुरु अपने शिष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। एक साधारण व्यक्ति को जीवन में सर्वोच्च स्तर पर पहुंचाने में गुरु का अहम योगदान होता है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत देववाणी है, यह सभी भाषाओं की जननी है, संस्कृत आदि भाषा है। इसको समय के साथ और अधिक लोकप्रिय बनाया जाना जरूरी है, जिसके लिए जरूरी है कि संस्कृत को और अधिक बलिष्ठ एवं पुष्ट किया जाय, समय-समय पर संस्कृत के विद्वानों के मध्य शास्त्रार्थ का आयोजन किया जाए, जिससे संस्कृत की ओर लोगों का आकर्षण बढ़ाया जा सके। 

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उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में ज्योतिष एवं कर्मकांड को जोड़े जाने पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे लोगों को इस क्षेत्र में रोजगार भी मिल सके। उन्होंने कहा कि विभिन्न वैज्ञानिक शोधों से सिद्ध किया जा चुका है कि संस्कृत का श्लोक पढ़ने वाला व्यक्ति दीर्घायु को प्राप्त करता है।

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