संजीवनी टुडे

सुप्रीम कोर्ट ने वन क्षेत्रों में पेड़ों के काटने पर लगाया प्रतिबंद

संजीवनी टुडे 14-03-2019 08:06:20


नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश में विकास कार्य के लिए वन क्षेत्रों में जो पेड़ काटे जाते थे। उनपर सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह से रोक लगा दी है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को वन भूमि को गैर वानिकी उद्देश्य के लिए डायर्वट करने पर भी प्रतिबंद लगा दिया है। 

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सूत्रों के मुताबिक, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अथॉरिटी के उस अधिकार पर प्रतिबंद लगा दिया है जिसके तहत उसे स्कूल, सड़क, अस्पताल, आदि विकास कार्यों के लिए प्रति हेक्टेयर  जमीन से 75 पेड़ों को काटने की इजाजत मिली हुई है। वन अधिकार अधिनियम के तहत अथॉरिटी को यह अधिकार मिला हुआ है। 

अगली सुनवाई एक अप्रैल को होगी। पीठ ने अगले आदेश तक जिला वन अधिकारियों को वन अधिकार अधिनियम की धारा-3(2) के तहत मिले इस अधिकार का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है।

जानकारी के अनुसार, अदालत ने कहा है कि जिन परियोजनाओं को इजाजत दे दी गई है लेकिन वहां अभी तक पेड़ों को नहीं काटा गया है, तो वहां भी अगले आदेश पर पेड़ों को नहीं काटा जा सकता। इसके अलावा पीठ ने अगली तारीख तक वन भूमि को गैर वानिकी उद्देश्य के लिए डायर्वट करने पर रोक लगा दी है। 

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सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई संबंधी रिपोर्ट देखने पर यह निर्णय लिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। पीठ ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए वन को अब किसी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए। पीठ ने साफ -साफ कहा है कि हिमाचल प्रदेश के कीमती अनमोल वन को नहीं काटा जायेगा और अब किसी प्रकार का नुकसान नहीं होना चाहिए। 
 
 

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