संजीवनी टुडे

सीताकुण्ड घाट पर 11 सौ एक दीपों से होगी देव दीपावली

संजीवनी टुडे 25-11-2020 11:47:00

देवोस्थानी एकादशी के मौके पर गोमती नदी के किनारे सीताकुण्ड घाट पर ग्यारह सौ एक दीपों से देव दीपावली मनायी जाएगी।


सुलतानपुर। देवोस्थानी एकादशी के मौके पर गोमती नदी के किनारे सीताकुण्ड घाट पर ग्यारह सौ एक दीपों से देव दीपावली मनायी जाएगी। कार्यक्रम में दर्जा प्राप्त मंत्री मुख्य अतिथि राज्य ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश मिश्र (दर्ज प्राप्त मंत्री) शामिल होंगे।

 कार्यक्रम संयोजक डॉ राम चरित्र पांडेय एवं मंत्री वीरेंद्र भार्गव ने बताया कि देवोस्थानी एकादशी पर बुधवार शाम को सीताकुंड घाट पर 1101 दीपों को प्रज्वलित कर दीपोत्सव कार्यक्रम किया जाएगा। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश मिश्र (दर्जप्राप्त मंत्री) रहेंगे। जिले में उनके प्रथम आगमन पर स्वागत भी किया जाएगा। 

- देवोस्थानी एकादशी का महत्व

 पौराणिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी के बीच श्रीविष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और फिर भादों शुक्ल एकादशी को करवट बदलते हैं। पुण्य की वृद्धि और धर्म-कर्म में प्रवृति कराने वाले श्रीविष्णु कार्तिक शुक्ल एकादशी को निद्रा से जागते हैं। इसी कारण से सभी शास्त्रों में इस एकादशी का फल अमोघ पुण्य फलदाई बताया गया है। देवोत्थानी एकादशी दीपावली के बाद आती है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु निद्रा के बाद उठते हैं इसलिए इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है।

भगवान के जागने के बाद शादी-विवाह जैसे सभी मांगलिक कार्य होते है आरम्भ 

 कहा जाता है कि भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीर सागर में निद्रा करने के कारण चातुर्मास में विवाह और मांगलिक कार्य थम जाते हैं। फिर देवोत्थान एकादशी पर भगवान के जागने के बाद शादी- विवाह जैसे सभी मांगलिक कार्य आरम्भ हो जाते हैं। इसके अलावा इस दिन भगवान शालिग्राम और तुलसी विवाह का धार्मिक अनुष्ठान भी किया जाता है। 

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