संजीवनी टुडे

गर्मी की मक्का ने बदल दी किसानों की किस्मत

संजीवनी टुडे 25-06-2019 15:36:39

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में आलू खोदकर मक्का की फसल तैयार करने वाले किसानों के दिन फिर लौट आये हैं।


फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में आलू खोदकर मक्का की फसल तैयार करने वाले किसानों के दिन फिर लौट आये हैं। मौजूदा समय में मक्का की फसल तैयार करने वाले किसान 7800 रुपया प्रति बीघा शुद्ध लाभ कमा रहे हैं। मक्का की मांग बाहरी प्रांतों में होने की वजह से गेहूं से अधिक दाम मक्का के पहुंच गए हैं। यहां गेहूं 17 सौ रुपये प्रति कुंतल बिक रहा है। मक्का के भाव 18 सौ रुपये प्रति कुंतल पहुंच गए हैं। विकास खण्ड कमालगंज के ग्राम कमालपुर के किसान रावेंद्र सिंह बताते हैं कि आलू खोदने के बाद पैदा की गई मक्का में तकरीबन 3 हजार रुपये प्रति बीघा लागत आती है। इस लागत में बीज, खाद, जुताई, गुड़ाई, मड़ाई, पानी, कटाई आदि शामिल हैं। एक बीघा खेत में इस समय 6 कुंतल मक्का की पैदावार हो रही है। 18 सौ रुपये प्रति कुंतल मक्का के भाव होने की वजह से 10,800 रुपये एक बीघा में तैयार की गई मक्का के दाम मिल रहे हैं। इस तरह एक बीघा खेत में मक्का की फसल तैयार करने वाले किसान 7800 रुपये प्रति बीघा शुद्ध लाभ कमा रहे हैं।

मक्का के थोक आढ़ती अलीदराज खां का कहना है कि मक्का की मांग बाहर की मंडियों में अधिक होने से जिले भर से प्रति दिन 50 ट्रक मक्का बंगाल तथा अन्य प्रांतों में जा रही है। यही वजह है कि मक्का की बिक्री के लिए किसानों को मंडी के चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं। उनकी मक्का घर से ही व्यापारी खरीद ले जाते हैं। इस साल मक्का की आसमान पर पहुंची कीमत ने किसानों के भाग्य फिर बदल दिए हैं। जिला आलू अधिकारी आदित्य प्रताप सिंह सेंगर बताते हैं कि मक्का से मुर्गी दाना बनाने के साथ ही फ़ास्ट फूड भी तैयार किये जाते हैं। मक्का से बीयर भी बनाई जाती है। सबसे खास बात यह है कि मक्का के आगे वाले भाग से स्टार्च बनाया जाता है। मक्का का दाना अलग-अलग कामों में प्रयोग लाया जाता है। इस वजह मक्का के दाम गेहूं से ज्यादा पहुंच गए हैं। 

उन्होंने बताया कि यह पहला मौका है जब गर्मियों में पैदा होने वाली मक्का के भाव गेहूं के भाव से अधिक पहुंच गए हैं। गत वर्ष इस सीजन में पैदा होने वाली मक्का 12 सौ रुपये प्रति कुंतल के ऊपर नहीं पहुंची थी। जिला कृषि अधिकारी राकेश सिंह ने बताया कि इस साल 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर आलू खोदने के बाद मक्का की फसल किसानों ने तैयार की थी। पैदावार और भाव अच्छे होने की वजह से मक्का पैदा करने वाले किसानों को आलू की फसल में हुआ घाटा कुछ हद तक पूरा हो गया है। अगले साल गर्मी की मक्का का क्षेत्र फल बढ़ाने के लिए किसानों को प्रेरित किया जायेगा। 

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