संजीवनी टुडे

स्वामी चिदानन्द महाराज और आचार्य बालकृष्ण ने शाही शादी में किया सहभाग, वर-वधु को दिया आशीर्वाद

संजीवनी टुडे 20-06-2019 22:22:03

उत्तराखण्ड की खूबसुरत वादियों में बसे औली में गुरुवार को दक्षिण अफ्रीका और दुबई में बसे भारतीय मूल के उद्योगपति अजय गुप्ता के सुपुत्र सूर्यकांत और डायमंड कारोबारी सुरेश सिंघल की बेटी कृतिका की शादी में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज और आचार्य बालकृष्ण ने सहभाग किया।


देहरादून/ऋषिकेश। उत्तराखण्ड की खूबसुरत वादियों में बसे औली में गुरुवार को दक्षिण अफ्रीका और दुबई में बसे भारतीय मूल के उद्योगपति अजय गुप्ता के सुपुत्र सूर्यकांत और डायमंड कारोबारी सुरेश सिंघल की बेटी कृतिका की शादी में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज और आचार्य बालकृष्ण ने सहभाग किया। वर सूर्यकांत और वधु कृतिका को आशीर्वाद देते हुये स्वामी महाराज ने पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर नव जीवन की हरित शुरूआत करने की प्रेरणा दी। शादी समारोह में सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित कई फिल्म कलाकारों, गायकों ने वर-वधू को आर्शीवाद दिया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि हिमालय की वादियों में पर्यावरण की रक्षा करते हुये भारतीय संस्कारों और संस्कृति से युक्त विवाह वास्तव में सभी को प्रेरणा देने वाला है। भारतीय संस्कृति से जुड़े रहने और अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी जड़ों से, भारतीय संस्कृति, दर्शन और संस्कारों से जोड़ने का यह श्रेष्ठ उदाहरण है। 

उन्होंने कहा कि अजय गुप्ता और अतुल गुप्ता ने शादी के भव्य समारोह को दिव्यता के साथ जोड़कर, पर्यावरण को पूर्ण रूप से संरक्षित करते हुये आयोजित किया वह अद्भुत है। इस विवाह के पश्चात निश्चित रूप से उत्तराखण्ड के पर्यटन, पहाड़ी व्यंजन, उत्पादों, संस्कृति और कला को वैश्विक पहचान मिलेगी। स्वामी ने कहा कि इस विवाह समारोह की सबसे अच्छी बात यह है कि कहीं पर भी प्लास्टिक का बैंग, प्लेट, कप और कोई अन्य एकल उपयोग वाले प्लास्टिक का सामान नहीं है। उत्तराखण्ड के व्यंजनों को मेन्यू में विशेष स्थान दिया गया है। स्वामी ने कहा कि शादी में शराब से रहित, शाकाहारी, प्याज और लहसुन से रहित भोजन, भोजन के रूप में प्रसाद है।

उन्होंने कहा कि शिव भगवान ने अपने विवाह के लिये जिस धरती को चुना उसे स्विटजरलैण्ड छोड़कर चुनना यह संस्कारों के बिना सम्भव नहीं हो सकता। वर-वधु को आशीर्वाद देते हुये स्वामी ने कहा कि दादी अंगूरी देवी के ये संस्कार अपनी आने वाली पीढ़ियों में भी बढ़ाते रहे। स्वामी ने रूद्राक्ष का पौधा नव वर-वधु को देकर दीक्षा दी कि सबसे पहले गृहस्थ में प्रवेश करो तो अपने घर के आंगन में रूद्राक्ष का पौधा, तुलसी का पौधा लगाओ। पूरे परिवार ने संकल्प किया अनेकों-अनेकों पेड़-पौधों को लगाकर हरियाली का संकल्प इस शादी से लेंगे। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि संस्कार और संस्कृति को संजों कर इस विवाह को उत्तराखण्ड की धरती में सजाकर जिस प्रकार गुप्ता परिवार ने यह दिव्य कार्यक्रम किया है वह सचमुच सुन्दर प्रेरणा देने वाला है। चिदानन्द सरस्वती और आचार्य बालकृष्ण ने वर सूर्यकांत और वधु कृतिका के नव जीवन में प्रवेश के पावन अवसर पर शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट करते हुये हरित नव जीवन की शुरूआत का आशीर्वाद दिया। 

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