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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' पर उठाये 101 सवाल

संजीवनी टुडे 18-02-2020 19:39:13

इस मंदिर में लगभग 21 लाख रुपये की लागत से 21 दिन में बने 21 टन वजनी स्वर्णालय श्रीरामलला मंदिर में 12 टन सागवान की लकड़ी का प्रयोग किया गया है।


वाराणसी। शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी द्वारा स्थापित 'रामालय ट्रस्ट' की ओर से बाल मन्दिर स्वर्णालय श्रीरामलला का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार से मांग की है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के समय भगवान श्रीरामलला की प्रतिमा इस मंदिर में रखा जाए। 

इस मंदिर में लगभग 21 लाख रुपये की लागत से 21 दिन में बने 21 टन वजनी स्वर्णालय श्रीरामलला मंदिर में 12 टन सागवान की लकड़ी का प्रयोग किया गया है। द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नन्द ने बताया कि उनके आदेश पर अयोध्या में भगवान श्रीरामलला के लिए बाल मन्दिर स्वर्णालय श्रीरामलला का निर्माण कार्य पूरा हो गया है।  मंगलवार को लंका स्थित आनन्दवनम् में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य और रामालय न्यास के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बाल मन्दिर स्वर्णालय श्रीरामलला को मीडिया कर्मियों को दिखाया। 

उन्होंने बताया कि इस बाल मंदिर को 21 कारीगरों ने बनाया है। सभी कारीगर सहारनपुर, वाराणसी के सारनाथ, रामनगर, चितईपुर तथा मिर्जापुर जनपद के हैं। मुख्य कारीगर हरिसेवक विश्वकर्मा की अगुवाई में पूरा कार्य सम्पन्न हुआ। उन्होंने बताया कि मन्दिर के अन्दर का सिंहासन चन्दन की लकड़ी से बन रहा है जिसमें सोना मढ़ा जायेगा और वहीं से सीधे प्रयाग होकर अयोध्या लाया जायेगा। वार्ता के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के निर्माण के लिए गठित 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' पर सवाल भी उठाया। उन्होंने सरकार से 101 सवाल पूछकर आरोप लगाया कि हिन्दू धर्म के शीर्ष धर्माचार्यों के 'रामालय ट्रस्ट' को दरकिनार कर मन्दिर निर्माण के लिये सरकारी ट्रस्ट बना दिया गया है। 

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार हिन्दू धर्म के आचार्यो पर भरोसा नहीं करती। क्या केन्द्र सरकार किसी पब्लिक ट्रस्ट में बिना किसी मानदंड के मनमानी नियुक्ति कर सकती है। रामालय न्यास के दावे में कोई खामी पाई है, यदि हां तो उसे रामालय न्यास को बताया क्यों नहीं गया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने न्यास में जगद्गुरु वल्लभाचार्य, महामण्डलेश्वर सहित अन्य संतों के नहीं शामिल करने पर नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे सवाल केन्द्र सरकार की स्वेच्छाचारिता से उत्पन्न हुये हैं। समय-समय पर सवालों को हम परमधर्मसंसद् 1008 के माध्यम से उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि केन्द्र सरकार का कार्य देश में सुव्यवस्था बनाना है, वह उसे बनाये। धर्म का काम धर्माचार्यों का है उसे हमें करने दे।

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