संजीवनी टुडे

सुहागिन महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक मनाया वट सावित्री व्रत, पति की दीघार्यु के लिए की कामना

संजीवनी टुडे 22-05-2020 17:00:18

सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा पर्व वट सावित्री व्रत शुक्रवार को श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया। महिलाओं ने निर्जल व्रत रखकर मां गौरा और भगवान शिव की पूजा की।


हरिद्वार। सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा पर्व वट सावित्री व्रत शुक्रवार को श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया। महिलाओं ने निर्जल व्रत रखकर मां गौरा और भगवान शिव की पूजा की। वट वृक्ष का पूजन कर पति की दीघार्यु की कामना की। व्रत के परायण पर सुहागिन महिलाओं ने घर की बुजुर्ग महिलओं को बायना देकर उनका आशीर्वाद लिया। उधर, वट सावित्री पूजन पर भी लॉक डाउन का प्रभाव देखने को मिला। महिलाएं सामूहिक रूप से वट वृक्ष की पूजा नहीं कर सकीं।

वट सावित्री व्रत के संबंध में ज्योतिषाचार्य पं. देवेन्द्र शुक्ल शास्त्री ने बताया कि पुरातन काल में मद्र देश में अश्वपति नाम के प्रतापी राजा रहते थे। वे धर्मात्मा थे किंतु संतानहीन थे।  उन्होंने एक यज्ञ कराया जिसके प्रभाव से एक कन्या उत्पन्न हुई। कन्या का नाम सावित्री रखा गया। बड़ी होने पर उसने विवाह के लिए सत्यवान का वरण किया। 

नारद जी ने सत्यवान को गुणी और धर्मात्मा बताने के साथ उसे अल्पायु बताया और कहा कि एक वर्ष बाद उसकी मृत्यु हो जाएगी। राजा चिंतित हुए और सावित्री को उसका निर्णय बदलने के लिए बहुत समझाया किंतु सावित्री अपने निर्णय से नहीं डिगी। जिस दिन सत्यवान की मृत्यु होनी थी, उस दिन वह जंगल में लकड़ी काटने जा रहा था। सावित्री भी उसके संग चल दी।

सत्यवान जैसे ही कुल्हाड़ी लेकर पेड़ पर चढ़ा, उसके सिर में दर्द हुआ और नीचे उतरकर सावित्री की गोद में सिर रखकर लेट गया। कुछ समय पश्चात यमराज दूतों सहित आए सत्यवान के प्राणों को लेकर दक्षिण दिशा की ओर चलने लगे। सावित्री भी पीछे-पीछे चल दी। यमराज के बार-बार कहने पर वह नहीं मानी।

यमराज ने खुश होकर वर मांगने के लिए कहा। उसने वर में अंधे सास-ससुर को नेत्र और गया हुआ राज-पाट भी वापस मांग लिया। यमराज आगे बढ़े तो सावित्री पुनः यमराज के पीछे-पीछे चलने लगी। यमराज ने खुश होकर पुनः अंतिम वर मांगने को कहा। तब सावित्री ने कहा कि मैं सत्यवान के 100 पुत्रों की मां बनना चाहती हूं। यमराज तथास्तु कहकर अंतर्धान हो गए। सावित्री वट वृक्ष के नीचे आई तो उसके पति जीवित हो गए। 

इस तरह सावित्री अपने तपोबल से अपने खोए राज्य तथा पति को भी यमराज से वापस लाई। तभी से इस व्रत को करने की परंपरा चली आ रही है। इसी कारण सुहागिन महिलाएं हर साल वट सावित्री का व्रत रखते हुए पति के दीघार्यु होने की कामना करती हैं।

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