संजीवनी टुडे

रोहिणी मे सूर्य ने दिखाए तेवर, सड़कों पर पसरा सन्नाटा

संजीवनी टुडे 26-05-2019 21:36:04


देवास। रोहिणी नक्षत्र वर्ष में एक बार गर्मी के दिनों में आता है। इस नक्षत्र के बारे में कहा जाता है कि गर्मी अपनी चरम सीमा पर रहती है। 16 दिन तक चलने वाले नक्षत्र में आसमान साफ व सूर्य की दिशा सीधी रहती है। किसी कारणवश 16 दिवस के अंदर मानसून या फ्री मानसून के तहत बादल छा जाते हैं या पानी गिर जाता है तो इसे शुभ नहीं माना जाता। रोहणी नक्षत्र प्रारंभ हो गया है और भीषण गर्मी से लोग हलाकान हो रहे हैं।

इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। रविवार को भी दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा सा छाया रहा। लोग जरुरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलते द‍िखे। लोग गर्मी से बचने के लिए जहां लोग शीतल पेय का सहारा ले रहे हैं, वहीं कुछ लोग मुंह पर कपड़ा बांधकर घर से बाहर निकले।

गौरतलब है क‍ि भारतीय संस्कृति में 16 दिन तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं निकाले जाते थे। कारण यह है कि सीधी सूर्य की किरणें होने के कारण ये दिन बहुत गर्म रहते हैं। इससे स्वास्थ्य पर विपरीत असर होता है। किसान भी इन दिनों खेतों में कोई काम नहीं करते। इसके पूर्व ही गहरी हकाई-जुताई करके छोड़ देते हैं। इस गर्मी से खेत की मिट्टी धूप अच्छी तरह से ग्रहण करती है, जिसके चलते हानिकारक बेक्टेरिया मर जाते हैं। जैविक खाद रोहिणी नक्षत्र के बाद ही डाला जाता है, लेकिन धीरे-धीरे 16 दिन को नौतपा के रुप में परिवर्तित कर दिया गया। इसका कारण है कि नौ दिनों तक दिन ज्यादा गर्म रहते हैं। 

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रोहिणी नक्षत्र आरंभ के साथ दिन धीरे-धीरे चरम उत्कर्ष पर पहुंचते हैं, लेकिन नौ दिनों तक एक जैसी गर्मी बनी रहती है। बड़े-बुजुर्ग सलाह देते हैं कि इस नक्षत्र में दोपहर के समय जरुरी हो तो ही निकले। निकलते समय आंखों पर चश्मा व मुंह व कान को कवर करना चाहिए। गर्मी से बचने के लिए जेब में प्याज रखकर चले। वर्तमान समय में कैरी का पन्ना भी उपयोगी है। 

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